वायस रीगल लॉज से राष्ट्रपति निवास तक की यात्रा, शिमला

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शिमला अंग्रेजों का चहेता पहाड़ी प्रदेश था। बहुत सालों तक वह अंग्रेजों की ग्रीष्मकालीन राजधानी भी रहा है। तो ऐसे में इन पहाड़ियों पर उनकी छाप न हो ऐसा कैसे हो सकता है। यहाँ की भूतपूर्व वायस रीगल लॉज अंग्रेजों की सबसे अनोखी छाप है शिमला में। जिसे अब राष्ट्रपति निवास के रूप में जाना जाता है। इस इमारत में आज भारतीय उन्नत अध्ययन संस्थान बसता है। लेकिन आज भी वह उसी समय में जकड़ा है जिन दिनों में वह जब वह भारत को अंग्रेजों से स्वतंत्रता मिलने से ठीक पूर्व जब ये को बड़ी योजनाओं का स्थान हुआ करता था।

भारतीय अद्यतन शिक्षा संस्थान शिमला
भारतीय अद्यतन शिक्षा संस्थान शिमला

राष्ट्रपति निवास आम जनता के लिए खुला है। आप चाहें तो यहाँ पर गाइड की सहायता से घूम सकते हैं या फिर अपने आप भी यहाँ के व्यापक फैले मैदानों का लुत्फ उठा सकते हैं।

वायस रीगल लॉज या राष्ट्रपति निवास आकाशलोचनीय पहाड़ी पर बसा हुआ है, जिसकी अपनी खास विशेषताएँ हैं। इस पहाड़ी की एक तरफ से बहता हुआ पानी पूरब में बंगाल की खाड़ी में जा मिलता है तो दूसरी तरफ से बहता हुआ पानी पश्चिम में अरब सागर से जा मिलता है।

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इस इमारत की प्रारंभिक अनुमानित लागत रु. 38 लाख थी तथा इसकी वार्षिक रखरखाव की कीमत रु. 1.5 लाख थी। याद रहे कि हम सन 1880 की बात कर रहें हैं।

इस इमारत की वास्तुकला अँग्रेजी नवजागरण काल से प्रेरित है, लेकिन आप देख सकते हैं कि यह हूबहू स्कॉटलैंड के महल की तरह दिखाता है।

वायस रीगल लॉज अथवा राष्ट्रपति निवास शिमला

वायस रीगल लॉज 110 एकड़ की जमीन पर फैला हुआ है। यहाँ की अधिकतर जमीन विविध प्रकार के फूलों और घास से भरी हुई है। शुरू-शुरू में यह अब के आकार से तीन गुना ज्यादा था। प्रकृति प्रेमियों के लिए इन रंग-बिरंगी फूलों से गुजरते हुए जाने का एक अलग ही आनंद है। इन में से कुछ फूल दुर्लभ प्रकार के भी हैं। इस उद्यान में सैर करते समय आप न केवल सुंदर बागों से गुजरते हैं, बल्कि आप रीगल भवन को दूर से भी देखने का लुत्फ उठा सकते हैं। उसकी प्रशंसा कर सकते हैं। आप उसे उसकी पूर्णता में देखा सकते हैं। याद रहे की आप दुनिया के सबसे ऊंचे उद्यानों में से एक की सैर कर रहे हैं।

शिमला राष्ट्रपति निवास के आँगन के रंग बिरंगे फूल
शिमला राष्ट्रपति निवास के आँगन के रंग बिरंगे फूल

बर्मा से सागौन की लकड़ी इस भवन के निर्माण के लिए आयात की गई थी। स्थानीय देवदार और अखरोट की लकड़ी से आंतरिक सजावट के लिए सुसंपन्न दीवारों के तख्ते बनाए जाते थे। ये विशाल लकड़ी की कारीगरी आज भी इस भवन के मुख्य सभागार में अपने पूर्ण वैभव में देखी जा सकती है। यहाँ की एक दीवार पर भारतीय मूल के युद्ध शस्त्र प्रदर्शित किए गए थे। आप यहाँ की ऊंची-ऊंची दीवारों पे आज भी उनकी छाप देख सकते हैं।

इस भवन में बारिश के पानी के संग्रहण की अंतर्निहित व्यवस्था है, जिसकी पानी की टंकियां यहाँ के घास के मैदानों के नीचे हैं। भवन के ऊपर से सारा पानी इन टंकियों में जमा होता है जो बाद में उद्यान के रखरखाव के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

भारतीय अद्यतन शिक्षा संस्थान का सुन्दर भवन
भारतीय अद्यतन शिक्षा संस्थान का सुन्दर भवन

इस भवन में अंतर्निहित अग्निशामक यंत्र-रचना भी है, जो तापमान 60 डिग्री से ऊपर चढ़ते ही अपने आप ही पानी का फव्वारा छोड़ता है। लेकिन कभी भी इसका वास्तविक रूप से उपयोग नहीं किया गया है। लेकिन हमारे गाइड ने बताया कि हर कुछ महीनों में इसकी जांच की जाती है और वह आज भी काम करने की स्थिति में है। है न यह एक हैरान करने वाला तथ्य!

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जनरल इलेक्ट्रिक कंपनी ने सन 1887 में छिपी और सुरक्षित तारों से वायस रीगल लॉज का विद्युतीकरण किया था। देखा जाए तो उन्हें अपने-आप पर बहुत गर्व होगा।

वायस रीगल लॉज के प्रथम निवासी लॉर्ड और लेडी दुफ़्फेरिन 1888 में यहाँ पर आए थे। और उसके बाद 1927 तक अनेक निवासी यहाँ पर आते रहे।

सिमला सम्मेलन

वायस रीगल लॉज ऐतिहासिक ‘सिमला सम्मेलन’ का गवाह रहा है जिसके कारण भारत का विभाजन हुआ। असल में जिस मेज पर विभाजन के कागजात तैयार किए गए थे, वह आज भी इस भवन में मौजूद है। उस समय के लगभग सभी बड़े नेता जैसे जवाहरलाल नेहरू, मौलाना आज़ाद, लियाक़त अली खान, मास्टर तारा सिंह और मोहम्मद अली जिन्नाह इस सम्मेलन में मौजूद थे। जिसकी तस्वीरें आज आप वहाँ की दीवारों पर देख सकते हैं।

स्वतंत्रता के बाद इस भवन को यह नया नाम ‘राष्ट्रपति निवास’ मिला। और एक नए निवासी यानी भारत के राष्ट्रपति यहाँ पर रहने आ गए। नई दिल्ली में इससे भी बड़े निवास के साथ मुझे लगता है कि भारत के शुरुवाती राष्ट्रपति इसे ग्रीष्मकालीन आवास के रूप में इस्तेमाल करते थे। वर्तमान रूप से भारत के राष्ट्रपति का शिमला में एक और ग्रीष्मकालीन आवास है जिसे ‘द रिट्रीट’ कहा जाता है।

क्या आपको पता है कि हैदराबाद में भारत के राष्ट्रपति का एक और शिशिर-कालीन निवास है जिसे राष्ट्रपति नीलायम कहा जाता है।

भारतीय अद्यतन शिक्षा संस्थान

राष्ट्रपति निवास अब भारतीय अद्यतन शिक्षा संस्थान का घर है। यह एक ऐसा संस्थान है जो मानविकी, समाज और प्रकृति विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान को प्रोत्साहित करता है। अगर आपके पास पीएचडी की उपाधि है तो आप इस संस्थान में फेलोशिप के लिए आवेदन कर सकते हैं। और मेरे ख्याल से पढ़ने और लिखने के लिए उत्तम वातावरण है जहां से आप अपना अनुसंधान कार्य कर सकते हैं।

तस्वीर प्रदर्शन के कक्ष

यहाँ पर तस्वीर प्रदर्शन के तीन कक्ष हैं, जहां पर शाही शिमला, शिमला में स्वतंत्रता के पूर्व की गतिविधियों और भारतीय अद्यतन शिक्षा संस्थान की अनेक तस्वीरें प्रदर्शित की गई है। यहाँ के पथ-प्रदर्शित दौरे आगंतुकों को इन तीनों कक्षों की यात्रा कराते हैं। यहाँ पर आप शिमला की पुरानी तस्वीरें देखा सकते हैं। तथा कक्ष में मौजूद उपस्कर की वस्तुएं पूर्वकालीन माहौल का निर्माण करते हैं। मुझे विशेष रूप एक तस्वीर याद है जिसमें राजकुमारी अमृत कौर शिमला में अपने खुद के घर के बाहर गांधीजी का इंतज़ार कर रही हैं।

पुस्तकालय

राष्ट्रपति निवास के उस कक्ष में जो पहले बॉलरूम हुआ करता था उसमें अब भारतीय अद्यतन शिक्षा संस्थान का एक बड़ा सा पुस्तकालय है। जिसमें 1.5 लाख किताबें हैं जो पूरे पुस्तकालय में दो स्तरों पर प्रदर्शित की गई हैं। इस पुस्तकालय में घूमते हुए मुझे ऐसे लगा कि बस मैं यहीं पर बस जाऊ।

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भवन के भीतर तस्वीरें खींचने की अनुमति नहीं है, लेकिन आप संस्थान की वैबसाइट से पुस्तकालय और तस्वीर प्रदर्शन कक्ष से आभासी यात्रा कर सकते हैं जो आम जनता के लिए खुली है।

यहाँ पर प्रत्येक कक्ष में एक छोटा सा पुस्तक-ताक है जिसमें दुर्लभ और ऐतिहासिक पुस्तकें शान से प्रदर्शित की गई हैं। मैंने यहाँ पर कला इतिहास पर बहुत सारी किताबें देखी। मैं आशा करती हूँ कि एक दिन मैं इतिहास की इन खूबसूरत सी रचनाओं पर अनुसंधान कार्य कर पाऊँ।

सुभोध केरकर द्वारा निर्मित नर्तकी की मूर्ति

सुबोध केरकर की हरप्पा कालीन नर्तकी
सुबोध केरकर की हरप्पा कालीन नर्तकी

वहाँ के उद्यान में मुझे गोवा के कलाकार सुभोध केरकर द्वारा बनाई गई एक मूर्ति दिखी जो सिंधु घाटी सभ्यता की नर्तकी की थी। नेगेटिव स्पेस में निर्मित यह मूर्ति रेल्वे लाइन पर रखी गई है जो यह याद दिलाता है कि उसकी खोज एक रेल्वे अभियंता द्वारा की गई थी।

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यहाँ पर एक केफे-कम-बुकशोप है जिसे फायर स्टेशन केफे कहा जाता है। यह एक पुराना दमकल केंद्र है जिसे केफे में परिवर्तित किया गया है। यहाँ पर आप कॉफी का मजा लेते हुए संस्थान के प्रकाशनों को देख सकते हैं और अपने लिए स्मृति-चिह्नों का चुनाव भी कर सकते हैं। गाइडेड टूर की टिकिट भी यहाँ पर बेची जाती हैं।

तो जब आप शिमला जाएँ तो भारतीय अद्यतन शिक्षा संस्थान जाना न भूलें।

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