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इंदौर की गलियों के १७ लोकप्रिय व्यंजन- जिनके बिना इंदौर यात्रा अपूर्ण है

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यदि आपको कभी मध्य प्रदेश की चहल-पहल भरी नगरी, इंदौर की यात्रा का सौभाग्य प्राप्त हुआ है, तो मैं निश्चित रूप से कह सकती हूँ कि आप इंदौर की खाऊ गलियों में बिकते स्वादिष्ट व्यंजनों से अछूते नहीं रहे होंगे। इंदौर के कुछ क्षेत्र, सराफा बाजार एवं छप्पन दुकान, इंदौर की इस स्वाद पूर्ण विशेषता को समर्पित हैं। दिन के समय यहाँ खाने में रूचि रखने वालों की भीड़ तो आती ही है, किन्तु सायंकाल होते ही इन स्थानों की चमक-दमक को चार चाँद लग जाते हैं। सराफा की गलियों एवं छप्पन दुकान परिसर में स्थित स्वादिष्ट व्यंजनों की ढेरों दुकानों, ठेलों एवं खोमचेवालों के समक्ष रसिकों का जमघट लग जाता है। वे अनेक प्रकार के नाश्तों, चाट, भोजन, विभिन्न प्रकार के पेय पदार्थों एवं मिष्टान्न का आस्वाद लेने उमड़ पड़ते हैं। अर्ध रात्रि उलटने के पश्चात भी यहाँ की शोभा तनिक भी धूमिल नहीं होती। यहाँ सभी प्रकार के लोगों के भिन्न भिन्न प्रिय व्यंजनों की भरमार रहती है। यदि आप भिन्न भिन्न प्रकार के व्यंजन चखने में रूचि रखते हों, वह चाहे नाश्ते हों अथवा गरिष्ठ भोजन, पेय पदार्थ हो अथवा मिठाईयां या कोई नवीन व्यंजन जिसका स्वाद आपने अब तक नहीं चखा हो, तो इंदौर में आप आपनी जिव्हा या यूँ कहें, चटोरेपन का भरपूर दुलार कर सकते हैं।

इस संस्करण के माध्यम से मैं आपके लिए भारत के स्वादों की राजधानी, इंदौर के सर्वाधिक लोकप्रिय १७ व्यंजनों को ढूंढ कर लाई हूँ। इस संस्करण को पढ़ते हुए आपके मुंह में पानी अवश्य आने वाला है। अतः मेरा सुझाव है कि इसे पढ़ते समय अपने साथ अपना प्रिय नाश्ता अवश्य रख लें।

इंदौर की खाऊ गलियों के स्वादिष्ट शाकाहारी व्यंजन

यूँ तो इंदौर में अनेक प्रकार के अद्वितीय/दुर्लभ निरामिष एवं सामिष व्यंजन उपलब्ध हैं, मैं यहाँ आपके लिए कुछ लोकप्रिय शाकाहारी नाश्तों का उल्लेख कर रही हूँ जो इंदौर के खाऊ गलियों में प्रसिद्ध हैं।

१. खोपरा पैटिस

यदि आपको आलू टिक्की प्रिय लगती है तो आपको यह खोपरा पैटिस अत्यंत रोचक प्रतीत होगा। यूँ तो आलू टिक्की के लिए, उबले आलुओं एवं डबल रोटी के मिश्रण में मसाले डाल कर उन्हें गोल व चपटा आकार दे कर घी अथवा तेल में सेंका जाता है। खोपरा पैटिस में इन गोलों के भीतर किसे हुए ताजे नारियल एवं सूखे मेवों के मिश्रण को भरा जाता है, तत्पश्चात उन्हें तेल/घी में तला जाता है। इनकी बाहरी परत कुरकुरी रहती है एवं भीतर से यह नम रहता है। इसे चटपटी-मीठी चटनी के साथ गर्म परोसा जाता है। यह पदार्थ उपवास योग्य भी बनाया जाता है। दुकान के समक्ष खड़े होकर, गर्म तेल से निकले कुरकुरे पैटिस एवं चटनी खाना अत्यंत संतोषजनक व आनंददायी होता है। विशेषतः विजय चाट हाउस के खोपरा पैटिस अत्यंत लोकप्रिय हैं।

२. खट्टा समोसा

इन्दौरी खट्टा  समोसा
इन्दौरी खट्टा समोसा

चाव से समोसा खाने वाले आप सब को यह व्यंजन अत्यंत भा जाएगा। यूँ तो भारतीय समोसे आप सभी को प्रिय हैं, किन्तु यह साधारण समोसों का अत्यंत रुचिकर रूप है।  साधारणतः, समोसे बनाने के लिए, मैदे के आवरण में विभिन्न प्रकार के मसाले डले आलुओं को भर कर, इन्हें तला जाता है। भारत के विभिन्न क्षेत्रों के समोसों में भिन्न भिन्न स्वाद पाया जाता है। इंदौर के इन समोसों को एक खट्टी-मीठी चटनी डाल कर परोसा जाता है। इस व्यंजन की विशेषता इसके विशेष भरावन में है जिसे अनारदाने का चूर्ण डालकर खट्टा-मीठा बनाया जाता है। इसके कारण इन्हें खट्टा समोसा कहा जाता है। आप सराफा बाजार की गुमटियों एवं ठेलों से ये समोसे खा सकते हैं।

३. मूंग दाल भजिया/मूंग बड़े/ मुंगोडे

इन भजियों को हरी मूंग अथवा खड़ी मूंग द्वारा तैयार किया जाता है जिसके कारण ये अत्यंत कुरकुरे रहते हैं। मूंग भजियों को गर्म तेल में तलकर, चटनी के साथ गरमा गरम परोसा जाता है। यह इंदौर के अनेक घरों में भी संध्या के नाश्ते के लिए बनाया जाता है। वर्षा ऋतु में इन भजियों को खाने का आनंद अत्यंत विशेष होता है। यूँ तो ये भजिये इंदौर की गली-गलियों में एवं कोने कोने में बिकते हैं, किन्तु मेरे अनुमान से इंदौर के एच.आइ.जी. मुख्य मार्ग पर स्थित श्री महालक्ष्मी मूंग के भजिये सर्वोत्तम भजिये बनाते हैं। इसके साथ कड़क चाय पीना ना भूलें!

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४. पोहा-जलेबी

यूँ तो पोहा ऐसा व्यंजन है जिसे सम्पूर्ण महाराष्ट्र, मध्य भारत एवं उत्तर भारत के अनेक क्षेत्रों में प्रातःकालीन जलपान / न्याहारी के रूप में खाया जाता है, किन्तु उनके स्वाद एवं सामग्री में भिन्नता होती है। इंदौर के पोहे अत्यंत लोकप्रिय हैं जिसे साधारणतः जलेबी के साथ परोसा व खाया जाता है। यहाँ पोहे को प्याज, मूंगफली, मसालों इत्यादि का छौंक लगाकर बनाया जाता है तथा सेव, धनिया पत्ती तथा जिरामन (इंदौर का विशेष मसाला) बुरक कर परोसा जाता है। नमकीन पोहा तथा मीठी, कुरकुरी रसभरी जलेबी, यह एक अप्रतिम संगम है। पोहे एवं जलेबी एक दूसरे के स्वादिष्ट पूरक होते हैं जिसका आनंद अंतिम कौर तक प्राप्त होता रहता है।

५. साबूदाना खिचड़ी

यदि आप उपवास कर रहे हैं, स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हैं तथा तले व्यंजनों के स्वस्थ विकल्प खोज रहे हैं तो साबूदाना खिचड़ी एक स्वादिष्ट विकल्प है। साबूदाना श्वेत गोलाकार दाने होते हैं जिसे टेपियोका की जड़ से बनाया जाता है। साबूदाने का प्रयोग कर खिचड़ी एवं अनेक अन्य व्यंजन बनाए जाते हैं। इंदौर में साबूदाना खिचड़ी अत्यंत लोकप्रिय है। इसकी विशेषता है कि यह ग्लूटेन अर्थात् लस से मुक्त होती है तथा अत्यंत कम तेल में तैयार की जाती है जिसके कारण इसे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं माना जाता है। साबूदाना खिचड़ी में जीरा, मूंगफली, हरी मिर्चें, नींबू, ताजा नारियल का कीस तथा अन्य मसाले डाले जाते हैं तथा इसे ताजे दही के साथ परोसा जाता है। इसे खिचड़ी कहा जाता है किन्तु यह सामान्य खिचड़ी ना होकर, एक भुरभुरा स्वादिष्ट जलपान है।

६. गराडू चाट

यह इंदौर का अत्यंत लोकप्रिय, चटपटा तथा मसालेदार व्यंजन है जो इंदौर की प्राचीन गलियों का गौरव है। गराडू एक कंद-मूल है जो अधिकांशतः शीत ऋतु में उपलब्ध होता है। इस कंद को चौकोर टुकड़ों में काटकर तेल में कुरकुरा होने तक तला जाता है। तत्पश्चात विशेष गराडू मसालें छिड़ककर व भरपूर नींबू निचोड़ कर परोसा जाता है। चटपटे खट्टे मसालों में लिपटे कुरकुरे गराडू इंदौर का विशेष व्यंजन है जो अत्यंत स्वादिष्ट होता है।

७. शाही शिकंजी

यह एक ऐसा पेय है जिसे आपने इंदौर आने से पूर्व कभी नहीं ग्रहण किया होगा। इंदौर की शाही शिकंजी दूध एवं सूखे मेवों का अत्यंत स्वादिष्ट संगम होता है। उत्तर भारत में शिकंजी का अर्थ बहुधा नींबू का चटपटा-मीठा शरबत होता है जिसे ग्रीष्म ऋतु में थकावट मिटाने के लिए, शुधा तृप्त करने के लिए अथवा पाचन के लिए पिया जाता है। किन्तु इंदौर की शिकंजी स्वयं में एक पूर्ण आहार है। दूध में सूखे मेवे, केसर एवं इलायची डालकर महीन मिश्रण बनाया जाता है तथा ऊपर से मलाई डालकर ठंडा परोसा जाता है। यह विभिन्न स्वादों में भी उपलब्ध है। ग्रीष्म ऋतु में यह शीतलता तो देती ही है, साथ ही पूर्ण आहार का भी आनंद प्रदान करती है।

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८. दाल बाटी

यह एक लोकप्रिय राजस्थानी व्यंजन है। इसका एक रूप दाल-बाफला भी है। बाटियाँ बनाने के लिए, गेहूं के आटे में मोयन, नमक तथा अन्य आवश्यक मसाले डालकर उसे गूंथा जाता है तथा उनके गोल लोइयां बनाई जाती है। इन्हें बेलकर रोटियाँ बनाए बिना, सीधे ही उपलों/कंडों की आग में सेंका जाता है। तत्पश्चात उन्हें किंचित खोलकर घी में डुबाया जाता है। इसे मसालेदार दाल एवं चटनी के साथ परोसा जाता है। इसे बहुधा दोपहर अथवा रात्रि के भोजन में खाया जाता है। इसे खाने के लिए थाली में बाटियों को फोड़ा जाता है। ऊपर से भरपूर मात्रा में दाल एवं घी डालकर खाया जाता है। यह एक अत्यंत स्वादिष्ट एवं गरिष्ट भोजन होता है। बाफले बनाने के लिए आटे की लोइयों को सर्वप्रथम उबलते पानी में पकाया जाता है, तत्पश्चात उन्हें आग में सेंका जाता है। इसे भी बाटियों के समान ही खाया जाता है।

९. भुट्टे का कीस – इंदौर की खाऊ गलियों का विशेष व्यंजन

इंदौर की सुप्रसिद्ध भुट्टे की खीस
इंदौर की सुप्रसिद्ध भुट्टे की खीस

भुट्टे के कीस का अर्थ है किसे (कद्दूकस किये) हुए भुट्टे (कोमल व ताजे मक्के के दाने) का चटपटा नाश्ता। यह इंदौर के निवासियों का अत्यंत प्रिय व्यंजन है। क्यों ना हो? यह अत्यंत स्वादिष्ट जो है। भुट्टे के मौसम में इंदौर की खाऊ गलियों में इसके चहेतों की भीड़ लग जाती है। भूट्टे को किस कर उसे चटपटा बघार लगाया जाता है। यह कढ़ाई में जितना भूना जाता है, यह उतना ही स्वादिष्ट होता है। परोसते समय ऊपर से नींबू, ताजा हरा धनिया  एवं जिरामन छिड़का जाता है। है ना यह अत्यंत विशेष व्यंजन? इसे खाने के लिए आपको इंदौर ही आना पड़ेगा।

१०. दहीबड़ा

दहीबड़ा सम्पूर्ण भारत का लोकप्रिय नाश्ता है। आप इसे चाट में भी गिन सकते हैं। उड़द डाल को भिगोकर एवं महीन पीसकर उसके बड़े तले जाते हैं। इसके पश्चात इन्हें नमकीन पानी में भिगोकर रखा जाता है। तत्पश्चात इसे शीतल दही एवं चटपटे मसाले डालकर खाया जाता है। चाट हो एवं चटनी ना हो, यह कैसे हो सकता है? जी हाँ! दहीबड़े पर भी खट्टी-मीठी इमली चटनी एवं पुदीना चटनी डालकर परोसा जाता है। शीतल दही, चटपटे मसाले, खट्टी-मीठी चटनी, शीतलता प्रदान करती पुदीना चटनी तथा नर्म-मुलायम बड़े, आ गया ना मुंह में पानी! आपने अनेक स्थानों के दहीबड़े खाए होंगे, किन्तु इंदौर के दहीबड़े अत्यंत स्वादिष्ट हैं। कदाचित उनमें डाले मसाले विशेष हैं। इंदौर के सराफा बाजार में स्थित जोशी बड़ेवाले की दुकान में इंदौर के सर्वोत्तम दहीबड़े मिलते हैं। आप वहां जाएँ तो जोशीजी को दहीबड़े का दोना तैयार करते देखना ना भूलें। वह एक अत्यंत विशेष अनुभव होगा।

११. इंदौर का कुल्फी फलूदा – ग्रीष्म ऋतु का लोकप्रिय व्यंजन

कुल्फी फालूदा
कुल्फी फालूदा

क्या आप ग्रीष्म ऋतु में इंदौर जा रहे हैं? तब आप कुल्फी फलूदा का आस्वाद लिए बिना कैसे रह सकते हैं? इंदौर की कुल्फी-फलूदा में मीठी शीतल सेवईयों के ऊपर ठंडी जमी कुल्फी डाली जाती है। उस पर रूह-अफजा एवं मेवे डालकर परोसा जाता है। यह जितना सुन्दर दिखाई देता है, उससे भी अधिक यह स्वादिष्ट होता है। इंदौर की खाऊ गलियों में विभिन्न व्यंजनों का आनंद लेते समय कुल्फी-फलूदा के लिए उदर में स्थान अवश्य बचा कर रखें!

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१२. इंदौरी नमकीन  

यदि आप इंदौर भ्रमण पर आये हैं तथा यहाँ से ऐसा कुछ व्यंजन साथ  ले जाना चाहते हैं जिसे आप घर वापिस जाकर खा सकें एवं मित्रों-परिजनों को भी खिला सकें तो इंदौर के प्रसिद्ध नमकीनों से बेहतर क्या हो सकता है? इंदौर विभिन्न प्रकार के सेव, चूड़ा, मिक्सचर, फलाहारी चूड़ा इत्यादि के लिए अत्यंत लोकप्रिय है। इंदौर नमकीन विभिन्न रूपों, आकारों एवं स्वादों में उपलब्ध है जैसे लौंग की सेव, पालक की सेव, पुदीने की सेव, फलाहारी चिवड़ा, लसहन की गाठी, खट्टा-मीठा मिक्सचर इत्यादि। इन्हें आप चाय के साथ खा सकते हैं, पोहे के ऊपर बुरक कर खा सकते हैं, खाने के साथ खा सकते हैं अथवा जब मन चाहा तब खा सकते हैं।

१३. दूध पाक

यदि आपको मिल्क केक खाने में आनंद आता है तो आपको दूध पाक का आस्वाद अवश्य लेना चाहिए। मीठे दूध को पका कर तब तक गाढ़ा किया जाता है जब तक वह जमने योग्य हो जाए। ठंडा होते ही उसके टुकड़े काटकर उसे कटे हुए सूखे मेवों से सजाया जाता है। यह एक ऊंचे स्तर की मिठाई है। लोग उत्सवों तथा विशेष अवसरों पर उपहार स्वरूप इस मिठाई का आदान-प्रदान करते हैं। खाने के पश्चात इस मिठाई का स्वाद अवश्य चखें।

१४. गजक

शीत ऋतु के आते ही समस्त मिठाई की दुकानें एवं घरों के भण्डार कक्ष इस मिठाई से भर जाते हैं। गजक एक मीठा, खस्ता तथा विशेषतः अत्यंत स्वास्थ्यवर्धक मिठाई है जो शीत ऋतु में अत्यंत लाभकारी होती है। इसे तिल, मूंगफली एवं गुड़ से बनाया जाता है। गजक हमारे उत्सवों में चार चाँद तो लगाती ही है, साथ ही इसकी सभी सामग्रियां हमारी देह को ऊर्जा से भर देती हैं।

१५. जलेबा

जी हां! जलेबा! यह जलेबी का एक रूप है जिसका आकार बड़ा होता है। इसीलिए इसे जलेबा कहा जाता है। इसके विशाल आकार के कारण यह अधिक रसभरा, कुरकुरा तथा अत्यंत स्वादिष्ट होता है। बड़े आकार का होने के पश्चात भी आपका मन एक जलेबा से भरने वाला नहीं है! न्यू पलासिया में छप्पन दुकान आईये तथा गर्म रसभरे जलेबों का स्वाद चखिए।

१६. नारियल क्रश

यदि आप ग्रीष्म ऋतु में इंदौर की यात्रा कर रहे हैं तो यहाँ के सूखे उष्ण वातावरण में यह पेय आपको जलयोजित रखेगी। ताजे नारियल का जल अत्यंत पौष्टिक एवं शीतलता प्रदान करने वाला होता है। सूखे उष्ण वातावरण में यह अत्यंत लाभदायक होता है। किन्तु इंदौर तो इंदौर है! यह सादे साधारण व्यंजनों को भी विशेष रूप देकर ही परोसता है। इसीलिए यहाँ का नारियल क्रश लोकप्रिय है। ताजे नारियल से दूध निकालकर उसे मीठा व ठंडा किया जाता है। सूखे मेवों से सजाकर यह पेय उपभोग के लिए प्रस्तुत किया जाता है। इसे पीकर आप तरोताजा हो जायेंगे तथा अधिक समय तक ऊर्जावान  अनुभव करेंगे।

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१७. मावा बाटी

मावा बाटी
मावा बाटी

भारत के सभी क्षेत्रों की लोकप्रिय मिठाई, गुलाब जामुन से मिलता-जुलता यह मावा बाटी अत्यंत स्वादिष्ट मिष्टान्न है। यह सुनहरे भूरे रंग का तथा रस से भरा होता है। इसे मावा अथवा खोए से बनाया जाता है। दूघ को तब तक पकाया जाता है जब तक वह अत्यंत गाढ़ा हो जाए। इसे मावा अथवा खोवा या खोया कहते हैं। यह अनेक मिठाइयों की प्रमुख सामग्री होती है। यह अत्यंत गरिष्ठ होता है। सादा मावा भी अत्यंत स्वादिष्ट होता है। मावा बाटी को बाटी इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसका आकार आटे की बाटी के समान बड़ा व गोलाकार होता है। ताजे मावे को मुलायम कर उसके गोले बनाए जाते हैं। इनके भीतर सूखे मेवों के टुकड़ों को भरा जाता है। तत्पश्चात इन्हें धीमी आंच पर तेल अथवा घी में तला जाता है। तदनंतर इसे शक्कर की चाशनी में डुबाया जाता है। इससे यह इतना मुलायम व रसभरा हो जाता है कि जिव्हा पर रखते ही घुलने लगता है। इंदौर की मावा बाटी अत्यंत लोकप्रिय है।

इंदौर के व्यंजनों की विशेषताएं

इंदौर की खाऊ गलियों के स्वादिष्ट शाकाहारी व्यंजनों एवं मिष्टान्नों के इतने प्रकार व विकल्प हैं, आप निश्चय नहीं कर पायेंगे कि क्या खाएं एवं क्या छोड़ें। इंदौर के विक्रेता सादे साधारण व्यंजनों को भी विशेष कृतियों एवं सामग्रियों द्वारा असाधारण एवं विशेष बना देते हैं। इंदौर के व्यंजन यहाँ की संस्कृति एवं परम्पराओं को स्वादिष्ट रूप में प्रस्तुत करते हैं। ये मिष्टान्न व पकवान अपने स्वाद के द्वारा एकता, आनंद एवं सांस्कृतिक समृद्धि का भाव उत्पन्न करते हैं तथा सबको एक स्वाद के धागे से बांधकर रखते हैं। सभी इंदौर वासियों को अपनी इस समृद्ध विरासत पर गर्व है तथा वे इसे सहेज कर रख रहे हैं। इन स्वादिष्ट व्यंजनों के द्वारा सभी इंदौर वासियों में बसी एकता उल्लेखनीय है। अतः आप जब भी इंदौर जाएँ तो उत्तम नियोजन कर सभी विशेष व्यंजनों का स्वाद चखें।

श्रृष्टि पाटनी द्वारा प्रस्तुत अतिथि संस्करण


श्रृष्टि ‘F and B Recipes’ की संस्थापक हैं। इससे पूर्व वे Raletta में Chief Content Officer थीं। वर्तमान में वे अपनी दूसरी पाककला पुस्तक पर कार्य कर रही हैं। उन्होंने व्यंजनों पर आधारित अनेक लेख लिखे हैं तथा व्यंजन संस्करणों के अन्य लेखकों से की गयी चर्चाएं भी प्रसारित किये हैं। Shamballa Reiki एवं Intuitive Energy Healing, इन वेब स्थलों द्वारा आप उनके कार्य के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।


अनुवाद: मधुमिता ताम्हणे

2 COMMENTS

  1. अरे मेडम आपने तो, इतने स्वादिष्ट व्यंजनों के नाम लिखकर इंदौर के सराफा की याद ताजा कर दी, आपके द्वारा दी गई फेहरिस्त बहुत ही उम्दा है। मैं शुरू के 22 साल इंदौर के हृदयस्थल बड़ा सराफा में रहा हूं. जहाँ पहले रात को 1 बजे तक बंद दुकानों के ओटलों पर अनेक तरह के नाश्तों की दुकाने खुली रहती थी, इतनी रात तक भी इंदौर की मिलनसार लोग सपरिवार सड़क किनारे खड़े होकर स्वादिष्ट नाश्ते के लुत्फ उठाते नजर आ जाते है। इंदौर के खाने की फेहरिस्त काफी लंबी है आपने जो लिखा है वह तो है ही साथ मे वहाँ मौसमी ( जैसे भुट्टे, हरे चने, आम, मटर, गाजर, गराडू आदि) इनसे भी अनेक तरह के स्वादिष्ट व्यंजन बनते है, होली से श्रीखंड मिलना चालू हो जाता है। ठंड में रात को कड़ाव का दूध, रबड़ी डालकर वाह????????। नमकीन सेव, मिक्चर 100 से ज्यादा तरह के मिलते है। अंत मे वहाँ का पान भी मजेदार है। मुँह में पानी लाने के लिए ???? धन्यवाद????????????

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