एकला चलो रे – रवींद्रनाथ ठाकुर का सुप्रसिद्ध बंगला गीत

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हम शांतिनिकेतन में थे। सम्पूर्ण वातावरण में ‘एकला चलो रे’ का स्वर गूंज रहा था। मैं कवि रवीन्द्रनाथ ठाकुर द्वारा स्थापित शांतिनिकेतन के प्रत्येक तत्व को देख रही थी एवं अनुभव कर रही थी। एक ठेठ बंगाली गाँव के ग्रामीण परिवेश की छाप लिए इस शांतिनिकेतन में चारों ओर रवीन्द्रनाथ ठाकुर के पदचिन्ह एवं उनकी धरोहर की झलक स्पष्ट दृष्टिगोचर होती है।

बाउल गायक के स्वरों में ‘एकला चलो रे’ का विडिओ

शांतिनिकेतन के कलात्मक वातावरण में मेरे सम्पूर्ण अनुभव की चरमसीमा थी, बाउल गायक श्री प्रदीप दास बाउल द्वारा गाया हुआ ‘एकला चलो रे’ गीत का श्रवण। इससे पूर्व मैंने अनेक प्रसिद्ध गायकों को यह गीत गाते सुना था। उनमें बंगाली मूल के गायक भी सम्मिलित हैं। किन्तु प्रत्यक्ष एक बाउल गायक के समक्ष बैठकर उन्हे यह गीत गाते सुनना एक अविस्मरणीय अनुभव था। चारों ओर कण कण में विराजमान रवीन्द्रनाथ ठाकुर की कलात्मक परिकल्पना के मध्य उन्ही द्वारा रचित गीत को सुनना इस अनुभव को अतुलनीय बना रही थी।

‘एकला चलो रे’ के बोल

Ekla Chalo Re Hindi Lyricsजब वापिस घर पहुंची, श्री प्रदीप दास बाउल के स्वर मेरे कानों में गूंज रहे थे। सम्पूर्ण अनुभव की स्मृतियाँ मेरे मानसपटल पर छायी हुई थीं। अब समय था उस गीत के बोल को समझने का। इसमें गूगल एवं विकिपिडिया ने मेरी पूर्ण सहायता की। वहाँ से मुझे गीत के बोल के साथ उसका अर्थ भी ज्ञात हुआ। कुछ दिनों तक किशोर कुमार जैसे प्रसिद्ध गायकों द्वारा गाए हुए इस गीत के सुर में सुर मिलाते हुए मैंने भी अनेक बार इस गीत को गाया। गीत गाते हुए शनैः शनैः उन शब्दों में छुपे अर्थ मेरे समक्ष स्पष्ट होने लगे।

किशोर कुमार के स्वर में ‘एकला चलो रे’ का विडिओ

‘एकला चलो रे’ इस गीत की रचना रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने सन् १९०५ में एक पत्रिका ‘भंडार’ के लिए की थी। इसके पश्चात ‘बाउल’ नामक एक संकलन में इसका प्रकाशन हुआ था। यद्यपि मुझे इस संकलन के विषय में अधिक जानकारी नहीं है, तथापि मैं इस संकलन के विषय में जानने हेतु आतुर हूँ। कालांतर में एक अन्य संकलन ‘गीताबितान’ के स्वदेशी खंड में भी इसका प्रकाशन किया गया था। इस गीत को रवीन्द्रनाथ ठाकुर की भांजी इंदिरा देवी ने स्वरबद्ध किया था।

गीत का भावार्थ

इस गीत को स्वयं रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने रिकार्ड किया था किन्तु दुर्भाग्यवश वह रिकार्ड अब खो गया है। किन्तु यह गीत अब बंगाली संस्कृति का एक अभिन्न अंग हो गया है। स्वयं रवीन्द्रनाथ ठाकुर के स्वरों को छोड़कर अन्य अनेक गायकों के स्वर में यह गीत उपलब्ध है। रवीन्द्रनाथ ठाकुर की आवाज में इस गीत को ढूंढते समय मेरे हाथों में एक बाउल गायक द्वारा गाया गया यही गीत हाथ लगा। इस संस्करण में आप दो-तारे की ध्वनि को स्पष्ट सुन सकते हैं। दो-तारा एक संगीत वाद्य है जिसमें दो तार होते हैं। यह वाद्य बंगाल के बाउल गायकों का प्रिय वाद्य है।

दो-तारा संगीत वाद्य की संगत के साथ शास्त्रीय गायन शैली में प्रस्तुत इसी गीत का एक विडिओ

व्यक्तिगत रूप से मैं स्वयं को इस गीत से जुड़ा हुआ अनुभव करती हूँ। अपने अधिकतम जीवन की यात्रा मैंने अकेले ही पार की है।

मन्ना डे को एकला चलो रे के हिन्दी संस्करण को गाते हुए सुनिए।

जब रवीन्द्रनाथ ठाकुर कहते हैं, ’जब कोई आपकी पुकार ना सुने, तो अकेले ही चलते रहिए’। इसे सुनकर मुझे अपने जीवन के अनेक मोड़ों का स्मरण होता है जब मैं यथार्थतः उसी स्थिति में थी। मैं जब भी कहीं जाना चाहती थी, मैं अनेक लोगों से साथ आने के लिए आग्रह करती थी। किन्तु जब कोई मेरी पुकार नहीं सुनता था तो मैं अकेले ही चल पड़ती थी। जब वापिस आती थी तब वे सब मेरे साथ उस पथ पर चलने की इच्छा व्यक्त करते थे।

अकेले चलने के लिए प्रेरित करता यह गीत आपको उन सब का साथ प्रदान करता है जो उस पथ पर अकेले चलते हुए अपनी छाप छोड़ गए हैं।

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जब आप दुखी होते हैं तब आप ऐसे किसी सहारे को ढूंढते हैं जो आपको सांत्वना दे सके। सामान्यतः आवश्यकता के समय ऐसी कोई सांत्वना हमें नहीं मिलती। उस स्थिति में अकेले ही अपनी समस्या से जूझते हुए आगे बढ़ना उचित है। यदि आप विश्व के दृष्टिकोण को परिवर्तित करना चाहते हैं तो सर्वप्रथम अपने भीतर ऐसा दीप प्रज्ज्वलित करें जो विश्व को एक नवीन पथ से अवगत कराए। नवीन पथ की रचना में स्वयं को झोंक देना पड़ता है, वह भी अकेले ही।

श्रेया घोषाल के स्वर में ‘एकला  चलो रे’ का विडिओ

यह गीत अस्तित्व के प्रत्येक स्तर पर प्रतिध्वनित होता है। व्यावहारिक स्तर पर इस गीत का संकेत है कि हमें प्रत्येक क्षण किसी ना किसी का सहारा प्राप्त हो ऐसा संभव नहीं है। भावनात्मक स्तर पर हम सब कभी ना कभी एकाकी अनुभव करते हैं, भले ही हम लोगों से घिरे हुए ही क्यों ना हों। आध्यात्मिक स्तर पर यह गीत संदेश देता है कि हम सब को अकेले ही चलता पड़ता है। एक साधक कभी भी समूह में नहीं चलता, जैसा कि एक भक्तिगीत में भी कहा गया है, ‘साधु ना चले जमात’।

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यह एक प्रेरणादायक गीत है। यह एक ऐसा गीत है जो आपको उस समय सहारा दे सकता है जब आपको उसकी अत्यधिक आवश्यकता है। यह आपको समक्ष स्थित संकट से विचलित ना होने का संदेश देता है। यह आपको आंतरिक शक्ति प्रदान करता है तथा सांत्वना देता है कि आप जिस विपरीत परिस्थिति में है, दूसरे भी इस प्रकार की स्थिति में अनेक बार आते हैं।

अमिताभ बच्चन के स्वर में ‘एकला  चलो रे’ का विडिओ

कुछ समय पूर्ण यह गीत पुनः चर्चा में आया था तथा प्रसिद्धि की सीमाएं लांघ गया था जब प्रसिद्ध अभिनेता अमिताभ बच्चन ने अपने प्रतिष्ठित स्वर में ‘कहानी’ नामक चित्रपट में यह गीत गाया था।

एकला चलो रे - रबिन्द्रनाथ ठाकुर यूं तो इस गीत को अनेक प्रसिद्ध लोगों ने अपनी अपनी शैली में गाकर इसे उतनी ही गरिमा प्रदान की है। उनमें से कुछ मैंने आपके लिए इस संस्करण में प्रस्तुत किया है। आशा है आपको इन्हे सुनकर अत्यंत आनंद आया होगा। रवीन्द्रनाथ ठाकुर के इस गीत का कौन सा संस्करण आपको सर्वाधिक प्रिय प्रतीत हुआ? क्या आप इस गीत का कोई अन्य संस्करण भी जानते हैं? यदि हाँ, तो हमें अवश्य सूचित करें।

अनुवाद: मधुमिता ताम्हणे

2 COMMENTS

  1. अनुराधा जी-मीता जी,
    एकला चलो रे….गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर जी की कालजयी रचना ! गुरुदेव द्वारा रचित यह गीत सही में प्रेरणादायी और ऊर्जा से परिपूर्ण हैं । आलेख में इस गीत के बारे में बहुत ही सुंदर जानकारी दी गई है तथा साथ में दिये विडियो में प्रसिद्ध गायकों ने इसे बड़ी ही सुंदरता से गाया है , परन्तु इस गीत को, मधुर भाषा बंगाली में सुनने से एक अलग ही अनुभूति होती हैं ।
    गुरुदेव की आवाज़ में गीत का उपलब्ध न होना दुर्भाग्यपूर्ण है ।
    सुंदर आलेख हेतु धन्यवाद !

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