शिवसागर या सिबसागर – असम में मंदिरों की नगरी

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शिव दोल - शिवसागर, असम
शिव दोल – शिवसागर, असम

शिवसागर – असम के पर्यटक स्थल

दिखो नदी के किनारे पर, लगभग 380 कि.मी. गुवाहाटी के पूर्व में और जोरहाट के 60 कि.मी. पूर्व में एक छोटा पर अनोखा नगर, शिवसागर बसा हुआ है। इसे सिबसागर के नाम से भी जाना जाता है। लेकिन अब इसका नाम बदलकर शिवसागर रखा गया है। एक समय पर सिबसागर वह क्षेत्र हुआ करता था जहां से अहोम के महान राजाओं ने छः शताब्दियों से भी अधिक शासन किया। उन्होंने 19वी सदी के प्रारंभिक दौर तक राज्य किया, जिसके बाद वे बर्मियों के हाथों पराजित हुए। और अंत में इस क्षेत्र पर अंग्रेजों ने कब्जा कर लिया। उस समय इस क्षेत्र को रंगपुर के नाम से जाना जाता था। अब यह एक छोटा सा नगर बन गया है, जो अपने महान अतीत के अवशेषों का संरक्षण करता हुआ अपने आगंतुकों का स्वागत करता है। इस पूरे शहर में यहां-वहां स्मारकों के समूह बिखरे हुए हैं। इसका कारण यह है कि, एक के बाद एक राजाओं ने अपने अनुसार राज्य को विभिन्न स्थानों पर स्थानांतरित किया था। लेकिन आज उनमें से अधिकतर स्मारक सिबसागर का भाग बन चुके हैं। यह देखकर मुझे दिल्ली की याद आई, जहां पर ऐसे ही बहुत प्राचीन शहर हैं जो दिल्ली की वर्तमान सीमाओं में समा गए हैं।

जोरहाट से शिवसागर के मार्ग पर नामदांग स्टोन ब्रिज

नाम्दांग पत्थर का पुल - असम
नाम्दांग पत्थर का पुल – असम

जोरहाट से शिवसागर की ओर जाते समय आपको रास्ते में एक 300 साल से भी अधिक पुराना एक छोटा सा पुल मिलता है, जिसे नामदांग स्टोन ब्रिज नाम से जाना जाता है। इस पूरे पुल को एक ही पत्थर से बनाया गया है। नामदांग नदी पर बना हुआ यह पुल अब राष्ट्रीय महामार्ग 37 का भाग है।

शिवसागर सरोवर

शिवसागर पहुँचते ही सबसे पहले आपको एक विशाल सरोवर दिखेगा जो शिवसागर सरोवर कहलाता है। इस पूरे सरोवर में कुमुद और कमल के फूल छितराये हुए नज़र आते हैं, जिसकी पृष्ठभूमि में शानदार लाल मंदिरों का दृश्य दिखाई देता है। इसी सरोवर के नाम के आधार पर इस नगर को शिवसागर नाम दिया गया है। इस सरोवर के पास ही 3 मंदिर हैं जिन्हें शिवडोल, विष्णुडोल और देवीडोल के नाम से जाना जाता है। रानी अंबिका ने ये मंदिर 18वी सदी के प्रारंभिक काल के दौरान बनवाए थे, जिसके अनुसार ये मंदिर लगभग 300 साल पुराने हैं।

शिवडोल, विष्णुडोल और देवीडोल मंदिर

विष्णु दोल - शिवसागर, असम
विष्णु दोल – शिवसागर, असम

ये तीनों मंदिर लाल रंग के हैं और प्रत्येक मंदिर की शिखर भिन्न और प्रभावशाली है। यह मान लेना शायद तर्कसंगत होगा कि तीनों मंदिरों में शिवडोल मंदिर सबसे महत्वपूर्ण है। वह बाकी दोनों मंदिरों के बीच में स्थित है और उन दोनों की तुलना में थोड़ा ऊंचा भी है। शिवडोल और देवीडोल मंदिर के शिखर नगर की विशिष्ट शैली में बनायी गए हैं और उनके मंडप बंगाल की छला शैली में बनाये गए हैं। विष्णुडोल और जॉयडोल की शिखर थोड़ी भिन्न है जो औंधे वक्रीय शंकु के आकार की है और इस पर चौकौर विचित्र खांचे बने है, जिसपर पुष्पों की खुदाई की गयी है. शिखर के शीर्ष पर ३-४ अमलका है। इन सारे मंदिरों के सामने एक और खुला मंडप बनवाया गया है, जिसकी छत त्रिकोणीय कलई की बनी हुई है।

ये तीनों ढांचे ,यानि शिखर, मंडप और बाहरी छत इन मंदिरों को सम्मिश्रित वास्तुकला का उत्तम उदाहरण बनाते हैं। इन मंदिरों की भूरे पत्थरों से बनी बाहरी दीवारों पर खुदाई की गयी है। भीतर से इन तराशे हुए पत्थरों को दीवारों से जोड़ा गया है। यद्यपि यह देश का सबसे अच्छा या देखने योग्य नक्काशी काम नहीं है, लेकिन पत्थर की खुदाई का काम यहां के सभी हिन्दू देवताओं के मंदिरों में पाया जाता है। भूरे और लाल रंग का यह परस्पर मेल बहुत ही अनोखा और दिलचस्प है, जो नीरसता को भंग करता हुआ रंगीन तो लगता है पर भड़कीला नहीं दिखता। इन मंदिरों का गर्भगृह आम तौर पर जमीनी स्तर से थोड़ा नीचे होता है। यहां का वातावरण इतना उष्ण और नम होता है कि कुछ मिनटों में ही वहां पर खड़ा होना बहुत मुश्किल हो जाता है।

जॉयडोल मंदिर और जॉयसागर सरोवर

जॉय सागर - शिवसागर - असम
जॉय सागर – शिवसागर – असम

जॉयडोल मंदिर एक और बड़े से सरोवर, जॉयसागर के पास ही स्थित है। इसे राजा रुद्र सिंह ने अपनी माता जॉयमोती के सम्मान में बनवाया था। यह सरोवर बहुत ही सुंदर है और फूलों और पक्षियों से भरा रहता है। जब हम वहां पहुंचे तब यह मंदिर एकदम खाली था। जिसके कारण यह जगह बहुत ही शांत लग रही थी, जहां पर बैठकर आप चिंतन-मनन कर सकते हैं। यहां का मौसम बहुत ही सुहाना है।

शिवसागर में अहोम का साम्राज्य

जॉय डोल - शिवसागर, असम
जॉय डोल – शिवसागर, असम

अहोम चीनी वंशज थे जो कुछ काल के उपरांत हिन्दू धर्म में परिवर्तित हुए थे। उन्होंने हिन्दू राजाओं के रूप में लंबे समय के लिए राज्य किया। अनुसंधान के मामले में यह बहुत ही दिलचस्प विषय बन सकता है, जहां पर शासक ही शासन करने के लिए शासितों का धर्म अपनाते हैं। शिवसागर सरोवर के पास ही स्थित संग्रहालय में अहोम के राजाओं द्वारा प्रयुक्त चीजों का संग्रह है। यहां पर अहोम वंश के प्रमुख शासक राजा रुद्र सिंह, जिन्होंने 18वी सदी के दौरान शासन किया था, की बड़ी सी मूर्ति रखी गयी है। जाहिरा तौर पर अहोम के राजाओं को दफनाया गया था और उनके शव पर मिट्टी डालकर उस जगह को टीले का रूप दिया गया था। ये टीले बाद में मैदानों के रूप में प्रसिद्ध हुए। इस क्षेत्र में आपको ऐसे कई मैदान मिलेंगे। जैसे कि जोरहाट का मैदान, यद्यपि वहां देखने लायक कुछ भी नहीं है।

रंग घर, शिवसागर

रंग घर - शिवसागर, असम
रंग घर – शिवसागर, असम

रंग घर एक अकेला खड़ा स्मारक है, जो शिवसागर से ज्यादा दूर नहीं है। यह दो मंज़िला ढांचा मुगलों की बरादरी के जैसा दिखता है। कहा जाता है कि इस जगह से राजा, भैंसों की लड़ाई जैसे खेल और बीहू जैसे उत्सव देखा करते थे, जो घर के आस-पास आयोजित किए जाते थे। एक प्रकार से यह उनका मनोरंजन का मंडप था। 18वी सदी का यह सुंदर ढांचा फीके से गुलाबी रंग का है, जिसकी दीवारें अनेकों रूपांकनों से सुसज्जित हैं। इनमें से अधिकतर फूल पट्टी की बनावट है, जो मुगल के रूपांकनों से प्ररित है। ऊपरी मंज़िल के वृत्त खंड इस भवन को बरादरी रूप देते हैं, लेकिन उसकी छत उसे एक भिन्न पहचान प्रदान करती है। वह उलटी नाव जैसी है, जिसके दोनों सिरों पर मगरमच्छ की खुदाई की गयी है जो उसे चीनी स्वरूप देता है।

यह भवन छोटे-छोटे ईंटों से बनाया गया है जो उस युग की अधिकतर इमारतों में पाये जाते हैं। इस भवन को चूने से लीपा गया है। मुझे लगता है कि, यहाँ की उष्णता से भवन को ठंडा रखने के लिए उसपर चूना लगाया गया है।

तलातल घर, शिवसागर

तलातल महल - शिवसागर - असम
तलातल महल – शिवसागर – असम

रंग घर से थोड़ी दूर अहोम राजाओं का पुराने जमाने का सात मंज़िला महल है जिसे तलातल कहा जाता है। इस महल की विशिष्ट बात यह है कि, उसकी सात में से तीन मंज़िलें भूमिगत हैं। यहां पर गुप्त सुरंग भी है, जो महल से बाहर जाती है। लेकिन मेरे खयाल से यह ज़्यादातर राजसी आवासों का अभिन्न अंग है। लेकिन अब यहां पर कुछ ही मंज़िले बाकी हैं, जहां कक्ष, गलियारे और दीवारों कि खुदाई के कुछ अवशेष बचे हैं। जैसे-जैसे आप इस खंडहर से गुजरते हैं, नक्काशीयों के कुछ हिस्से यहां-वहां झलकते हैं। अनेक प्रवेश द्वारों के पास अलंकृत खंबों के अवशेष दिखाई पड़ते हैं। एक शिव मंदिर जो आज भी सक्रिय है, एक छोटे से जल स्त्रोत के पास अपना स्थान ग्रहण किए हुए है। इस महल से थोड़ा दूर गोला घर है जहां पर गोलाबारूद रखा जाता था।

उत्तरन संग्रहालय, शिवसागर

उत्तरं संग्रहालय - शिवसागर - असम
उत्तरं संग्रहालय – शिवसागर – असम

शिवसागर में सबसे अचरज की बात जो हमें मिली वो थी व्यक्तिगत संग्रहालय जो उत्तरन के नाम से जाना जाता है। यह एक व्यक्ति द्वारा इस क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को एकत्रित कर उसे प्रदर्शित करने का प्रयास है। यह संग्रह बहुत ही प्रभावशाली और उस व्यक्ति का प्रयास प्रशंसनीय है। यह दो मंज़िला भवन कलाकृतियों से भरा हुआ है। इसका और एक हिस्सा स्वयं वहां के अध्यक्ष या मालिक द्वारा व्यक्तिगत रूप से बनाया जा रहा है। हमने उनसे बात भी की। उनका सपना है कि वे अपने खुद के पैसों से एक विशाल संग्रहालय बनाए, जिसे सुनकर हमे बहुत खुशी हुई। मैं दिल से ऐसे व्यक्तियों कि प्रशंसा करती हूँ, जो खुद के दम पर अपने सपने पूरे करना चाहते हैं। बजाय उन व्यक्तियों के जो सोचते हैं कि सपने पूरे करने का एक ही तरीका है, दूसरों की सहायता लेना। हमने यह संग्रहालय इत्तिफ़ाक से देखा, जब हम वहां से गुजर रहे थे। अन्यथा, कहीं पर भी किसी यात्रा गाइड या इन्टरनेट पर इस संग्रहालय का उल्लेख नहीं है।

शिवसागर की खोज

तलातल महल का हिस्सा - शिवसागर - असम
तलातल महल का हिस्सा – शिवसागर – असम

जिस समय मैं इस यात्रा के बारे में जानकारी हासिल कर रही थी, तब किसी ने भी मुझे सिबसागर या शिवसागर के बारे में नहीं बताया। जब मैंने उत्तर-पूर्व की यात्राएं आयोजित करने वाले कई यात्रा प्रबंधकों से पूछा तो वे असम की इस जगह से बिलकुल अनभिज्ञ थे। शिवसागर पहुँचने से पहले रास्ते पर मिलने वाले लोगों ने भी हमे बताया कि वहां पर देखने लायक ज्यादा कुछ नहीं है, आप निराश होंगे। लेकिन वहां पर एक पूरा दिन बिताने के बाद मैं सोच में पड़ गयी कि क्यों लोगों को इस जगह के बारे में ज्यादा पता नहीं है और क्यों उन्हें लगता है कि वह देश के बाकी ऐतिहासिक स्थानों जितना महत्वपूर्ण नहीं है। हमे यह जगह बहुत पसंद आयी और हमने इस जगह का बहुत आनंद लिया।

मेरी यह इच्छा है और मैं आशा करती हूँ कि लोग जाकर इस जगह को जरूर देखेंगे, जहां से देश में दीर्घ काल तक शासन करने वाले शासक वंशजों ने अपना शासन चलाया।

4 COMMENTS

  1. शिवसागर को शायद कहीं यहीं शिवोसागर भी लिखा गया है ! खैर वो अलग बात है , लेकिन आपने अहोम शासकों के विषय में जो जानकारी उपलब्ध कराई है अपनी पोस्ट में वो बहुत अचंभित करने वाली और मेरे लिए बिल्कुल नई है ! शायद ये पहला केस होगा जहां शासकों ने शासितों का धर्म स्वीकार किया !! शानदार पोस्ट

    • धयवाद योगी जी, जब बोलने वाले नाम लिखने में आते हैं तो हूमें दुविधा में दाल देते हैं. मुझे तो शिवसागर में खड़े हो कर यह नहीं समझ आया की मुझे कभी किसी ने अहोम साम्राज्य के बारे में क्यूँ नहीं बताया या पढाया. भारत में इतनी कहानियां छिपी हैं की जीवन जायेगा पर कहानियां नहीं पूरी होंगी.

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