सुप्रसिद्ध राम भजन जो राम नाम में ओत-प्रोत कर दें

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10 सुप्रसिद्ध राम भजनभारत के सर्वाधिक महत्वपूर्ण पर्वों में एक पर्व है दीपावली। दीपावली अर्थात् घरों का रंग रोगन व सजावट, नवीन वस्त्रों की खरीदी, व्यापारियों का नवीन वित्तीय वर्षारंभ, भिन्न भिन्न मिष्टान्न व पक्वान्न, पटाखे, गुलाबी ठंड की शुरुआत तथा आनंद व उत्साह की पराकाष्ठा। दीपावली का उत्सव मनाने के पीछे हेतु क्या है? जी हाँ! हम यह त्यौहार मनाते हैं भगवान् राम द्वारा श्रीलंका में रावण का वध कर, सीता सहित अयोध्या वापिस लौटने की प्रसन्नता व्यक्त करने हेतु। अतः दीपावली में हम भगवान् राम का उत्सव मनाते हैं।

इसी तरह राम नवमी पर भी हम श्री राम का जन्मोत्सव मानते हैं।

तो भगवान् राम का उत्सव मनाने की सर्वोत्तम रीति क्या है? ऐसा माना जाता है कि हिन्दु पञ्चांग के चौथे युग, कलयुग में केवल राम का नाम लेने भर से ही हमारी सर्व समस्याओं का समाधान हो जाता है। तो चलिए सबसे पहले सुनते हैं अयोध्या के मंदिरों की राम धुन:

राम नाम तथा राम धुन हिन्दू संस्कृति का अभिन्न अंग है। यूं तो राम नाम के जप हेतु आपको किसी सहायता की आवश्यकता नहीं है अपितु राम धुन हेतु राम के १० सर्वाधिक लोकप्रिय भजनों का संकलन आपको आनंदित करने के लिए  प्रस्तुत है।

राम भजन

दीपावली के अवसर पर प्रस्तुत है १० सर्वोत्तम राम भजन:-

रघुपति राघव राजा राम – राम भजनों में सर्वाधिक गया जाने वाला भजन

रघुपति राघव राजा राम – यह राम धुन नम नारायण नामक ग्रन्थ से आंशिक रूप से व्युत्पन्न है। आप कदाचित नम नारायण ग्रन्थ से अवगत ना हों तथापि वाल्मीकि रामायण के विषय में जानकारी सर्व विदित है। २४००० छंदों में रचित वाल्मीकि रामायण प्रतिदिन जपना कठिन है। अतः २४००० छंदों के वाल्मीकि रामायण का सार १०८ छंदों द्वारा संक्षिप्त में गठित किया गया है। इसे ही नम नारायण कहा जाता है। प्रतिदिन जप करने हेतु यह नम नारायण अतिउपयुक्त है।

रघुपति राघव राजा राम, भक्तों के बीच इस भजन की प्रसिद्धि तब चरम सीमा पर पहुँची जब गांधीजी ने स्वतंत्रता संघर्ष हेतु इस राम भजन को अपनाया था। यद्यपि मूल भजन तथा गांधीजी के संस्करण में भिन्नता है क्योंकि उन्होंने मूल भजन में स्वतंत्रता संघर्ष के सन्दर्भ में परिवर्तन किये थे। मूल भजन तथा गांधीजी के संस्करण के बोल इस प्रकार हैं-

रघुपति राघव राजा राम भजन के बोल
रघुपति राघव राजा राम भजन के बोल

यूँ तो इस भजन को कई गायकों ने गाया व वादकों ने बजाया है तथापि मेरी व्यक्तिगत प्रिय प्रस्तुति है उस्ताद बिस्मिल्लाह खान द्वारा शहनाई पर बजाई गयी रघुपति राघव राजा राम की धुन। वही सुमधुर धुन आपके लिए यहाँ प्रस्तुत है-

इनके अतिरिक्त पंडित डी. वी. पलुस्कर, हरी ओम शरण तथा स्व. एम्. एस. सुब्बलक्ष्मी ने भी इस भजन को उत्कृष्ट रूप में प्रस्तुत किया है।

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित- श्री राम चन्द्र कृपालु भज मन

श्री राम चन्द्र कृपालु भज मन , यह गोस्वामी तुलसीदासजी द्वारा संस्कृत में रचित राम भजन है। संगीत की दुनिया के लगभग सभी प्रसिद्ध गायकों द्वारा इस भजन की प्रस्तुतीकरण उपलब्ध है। मैंने आप सब के लिए एक मनमोहक प्रस्तुतीकरण का चुनाव किया है जिसमें एक नन्ही बालिका, सूर्यगायत्री ने अपने मधुर स्वरों द्वारा इस भजन को चार चाँद लगा दिए हैं।

यदि आप अधिक परिपक्व स्वर में प्रसिद्ध प्रस्तुतीकरण सुनना चाहें तो इन दो गायकी की चर्चा अवश्य की जायेगी। एक है दिव्यात्मा एम्.एस. सुब्बलक्ष्मी जिन्होंने राग सिन्धु भैरवी में अत्यंत सहजता से यह भजन प्रस्तुत किया है। दूसरा है राग यमन कल्याण में प्रसिद्ध गायक बंधुओं, राजन मिश्रा व साजन मिश्रा द्वारा गाया गया यह भजन।

श्री राम चन्द्र कृपालु भज मन - बोल
श्री राम चन्द्र कृपालु भज मन – बोल

यदि आप स्वयं भी यह भजन इन गायकों के स्वरों के साथ दुहराना चाहें तो आपकी सहायता हेतु इसके बोल प्रस्तुत हैं। श्री राम चन्द्र कृपालु भज मन, इस भजन में भगवान् श्री राम के महात्मय का वर्णन किया गया है।

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित- ठुमक चलत राम चन्द्र

ठुमक चलत राम चन्द्र, इस भजन के रचयिता गोस्वामी तुलसीदासजी ने भगवान् राम की बाल लीलाओं का वर्णन किया है। तुलसीदासजी कहते हैं कि रामचन्द्रजी अपनी बाल्यावस्था में चलने का प्रयत्न करते हुए बार बार गिर रहे हैं। महाराज दशरथ की तीनों रानियाँ अत्यंत प्रेम से उनका ध्यान बंटाती हुई उन्हें फिर खड़े होकर चलने हेतु प्रोत्साहित कर रही हैं। तुलसीदासजी ने बाल राम की मनमोहक सूरत एवं उनके हावभाव का इतनी सुन्दरता से वर्णन किया है कि उनकी मनोहारी छवि आँखों के समक्ष साकार होने लगती है। तुलसीदासजी यह भी कहते हैं कि भगवान् राम की मनोरम छवि एवं इस सम्पूर्ण दृश्य को देख वे आत्मविभोर हो रहे हैं तथा स्वयं को उनके रंग में रंगता अनुभव कर रहे हैं।

ठुमक चलत राम चन्द्र भी एक प्रसिद्ध भजन है जिसे कई जाने माने गायकों ने अपने सुरों से सजाया है। मेरी प्रिय प्रस्तुति, पंडित पुरुषोत्तम दास जलोटाजी द्वारा गाया यह भजन आपके हेतु प्रस्तुत है।

इस भजन को पंडित पुरुषोत्तम दास जलोटाजी के सुपुत्र अनूप जलोटा जी ने भी गया है। यहाँ वे गायकी के साथ साथ सम्पूर्ण दृश्य की व्याख्या भी कर रहे हैं।

पंडित रोनू मजूमदार जी ने इसी भजन को अपनी बांसुरी द्वारा बजाकर उसकी मधुरता को चरम सीमा तक पहुंचा दिया है।
आप सब भी इस भजन के निम्नलिखित बोल पढ़ कर सम्पूर्ण दृश्य को अपने सम्मुख सजीव कर सकते हैं।

ठुमक चालत राम चन्द्र - बोल
ठुमक चालत राम चन्द्र – बोल

इसके अलावा, स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर जी ने इस भजन को वात्सल्य रस में गा कर एक माता एवं उसके रामलल्ला के मध्य प्रेम को सुन्दरता से प्रस्तुत किया है। पंडित डी. वी. पलुस्करजी ने इसे शास्त्रीय संगीत में बांधकर इसे नयी ऊंचाईयां प्रदान की हैं।

मीरा बाई द्वारा रचित – पायो जी मैंने राम रतन धन पायो

मीराबाई को आप सब परम कृष्ण भक्त के रूप में जानते हैं। भगवान् कृष्ण हेतु उन्होंने अनगिनत भजन रचे एवं गाये हैं। उपरोक्त भजन उन्होंने भगवान् राम हेतु रचा था। वे कहती हैं कि राम को पाकर उन्होंने बहुमूल्य खजाना प्राप्त कर लिया है। यह ऐसा खजाना है जिसकी प्रत्येक दिवस वृद्धि होती जाती है तथा इसे कोई छीन भी नहीं सकता।

पंडित डी. वी. पलुस्कर द्वारा गाये गए इस भावपूर्ण भजन को सुन आपका रोम रोम आनंदित हो उठेगा।

प्रस्तुत है इस भजन की दो और प्रस्तुतियाँ। पहली, स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर द्वारा गायी गयी तथा दूसरी, पंडित रोनू मजूमदार द्वारा बांसुरी पर बजायी गयी मनमोहक प्रस्तुति।

आप साथ गुनगुनाना चाहें तो आपके हेतु इस भजन के बोल भी प्रस्तुत हैं।

पायो जी मैंने राम रतन धन पायो - बोल
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो – बोल

राम सिमर राम – गुरु नानकजी का शबद

गुरु नानकजी ने भी भगवान् राम की स्तुति में शबद गाये हैं। प्रस्तुत है गजल सम्राट जगजीत सिंग द्वारा गाई गयी यह भावपूर्ण शबद।

आप यह जानकर अचम्भित रह जायेंगे कि इस शबद को दक्षिण भारतीय संगीत साम्राज्ञी एम्.एस. सुब्बलक्ष्मीजी ने भी गाया है।

जब जानकी नाथ सहाय करे – गोस्वामी तुलसीदासजी

जब जानकी नाथ सहाय करे, यह गोस्वामी तुलसीदासजी द्वारा रचित एक और भजन है जो भगवान् पर विश्वास का पाठ पढ़ाता है। इस भजन में गोस्वामी तुलसीदासजी कहते हैं कि जब जानकी नाथ भगवान् राम आपका रक्षण कर रहे हैं तो कौन आपको हानि पहुंचा सकता है। आपके समक्ष चाहे जितनी बुरी शक्तियां आकर खड़ी हो जाएँ, चाहे वह राहू या केतु हो या दुष्ट दुश्शासन का चरित्र धारण किये मनुष्य, भगवान् राम आपकी सदैव रक्षा करेंगे।
यही भजन आपके लिए प्रस्तुत है पंडित छानुलाल मिश्राजी के मधुर स्वरों में-

साथ गुनगुनाने हेतु इस भजन के बोल इस प्रकार हैं-

जब जानकी नाथ सहाय करें भजन - बोल
जब जानकी नाथ सहाय करें भजन – बोल

इस भजन को कई अन्य प्रसिद्ध गायकों ने भी स्वरबद्ध किया है जैसे संगीत सम्राट पंडित डी. वी. पलुस्कर, पंडित अजय चक्रवर्ती तथा रुचिरा केदारपंडित रोनू मजूमदार द्वारा बांसुरी में बजाया गया यह भजन भी अत्यंत मधुर है।

राम रंग रंगले मन – एक मराठी भजन

यह भजन मैंने अपने पतिदेव के पंडित भीमसेन जोशीजी के गाये भजनों के संग्रह में से ढूंड निकाला था। यह एक छोटा सा भजन है जो हमें राम रंग, आत्म रंग एवं विश्व रंग में सराबोर होने के लिए कहता है। राम रंग रंगले मन इस भजन का मेरा विवेचन है कि कवि हमें अस्तित्व के प्रत्येक स्तर पर राम रस में डूब जाने हेतु प्रेरित कर रहा है, फिर चाहे वह सांसारिक स्तर पर हो या भावनात्मक स्तर पर।

प्रस्तुत है पंडित भीमसेन जोशीजी द्वारा राग मिश्र पहाड़ी में गाया गया यह भजन-

श्री राम कहे समझाई

श्री राम कहे समझाई, इस रचना में उस समय का दृश्य दर्शाया गया है जब महारानी कैकेयी ने अपने दो वरदानों के आधार पर महाराज दशरथ को विवश कर दिया था कि वे पुत्र राम को १४ वर्षों के वनवास पर जाने का आदेश दें। महाराज दशरथ के शब्दों ने राम के अनुज लक्ष्मण को अत्यंत आहत एवं क्रोधित कर दिया है। तब भगवान् राम उन्हें समझते हैं कि उन्होंने स्वयं पिताश्री के आदेश को पूर्ण श्रद्धा से स्वीकार कर लिया है। वे इस सजा हेतु माता कैकेयी को भी दोष नहीं दे रहे हैं। वे समझा रहे हैं कि यह हमारे भाग्य की देन है, ना कि किसी मनुष्य की करनी। भगवान् राम लक्ष्मण को यह भी कहते हैं कि वे स्वयं वस्तुस्थिति से आहत नहीं हैं। वे उन्हें भी दुखी ना होने का आग्रह कर रहे हैं। इसी दृश्य को समक्ष प्रस्तुत करते हुए, इस भजन द्वारा रचयिता हमसे कहने का प्रयत्न कर रहे हैं कि हम भाग्य का लिखा स्वीकार करें एवं स्वयं को किसी भी स्थिति में आहत ना होने दें।

राग जौनपुरी में पंडित भीमसेन जोशी द्वारा गाया यह राम भजन आपके समक्ष प्रस्तुत है-

श्री राम चरणं समस्त जगतं – राम स्तुति

यह राम भजन एक राम स्तुति है जो हमें यह बताती है कि भगवान् के चरणों में ही समस्त विश्व समाहित है। भक्ति रस में ओतप्रोत इस राम भजन को यहाँ पंडित जसराज जी ने उतनी ही श्रद्धा एवं मधुरता से प्रस्तुत किया है-

रणजीति राम राऊ आये

रणजीति राम राऊ आये, यह उन भजनों में से एक है जो खरे अर्थ में दीपावली के पर्व से सम्बन्ध रखता है। लंका युद्ध पर विजय प्राप्त कर भगवान् राम जब सीता सहित अयोध्या पधारते हैं, सम्पूर्ण अयोध्या हर्ष एवं उल्हास से उनका स्वागत करती है। इसी आनंद को प्रदर्शित करता यह राम भजन प्रस्तुत है जिसे ध्रुपद गायकी में गुंदेचा बंधुओं ने मधुर स्वरों में बाँधा है-

रामचरित मानस -पंडित छन्नूलाल मिश्र

अंत में सुनिए यह राम चरितमानस गायन जिसमे राम कथा का निचोड़ है अलग अलग गायन शैलियों में

आदित्य सेनगुप्ता जी, इंडीटेल्स के लिए अप्रतिम राम भजनों की सूची के संकलन हेतु आपका अनेक धन्यवाद! इंडीटेल्स के इस संस्करण में इन भजनों को एक कड़ी में पिरोने का मेरा प्रयास अत्यंत आनंददायी तथा आत्मसंतुष्टी प्रदान करने वाला था। अनेक रूपों में राम के विभिन्न चरित्रों को सजीव करते इन भजनों को आत्मसात करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

भगवान् राम एवं उनकी भक्ति ने मेरे रोम रोम को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। पहली बार ऐसा अनुभव हुआ जैसे राम भक्ति से ओतप्रोत संगीतमय दीपावली का पर्व मना लिया हो।

पाठकों के निवेदन है कि यदि आपका प्रिय राम भजन इस सूची में सम्मिलित नहीं है तो उसका उल्लेख निम्न दर्शित टिप्पणी खंड में अवश्य करें।

भगवान् राम से प्रार्थना है कि वह आपके जीवन में सुख, ऐश्वर्य एवं हर्षोल्हास की रोशनी भर दे!

अनुवाद: मधुमिता ताम्हणे

7 COMMENTS

  1. अनुराधाजी,
    इस बार लीक से हटकर एक अलग ही प्रस्तुति देखकर बहुत ही प्रसन्नता हुई. प्रभु राम की स्तुति मे अनेक दिग्गज गायकों ने अलग अलग भाषाओ में अनेक भजनो को अपने मधुर सुरो में गाया है. उन्हीमेसेचुनींदासर्वाधिकलोकप्रिय,कदाचित सर्वश्रेष्ठ भजनों की,पं.डी.वी.पलुस्कर,पं.पुरूषोत्तम दास जलोटा , पं.भीमसेनजोशी ,पं.जसराज,गुंदेचा बंधु तथा गज़ल सम्राट जगजीत सिंह जैसे महान संगीतकारों के स्वरों में प्रस्तुति , मन को आनंदीत करती है. साथ ही उस्ताद बिस्मिल्लाह खां साहब द्वारा शहनाई पर बजाई गयी राम धुन का तो जवाब ही नही !
    इन्ही मूर्धन्य शास्त्रीय गायकों के बीच नन्ही बालिका, सूर्यगायत्री की प्रस्तुति…..अप्रतिम !!
    रामनवमी के अवसर पर कर्ण प्रिय राम भजनों की प्रस्तुति हेतू अनेक अनेक धन्यवाद.

    • प्रदीप जी – कोशिश है की भारत के पर्व मन सकें यहाँ इस मंच पर भी. तो राम नवमी को संगीतमय रूप में मनाने के लिए इसे लिखा. होली पर भी ऐसी ही प्रस्तुति है, शीघ्र ही यहाँ लायेंगे.

  2. अनुराधा जी ,मैं पहली बार आपसे जुड़ रही हुँ ।
    आपने जो भजनों की सौगात दी है । वो काबिले तारीफ है ।
    जहाँ तक उस छोटी – सी बच्ची की गायकी का सवाल है । अप्रतिम है ।
    बहुत कम लोगों को ही ये सौभाग्य प्राप्त होता है ।
    धन्यवाद ।

    • प्रांजलि जी – हमसे से जुड़ने के लिए धन्यवाद। आप यूँ ही हमें प्रोत्साहन देते रहिये, और हम कहानियां, किस्से चुन चुन कर आप तक लाते रहेंगे।

  3. अनुराधा जी और मिता जी मैं आपसे पहली बार इस माध्यम से जुड़ रही हुँ ।
    अनुराधा जी आपने रामनवमी के अवसर पर ये जो कर्णप्रिय भजनों की सौगात दी है ,वो अप्रतिम है ।
    खासकर उस छोटीसी बच्ची की गायकी की बात है । प्रशंसनीय है ।
    ऐसी प्रतिभा कम ही लोगों में होती है ।
    धन्यवाद ।

  4. Sabhi bhajan bhakti se sarabor ker dene wale. Pt. Bimsen ke stuti atyant hi…..there are no words for feeling I found in my heart. Thank you sir.

    • आलोक जी – राम का नाम है ही ऐसा जो मग्न कर दे, हमसे जुड़ने के लिए धन्यवाद.

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