मथुरा वृन्दावन में ब्रज की होली

चलिए मथुरा वृन्दावन में ब्रज की होली का आनंद लेने

होली का पर्व भारत का सर्वाधिक उल्हासपूर्ण पर्व है। इसी होली के आनंददायक पर्व का यदि आप कहीं पारंपरिक रूप से अनुभव लेना चाहते हैं तो वह स्थान है, ब्रज भूमि अथवा मथुरा वृन्दावन...
चुनरी मनोरथ अनुष्ठान मथुरा में यमुना नदी पर

चुनरी मनोरथ – मथुरा में यमुना जी का चुनरी ओढ़ना

श्री कृष्ण के काल को बहुधा इन तीन धरोहरों से जोड़ा जाता है, गोवर्धन पर्वत, ब्रज भूमि तथा यमुना नदी। यमुना नदी का श्याम वर्ण जल कृष्ण के श्याम वर्ण के समान है। यमुना उनकी...
मथुरा के पेड़े

ब्रजवासी का मथुरा पेड़ा- उत्कृष्ट पाककृति की एक झलक

मथुरा पेड़ा! आपने नाम तो सुना ही होगा। वस्तुतः इसे खाया भी होगा। अतः मथुरा पेड़ा का नाम सुनकर मुँह में पानी आना स्वाभाविक है, है ना? ऐसी ही एक और स्वादिष्ट मिठाई है...
गोवर्धन पर्वत शिला

गोवर्धन परिक्रमा – वह पर्वत जिसे कृष्ण ने अपनी कनिष्ठिका पे उठाया था

गोवर्धन पर्वत, यमुना एवं ब्रज भूमि – केवल यही तीन मूल धरोहर कृष्ण के समय से अब तक अस्तित्व में हैं। कम से कम उस नाविक की दृष्टि में तो यही सनातन सत्य है...
firozabad bangles

फिरोजाबाद – रंगबिरंगी कांच की चूड़ियों की सुहाग नगरी

फिरोजाबाद, इस नगरी के नाम का स्मरण सदैव से मेरे कानों में कांच की चूड़ियों की खनक उत्पन्न करता रहा है। सम्पूर्ण भारत में मैं किसी भी मेले अथवा बाजार में रंगबिरंगी चमचमाती कांच...
नाग वासुकी मंदिर - प्रयागराज के प्राचीन मंदिर

त्रिवेणी संगम की नगरी प्रयागराज के प्राचीन मंदिर

प्रयागराज के प्राचीन मंदिरों के विषय में प्रयागराज नगरी से बाहर कदाचित ही कोई जानता हो। हम प्रयागराज को त्रिवेणी संगम से ही अधिक जानते हैं। त्रिवेणी संगम अर्थात् गंगा, यमुना एवं सरस्वती का...
भरद्वाज मुनि की विशाल प्रतिमा - प्रयागराज

प्रयागराज के अनमोल धरोहरों का दर्शन- एक पदभ्रमण

प्रयागराज, जिसे कुछ समय के लिए इलाहाबाद भी कहा जाता था, एक छोटा किन्तु अत्यंत महत्वपूर्ण नगर है। भारत के तीन प्रधानमंत्री प्रयागराज नगर के निवासी थे जिनमें दो का जन्म भी प्रयागराज में...
गंगा आरती दशाश्वमेध घाट वाराणसी

वाराणसी के दशाश्वमेध घाट में गंगा जी की दर्शनीय आरती

वाराणसी के दशाश्वमेध घाट में गंगाजी की आरती एक विलोभनीय दृश्य है। नदियों को पूजने की भारत की प्राचीन परंपरा को नवीनता प्रदान कर विभिन्न जन समुदायों को कैसे आकर्षित किया जाता है, गंगाजी...
कुम्भ मेला - मानवता का सबसे बड़ा और प्राचीनतम मेला

प्रयागराज में कुंभ मेला २०१९- प्रस्थान पूर्व आवश्यक जानकारी

कुंभ मेला अपने नाम के अनुसार एक पूर्णतय: भरे घड़े के सामान है। इसके भीतर वास्तव में क्या है इसकी व्याख्या करना कठिन है। आप जितना अधिक इसे देखेंगे, अनुभव करेंगे तथा इसमें भाग...

नैमिषारण्य – वेदों, पुराणों, सत्यनारायण कथा एवं ८८,००० ऋषियों की तपोभूमि

हम में से जिन्होने भी हिन्दू धर्मं ग्रन्थ पढ़े हों उनके समक्ष नैमिषारण्य, इस सुन्दर शब्द का उल्लेख कई बार आया होगा। नैमिषारण्य लखनऊ से लगभग ९० की.मी. दूर, सीतापुर जिले में गोमती नदी...

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