एकला चलो रे - रबिन्द्रनाथ ठाकुर

एकला चलो रे – रवींद्रनाथ ठाकुर का सुप्रसिद्ध बंगला गीत

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हम शांतिनिकेतन में थे। सम्पूर्ण वातावरण में ‘एकला चलो रे’ का स्वर गूंज रहा था। मैं कवि रवीन्द्रनाथ ठाकुर द्वारा स्थापित शांतिनिकेतन के प्रत्येक...

द्रौपदी का जन्मस्थान – प्राचीन पांचाल देश की राजधानी कांपिल्य

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https://youtu.be/rMdVU0H17V0 नीरा मिश्र ‘द्रौपदी ड्रीम ट्रस्ट’ की संस्थापक, अभिभावक एवं अध्यक्षा हैं। वे गत दो दशकों से सामाजिक व्यवसायी हैं तथा प्राचीन भारतीय धरोहरों को...
ओडिशा की उत्कृष्ट हाथ से बुनी साड़ियाँ

ओडिशा के प्रसिद्द स्मृतिचिन्ह – भुवनेश्वर, पुरी एवं कोणार्क से क्या लाएं?

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ओडिशा को लोग भारत के प्रसिद्ध सांस्कृतिक केंद्रों में से एक के रूप में कम ही जानते हैं। ओडिशा जैसे संस्कृति के धनी प्रदेश...
हलेबिडू स्थित होयेसलेश्वर मंदिर

होयसलेश्वर मन्दिर – हैलेबिडु कर्नाटक स्थित अद्भुत होयसल धरोहर

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कर्नाटक के बंगलुरु से लगभग २०० किलोमीटर दूर स्थित एक महत्वपूर्ण मंदिर नगरी है, हैलेबिडु। कला एवं साहित्य के संरक्षक माने जाते होयसल राजवंश...
एकता की प्रतिमा गुजरात

एकता की प्रतिमा – लौह पुरुष सरदार पटेल को एक श्रद्धांजलि

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नवीन युग की प्रतिमाओं में सर्वोत्तम मानी जानी वाली प्रतिमा निःसन्देह एकता की प्रतिमा अर्थात् स्टैचू ऑफ यूनिटी है। भव्य अधिरचना से युक्त, १८२...
बाटु गुफा के समुख भव्य मुरुगन मूर्ति

बाटु गुफाएं एवं भव्य मुरुगन मूर्ति – मलेशिया के कुआला लम्पूर के पास

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बाटु गुफाएं मानवी हस्तक्षेपों द्वारा अलंकृत एवं प्राकृतिक अचंभों का अप्रतिम संगम है। हजारों वर्षों पूर्व से अस्तित्व में रही इन प्राचीन प्राकृतिक गुफाओं...
भीमबेटका के प्राचीन शैलचित्र

भीमबेटका शैलाश्रय एवं प्रागैतिहासिक गुफा चित्र

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मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से ४५ किलोमीटर दक्षिण की ओर, भोपाल-होशंगाबाद राजमार्ग पर भीमबेटका नामक विश्व धरोहर स्थल है। जब आप भोपाल से होशंगाबाद...
कन्याकुमारी का सूर्योदय एवं सूर्यास्त

कन्याकुमारी के सर्वोत्तम दर्शनीय स्थल

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कन्याकुमारी का भ्रमण मेरा बहुत पुराना स्वप्न था। कदाचित उस समय से जब मैंने भारत के संदर्भ में ‘कश्मीर से कन्याकुमारी तक’ यह उक्ति...
रत्नागिरी महाविहार का सुसज्जित द्वार

उदयगिरी, रत्नागिरी एवं ललितगिरी- ओडिशा का बौद्ध इतिहास

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उदयगिरी, रत्नागिरी एवं ललितगिरी ओडिशा में प्राचीन बौद्ध धर्म की अंतिम स्मृतियाँ हैं। इन स्थलों का संबंध बौद्ध धर्म के उदय से भले ही...

“चैती” एक ऋतु की लोक गायन शैली से परिचय

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हिन्दुस्तानी संगीत के तीन मुख्य स्वरूप है –लोक संगीत, शास्त्रीय संगीत और उपशास्त्रीय संगीत। 'लोक' शब्द संस्कृत के 'लोकदर्शने' धातु में 'घञ् प्रत्यय लगाकर बना...

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