प्राचीन रुक्मिणी मंदिर - द्वारका

रुक्मिणी मंदिर – द्वारका की रानी से एक साक्षात्कार

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बालपन से ही हमने पढ़ा व सुना था कि श्री कृष्ण की पहली रानी रुक्मिणी थी। कहने का अर्थ है कि उन्होंने सर्वप्रथम रुक्मिणी से विवाह किया था। तत्पश्चात आयीं सत्यभामा, जाम्बवती तथा अन्य।...
एकता की प्रतिमा गुजरात

एकता की प्रतिमा – लौह पुरुष सरदार पटेल को एक श्रद्धांजलि

नवीन युग की प्रतिमाओं में सर्वोत्तम मानी जानी वाली प्रतिमा निःसन्देह एकता की प्रतिमा अर्थात् स्टैचू ऑफ यूनिटी है। भव्य अधिरचना से युक्त, १८२ मीटर ऊंची यह अद्वितीय प्रतिमा विश्व की सर्वाधिक ऊंची प्रतिमा...
सहस्त्रलिंग तलाव - पाटन गुजरात

सहस्त्रलिंग तलाव – एक प्राचीन विरासत, पाटण गुजरात

मंत्रमुग्ध कर देनेवाली रानी की वाव के ठीक पीछे सहस्त्रलिंग तलाव स्थित है। अगर आज भी यह संरचना अपने पूर्ण स्वरूप में होती तो रानी की वाव से अधिक शानदार हो न हो पर...
बेट द्वारका को ले जाती नावें

बेट द्वारका महाभारत की स्वर्णिम नगरी के दर्शनीय स्थल

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कुछ दिनों पूर्व मुझे गुजरात के द्वारका की यात्रा का अनमोल अवसर प्राप्त हुआ था। मैंने इस अवसर का पूर्ण लाभ उठाने का निश्चय किया तथा बेट द्वारका को अपनी यात्रा कार्यक्रम में प्रथम...
द्वारका में गोमती संगम

गुजरात में श्री कृष्ण की स्वर्णिम द्वारका नगरी के १५ अद्भुत पर्यटक स्थल

द्वारका नगरी से कदाचित ही कोई अनभिज्ञ होगा। यह एक प्राचीन नगरी है जो पौराणिक कथाओं से परिपूर्ण है। द्वारका में आप जहां भी जाएँ, ये सब कथाएं आपके समक्ष पुनः पुनः सजीव होती...
पावागढ़ पहाड़ी चढ़ने का पैदल मार्ग

ऐतिहासिक पावागढ़ पहाड़ी – गुजरात की यूनेस्को विश्व धरोहर

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चंपानेर एवं पावागढ़ पहाड़ी, ये दो शब्द मैंने सदैव एक साथ सुने थे। भारत में यूनेस्को द्वारा घोषित बहुत कम विश्व धरोहर स्थल बचे थे जिनके दर्शन मैंने अब तक नहीं किये थे। पावागढ़...
लोथल - गुजरात

लोथल – सिंधु घाटी सभ्यता के अवशेषों का अवलोकन

लोथल उस भारत का चिन्ह है जिस काल में भारतीय उपमहाद्वीप में बहती सरस्वती नदी के किनारे पर मानव जीवन का वास हुआ करता था। जिसके प्रमाण आज भी सरस्वती नदी और उसकी उप-नदियों...
द्वारकाधीश मंदिर - द्वारका

द्वारकाधीश मंदिर का वास्तुशिल्प- विलक्षण द्वारका की अद्भुत धरोहर

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वो कहते हैं ना की द्वारका के सभी रास्ते द्वारकाधीश मंदिर की ओर जाते हैं। यह बांका ऊँचा मंदिर भारत के सुदूर पश्चिमी छोर पर स्थित है जहां गोमती नदी का अरब सागर से...
मूल द्वारका मंदिर परिसर प्रवेश द्वार

द्वारका गुजरात के आसपास बिखरे प्राचीन तीर्थ स्थान

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स्कन्द पुराण के अनुसार द्वारका नगरी को ऐतिहासिक रूप से प्रभास क्षेत्र का ही एक भाग माना जाता है। प्रभास एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है, दीप्तिवान, ज्योतिर्मय, प्रकाशवान, अर्थात जो प्रकाश उत्पन्न...
मोधेरा सूर्य मंदिर

मोढेरा का सूर्य मंदिर

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मोढेरा का सूर्य मंदिर कर्क रेखा पे अपने ईष्ट देव की और मुहँ बाये कमल पट्ट पे खड़ा मोढेरा का सूर्य मंदिर पुष्कारणी में माला से गूँथे हैं छोटे बड़े मंदिर जिनकी छवि से हैं खेलते जल जन्तु कच्छ और मच्छ सभा मंडप...

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