चित्तौड़गढ़ दुर्ग के मंदिर – मीरा बाई की भक्ति स्थली

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2019

चित्तौड़गढ़ दुर्ग के भीतर अनेक मंदिर हैं जो दुर्ग में चारों ओर बिखरे हुए हैं। दुर्ग के भीतर ऐसा कोई स्थान नहीं है जहाँ मंदिर नहीं है। मुझे स्मरण नहीं कि मैं चित्तौड़गढ़ दुर्ग में कहीं खड़ी हूँ तथा मुझे चित्तौड़गढ़ दुर्ग के मंदिर दृष्टिगोचर नहीं हो रहे हैं। हमें सदा ऐसा ही प्रतीत होता रहता है कि चित्तौड़गढ़ के मंदिर यहाँ के जनजीवन का अभिन्न अंग रहे होंगे।

चित्तौड़गढ़ दुर्ग के मंदिर
चित्तौड़गढ़ दुर्ग के मंदिर

मेरे चित्तौड़गढ़ पहुँचने से पूर्व मीरा बाई का मंदिर देखने की मेरी तीव्र अभिलाषा थी क्योंकि मैंने कृष्ण के प्रति उनकी भक्ति एवं समर्पण की अनेक गाथाएँ पढ़ी थीं। वह स्थान कितना अद्भुत होगा जहाँ उन्होंने कृष्ण के अनेक भजन रचे, गाये तथा उन पर नृत्य किये थे। इसके अतिरिक्त मैंने चित्तौड़गढ़ में किसी अन्य मंदिर की कल्पना भी नहीं की थी। किन्तु यहाँ आने के पश्चात मुझे ज्ञात हुआ कि मीरा बाई का मंदिर चित्तौड़गढ़ के अनेक अप्रतिम मंदिरों में से एक मंदिर है तथा यहाँ स्थित सभी मंदिरों की अपनी अपनी अद्भुत गाथाएँ हैं।

चित्तौड़गढ़ में जितने जैन मंदिर हैं, उतने ही हिन्दू मंदिर भी हैं। चित्तौड़गढ़ में राजसी धरोहर के अतिरिक्त अनेक ऐसे जीवंत मंदिर हैं जहाँ आपको उनके पुरातन आविर्भाव के साथ साथ विभिन्न समयकाल से होते हुए उनकी यात्रा का प्रतिबिम्ब दिखाई देगा।

चित्तौड़गढ़ दुर्ग के मंदिर

समाधिश्वर शिव मंदिर

भगवान शिव को समर्पित ११वीं सदी के इस मंदिर में शिव अपने त्रिमूर्ती अवतार में विराजमान हैं। यह मंदिर अनुमानतः इस संकुल के प्राचीनतम मंदिरों में से एक है। गोमुख कुण्ड से लगे हुए इस मंदिर का शिखर शुण्डाकार है जो हम सामान्यतः जैन मंदिरों में देखते हैं।

गौमुख कुंड
गौमुख कुंड

मंदिर का आधार उलटे कमल के आकार का है। उसके ऊपर स्थित एक पटल पर मानव जीवन की कथा उत्कीर्णित है। मंदिर की शिलाओं पर उनकी आयु तथा सदियों से होते हुए जलवायु के प्रभाव के चिन्ह स्पष्ट दृष्टिगोचर होते हैं। इसके पश्चात भी शिलाओं पर उत्कीर्णित कथाओं के माध्यम से शिल्पकार के हाथों की कला आश्चर्यचकित कर देती है।

समाधीश्वर मंदिर की शिव मूर्ति
समाधीश्वर मंदिर की शिव मूर्ति

इस मंदिर की विशेषता है, त्रिमूर्ति रूप में भगवान शिव की विशाल प्रतिमा। मंदिर के भीतर इस प्रतिमा का चित्र लेना प्रतिबंधित नहीं है। जब आप इस छोटे से मंदिर के भीतर खड़े होंगे तो आपको सदियों की भक्ति से परिपूर्ण इसकी भित्तियों में इसकी पुरातनता का अनुभव होगा। आप मंदिर की भीतरी भित्तियों पर यंत्र एवं अभिलेख देख सकते हैं। किन्तु उनके विषय में जानकारी प्रदान करने वाला तथा उन अभिलेखों को पढ़कर बताने वाला वहाँ कोई नहीं था। मुझे विश्वास है कि उन अभिलेखों में मंदिर के इतिहास की घटनाओं से परिपूर्ण गाथाओं का उल्लेख होगा।

समाधीश्वर मंदिर के भित्ति शिल्प
समाधीश्वर मंदिर के भित्ति शिल्प

किसी भी शिव मंदिर के समान यहाँ भी मंदिर के समक्ष एक मुक्त प्रांगण में एक छोटा सा नंदी मंदिर है।

इस मंदिर के चारों ओर अनेक छोटे-बड़े मंदिर बिखरे हुए हैं किन्तु उनमें से अधिकाँश जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं।

कुम्भास्वामी वराह मंदिर

कुम्भास्वामी मंदिर चित्तौड़गढ़ दुर्ग परिसर के भीतर स्थित सर्वोत्तम रीति से संरक्षित मंदिरों में से एक है। यह विलक्षण मंदिर भगवान विष्णु के वराह अवतार को समर्पित है। इस मंदिर का निर्माण लगभग १६वीं सदी में किया गया था। ठेठ उत्तर भारतीय नागर शैली स्थापत्य कला में निर्मित इस मंदिर में चारों ओर अद्भुत शिल्पकारी की गयी है। मंदिर के मंडप के ऊपर शुण्डाकार छत है, वहीं गर्भगृह के ऊपर उंचा शिखर है। गर्भगृह के चारों ओर प्रदक्षिणा पथ है। इनकी भित्तियों पर भी सूक्षमता से भव्य शिल्पकारी की गयी है।

चित्तोड़गढ़ दुर्ग का कुम्भास्वामी मंदिर
चित्तोड़गढ़ दुर्ग का कुम्भास्वामी मंदिर

गर्भगृह के पिछवाड़े में वराह अवतार की प्रतिमा है। मुख्य गर्भगृह में कृष्ण एवं बलराम की नवीन प्रतिमाएं स्थापित की गयी हैं। इन प्रतिमाओं को रंगबिरंगे वस्त्रों द्वारा समकालीन रीति से सज्जित किया है।

कुम्भास्वामी मंदिर में वराह मूर्ति
कुम्भास्वामी मंदिर में वराह मूर्ति

इस मंदिर की एक रोचक विशेषता है, मंदिर के समक्ष स्थित गरुड़ मंडप। सामान्यतः शिव मंदिर में भगवान शिव के समक्ष नंदी मंडप अवश्य होता है।

कुम्भास्वामी मंदिर का गर्भगृह
कुम्भास्वामी मंदिर का गर्भगृह

विष्णु मंदिरों के समक्ष हम गरुड़ ध्वज अवश्य देखते हैं किन्तु मुझे स्मरण नहीं कि इससे पूर्व मैंने किसी मंदिर में इस प्रकार का समर्पित गरुड़ मंडप देखा होगा।

मीरा बाई मंदिर

मीरा बाई का मंदिर एक छोटा सा मंदिर है जो कुम्भास्वामी मंदिर परिसर के एक कोने में स्थित है। इसके भीतर मीरा बाई की विशाल समकालीन प्रतिमा है जिसमें उन्होंने केसरिया साड़ी धारण की हुई है। एक हाथ से इकतारा बजाते हुए कृष्ण भक्ति में तल्लीन। हमने बालपन से मीरा बाई एवं उनकी कृष्ण भक्ति की अनेक कथाएं पढ़ी हैं।

मीरा बाई का मंदिर
मीरा बाई का मंदिर

भक्ति में तल्लीन होकर वे नृत्य करती हुई कृष्ण भजन गाती थीं। किन्तु मंदिर को देख कर किंचित निराशा होती है क्योंकि इसके लिए मंदिर अत्यंत छोटा प्रतीत होता है। कदाचित यह मंदिर केवल मीराबाई एवं उनकी भक्ति के लिए ही निर्मित किया गया होगा। कदाचित वे स्वयं एकांत में ही भजन गाया करती थीं तथा उसके संगीत में झूमती थीं।

कृष्ण और मीरा
कृष्ण और मीरा

मंदिर में बैठकर मैं भोंपू में बज रहे मीराबाई के भजनों को सुनने लगी। पुजारीजी दर्शनार्थियों से वार्तालाप कर रहे थे। मंदिर के सम्पूर्ण वातावरण में मैं मीराबाई एवं उनकी भक्ति को ढूँढने लगी, उन्हें अनुभव करने का प्रयास करने लगी, किन्तु व्यर्थ। मुझे मंदिर के भीतर मीराबाई की उपस्थिति का अनुभव नहीं हुआ। सम्पूर्ण मंदिर में भक्ति की छवि मुझे केवल एक वृद्धा में दृष्टिगोचर हुई जो मंदिर की सीढ़ियों पर बैठकर दान की आस में भजन गा रही थी।

मंदिर के समक्ष उनके गुरु को समर्पित एक स्मारक है। किन्तु उनके गुरु कौन थे, इस विषय में वहाँ कोई जानकारी प्रदर्शित नहीं थी।

सात-बीस जैन मंदिर

सात बीस जैन मंदिर
सात बीस जैन मंदिर

कुम्भास्वामी मंदिर के ठीक समक्ष सात-बीस जैन मंदिर स्थित है। आप सोच रहे होंगे कि यह सात-बीस क्या है! सात-बीस का अर्थ है, २७। इस एक भव्य मंदिर के भीतर २७ छोटे मंदिर हैं। यह मंदिर दिखने में रणकपुर के जैन मंदिर के समान प्रतीत होता है किन्तु यह उससे २०० वर्ष प्राचीन है। यह मंदिर सभी जैन तीर्थंकरों को समर्पित है।

सात बीस मंदिर के द्वार
सात बीस मंदिर के द्वार

एक मंदिर मध्य में है जिसके तीन ओर अन्य २६ मंदिर स्थित हैं। प्रत्येक मंदिर के द्वार चाँदी के हैं जिन पर भव्य उत्कीर्णन किया गया है। मैंने कुछ द्वारों पर किये गए उत्कीर्णनों को सूक्ष्मता से देखने का प्रयास किया। उन पर मुख्य रूप से शुभ चिन्ह उत्कीर्णित हैं। साथ ही उस तीर्थंकर की छवि उत्कीर्णित है जिनको यह मंदिर समर्पित है।

मंदिर के भीतर केवल उस तीर्थंकर की छोटी अथवा मध्यम आकार की प्रतिमा स्थापित है। इसके अतिरिक्त कुछ भी नहीं। मुख्य मंदिर की भीतरी छत पर सूक्ष्मता से इतना सुन्दर व जटिल उत्कीर्णन किया गया है कि आप उसमें खो से जाते हैं। गोलाकार छत पर चारों ओर नृत्य करती नृत्यांगनाओं के शिल्प हैं जो शीर्ष तक जाते हैं।

सात बीस जैन मंदिर की छत
सात बीस जैन मंदिर की छत

किसी भी ठेठ मंदिर शैली में एक एकल शिखर होता है। इसके विपरीत इस मंदिर में शिखरों की एक पूर्ण पंक्ति है। मेरे अब तक के देखे असंख्य मंदिरों में मैं इस मंदिर को सर्वाधिक स्वच्छ मंदिरों में से एक कह सकती हूँ। मुझे धूल का एक कण भी दृष्टिगोचर नहीं हुआ। इस मंदिर में नंगे पाँव घूमना मुझे अत्यंत आनंददायी प्रतीत हुआ।

इस मंदिर में छायाचित्रीकरण पर पाबंदी नहीं है, केवल भगवान के विग्रह का चित्र लेने की अनुमति नहीं है।

मुख्य मंदिर के पीछे दो लघु मंदिर हैं।

गाँव

इस धरोहरी क्षेत्र से आगे जाकर मैंने गाँव की ओर चलना आरम्भ किया। मैंने नगीना बाजार एवं मोती बाजार पार किये जो बाजार ना होते हुए छोटी दुकानें हैं। जब मैं इस क्षेत्र से जा रही थी तो मुझे ऐसा प्रतीत हुआ कि यह क्षेत्र कदाचित प्रजा के गाँव एवं राजघराने के महलों के मध्य एक अवरोध क्षेत्र रहा हो। यह बाजार क्षेत्र कदाचित दोनों क्षेत्रों का मध्यवर्ती क्षेत्र होते हुए उनका संगम बिंदु रहा हो तथा राज परिवार एवं उनकी प्रजा के दैनन्दिनी आवश्यकताओं की आपूर्ती में सहायक रहा हो।

चितौडगढ़ दुर्ग के गाँव
चितौडगढ़ दुर्ग के गाँव

मैं गाँव की संकरी गलियों में पद भ्रमण करने लगी। वहाँ कुछ मंदिरों के दर्शन किये जिनका सभी प्रबंधन ब्राह्मण परिवार कर रहे थे। इन लघु मंदिरों में अनवरत जीवन के लक्षण स्पष्ट दृष्टिगोचर होते हैं। यद्यपि कुछ मंदिरों में मैंने शिखरों के स्थान पर गुम्बजों को देखा। किसी के पास इस प्रश्न का उत्तर नहीं था कि यह कैसे हुआ।

जानकी मंदिर
जानकी मंदिर

मेरा अनुमान है कि यह परिवर्तन मंदिर के रखरखाव अथवा जीर्णोद्धार के समय किया गया होगा। अथवा यह परिवर्तन उस काल में किया गया होगा जब यह दुर्ग इस्लामी शासकों के अधीन आ गया था।

उत्कृष्ट कला समेटे हुए चित्तौडगढ दुर्ग के मंदिर
उत्कृष्ट कला समेटे हुए चित्तौडगढ दुर्ग के मंदिर

मंदिर को उनके आक्रमणों से बचाने के लिए कदाचित भक्तों ने शिखर के स्थान पर गोलाकार छत बना दी होगी। मंदिर एवं आवासों की बाह्य भित्तियों पर मुझे नवीन रंगरोगन दिखाई दिए।

सास-बहू मंदिर

एक अन्य स्थान पर दो मंदिर एक दूसरे के ठीक समक्ष स्थित हैं। उन्हें सास-बहू मंदिर कहते हैं। इनकी विशेषता यह है कि किसी भी मंदिर के भीतर से दोनों मंदिर दिखाई देते हैं। मंदिरों का एक अन्य जोड़ा भी है जो दुर्गा एवं अन्नपूर्णा देवी को समर्पित है। मंदिर के दैनन्दिनी रखरखाव का कार्यभार संभालती कुछ स्त्रियों से मैंने वार्तालाप किया। उन्हें इन मंदिरों की पुरातनता एवं निर्माण काल आदि के विषय में कोई रूचि नहीं थी। वे केवल यह मानती हैं कि ये मंदिर सदा से यहीं स्थित हैं।

वे केवल एक ही तथ्य पर लक्ष्य केन्द्रित कर रही थीं कि मंदिर की सभी संस्कारों एवं अनुष्ठानों का परंपरानुसार पालन हो रहा है कि नहीं हो रहा है। वे भगवान को माँ कहकर पुकार रही थीं। उनका दृढ़ विश्वास था कि देवी माँ उनके जीवन की रक्षा करेंगी तथा उन्हें जीवन में मार्ग दिखाएंगी। अन्नपूर्ण माँ सदा उनकी भोजन की थाली भरी रखेंगी तथा दुर्गा माँ सभी प्रकार के संकटों से उनका रक्षण करेंगी। उनके शब्द सुनकर मुझे ऐसा प्रतीत हुआ कि जो मैं मंदिरों में विभिन्न चिन्हों के अर्थ ढूंढती घूम रही थी तथा मंदिर की पुरातनता को जानने का प्रयास कर रही थी, वह सब कितना अर्थहीन है। यह तो भक्तों की मंदिरों व भगवान पर अपार श्रद्धा एवं अटूट विश्वास है जो मंदिर एवं भगवान को इतना शक्तिशाली व प्रभावशाली बनाता है।

रत्नेश्वर महादेव मंदिर

रतनसिंह महल के समीप मैंने एक छोटा सा किन्तु अत्यंत सुन्दर रत्नेश्वर महादेव मंदिर देखा। एक जलकुंड के निकट स्थित इस मंदिर को अप्रतिम रूप से उत्कीर्णित किया गया है। राम पोल के समीप मैंने जैसे ही जानकी मंदिर को देखा, मैं तुरंत ही गिनने लगी कि मैंने अब तक कितने मंदिर देखे जो देवी सीता को समर्पित हों। मेरी स्मृतियों में केवल नासिक का पंचवटी ही उभर कर आया।

रत्नेश्वर महादेव मंदिर - चित्तौडगढ दुर्ग
रत्नेश्वर महादेव मंदिर – चित्तौडगढ दुर्ग

कुम्भा महल के समक्ष स्थित एक उद्यान में मैंने कई लघु मंदिर देखे जिन पर गोलाकार छत थे। इन सभी मंदिरों के द्वारों पर ताले लगे हुए थे। इसलिए मैं केवल इनकी बाह्य भित्तियों पर की गयी सुन्दर शिल्पकारी की ही सराहना कर सकी।

अन्नपूर्णा मंदिर
अन्नपूर्णा मंदिर

इन मंदिरों के भ्रमण के समय मुझसे कालिका देवी मंदिर का दर्शन छूट गया। किसी काल में वह सूर्य मंदिर था जो कालांतर में देवी मंदिर में परिवर्तित हो गया है।

चित्तौड़गढ़ दुर्ग वास्तव में एक छोटी सी मंदिर नगरी ही है। इसके भीतर लगभग सभी प्रमुख हिन्दू देवी-देवताओं के मंदिर हैं। भारत में अचंभों की कोई कमी नहीं है।

अनुवाद: मधुमिता ताम्हणे

1 COMMENT

  1. चित्तौड़गढ़ के प्रमुख पर्यटक स्थल और यात्रा से जुडी जानकारी के बारे में काफी अच्छे से बताया है आपने काफी अच्छा लगा आपका ये आर्टिकल |

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