कांचीपुरम की प्रसिद्ध कांजीवरम साड़ियाँ कहाँ से खरीदें?

0
542

कांचीपुरम, यह नाम लेते ही विविध रंगों में चित्तरंजक कांजीवरम साड़ियों का स्मरण हो आता है। कांजीवरम साड़ियों का नाम लेते ही मेरी सभी सखियों की आँखें चमक गयी होंगीं। कांचीपुरम भले ही सुन्दर प्राचीन मंदिरों का स्थल हो, परन्तु यह कांजीवरम की रेशमी शान में आपको सराबोर होने से रोक नहीं पाते। जब मैं कांचीपुरम की यात्रा पर थी, मैंने लगभग सभी से यह जानने का प्रयत्न किया कि कांचीपुरम में कांजीवरम साड़ियाँ कहाँ के खरीदूं? सबने मुझे एक ही उत्तर दिया, कांचीपुरम में कहीं भी!

कांचीपुरम की प्रसिद्द रेशमी साड़ियाँ
कांचीपुरम की प्रसिद्द रेशमी साड़ियाँ

चेन्नई में कुछ लोगों ने मुझे सावधान करने का प्रयत्न किया था कि मैं कांचीपुरम से ये साड़ियों ना खरीदूं।  उनका कहना था कि वहां अधिकतर विक्रेता मुझसे छल कर सकते हैं। परन्तु यहाँ आकर मैंने अपने अतिथिगृह के कुछ कर्मचारियों से इस विषय में चर्चा की। तब मुझे अनुमान लगा कि कई यात्री परिवार यहाँ  विवाह हेतु कांजीवरम रेशमी साड़ियाँ खरीदने ही आते हैं।

कांचीपुरम में आप कहीं भी खड़े हो जाएँ, आपको हर ओर बड़े बड़े विज्ञापन दिखाई देंगे। ये विज्ञापन आपको जानकारी देते हैं कि कांचीपुरम में कांजीवरम साड़ियाँ कहाँ कहाँ से खरीद सकते हैं। परन्तु कभी कभी अधिक उपलब्धता भी समस्या बन जाती है। कांचीपुरम में कांजीवरम साड़ियों की इतनी सारी दुकानें हैं कि कहाँ जाएँ, कहाँ ना जाएँ, यह बड़ा प्रश्न उत्पन्न हो जाता है। प्रत्येक दुकान के अग्रभाग में कांच की खिड़कियों के भीतर सजाकर रखी गयीं ये रंगबिरंगी रेशमी साड़ियाँ आपको रिझाती हैं, लुभाती हैं, कि आप दुकान में प्रवेश करे व लुभावनी रेशमी साड़ियों के विश्व में खो जाएँ।

कांचीपुरम की प्रसिद्ध कांजीवरम साड़ियों की खरीदी

कांचीपुरम में कांजीवरम साड़ियाँ खरीदने के लिए दो प्रकार की दुकानें हैं, एक है बुनकर सहकार तथा दूसरा प्रकार है विशाल शोरूम अर्थात् बड़ी बड़ी दुकानें।

बुनकर सहकारी संगठन

कांजीवरम साड़ियाँ खरीदने के लिए पहला विकल्प है बुनकर सहकार जो छोटी छोटी दुकानों से इन साड़ियाँ को बेचते हैं। यहाँ की साड़ियाँ रेशम चिन्हित होती हैं। रेशम चिन्हित होने का अर्थ है कि इन्हें शुद्ध रेशम से बने होने का प्रमाण प्राप्त है। गाँधी मार्ग पर ऐसी अनेक दुकानें हैं जहां बुनकर सहकार द्वारा शुद्ध रेशम से बनी साड़ियाँ आप खरीद सकते हैं।

बड़े बड़े शोरूम

मनमोहक कांजीवरम साड़ियाँ
मनमोहक कांजीवरम साड़ियाँ

कांचीपुरम में कांजीवरम साड़ियाँ खरीदने के लिए दूसरा विकल्प हैं, बड़े बड़े शोरूम अर्थात् विशाल दुकानें जहां साड़ियों के प्रकार एवं मूल्य की कोई सीमा नहीं। इस प्रकार की दुकानों में प्रवेश से पूर्व जूते-चप्पल दुकान के बाहर उतारना अनिवार्य है। दुकान के भीतर जाते ही दुकानदार द्वारा सर्वप्रथम आपसे साड़ियों की इच्छित मूल्य-सीमा पूछी जायेगी। मूल्य-सीमा के आधार पर आपको उस विशाल बहुमंजिली दुकान के नियत मंजिल पर भेजा जाएगा। आपके लिए एक विक्रेता सहायक निर्धारित कर दिया जाएगा। वह विक्रेता सहायक आपको उस विशाल तल में नियत स्थान पर ले जाएगा। वह अपने तीनों ओर समुद्री हरे रंग की तीन सूती चादरें बिछाकर उस पर कांजीवरम साड़ियाँ आपके समक्ष प्रस्तुत करेगा। यूँ तो आपसे भूमि पर बिछे गद्दों पर बैठने की आशा की जायेगी, किन्तु ना बैठने की स्थिति में आपके लिए तुरंत प्लास्टिक की कुर्सी की भी सुविधा उपलब्ध करा दी जायेगी।

और पढ़ें – एकम्बरेश्वर मंदिर – कांचीपुरम का प्रसिद्ध शिव मंदिर

विक्रेता सहायक

इन दुकानों के विक्रेता सहायक साड़ियों के साथ साथ खरीददारों को पहचानने में भी भलीभांति प्रशिक्षित होते हैं। वे आपके परिधानों, आभूषणों एवं शरीर के हावभाव से आपको आँकते हुए तदनुसार आपको साड़ियाँ दिखाना आरम्भ करते हैं। आप अपनी रूचि के अनुसार मूल्य-सीमा, रंग, कपड़ा इत्यादि उन्हें बता सकते हैं जिससे उन्हें आपके पसंद की साड़ियाँ प्रस्तुत करने में आसानी होगी। आप जितनी अधिक निश्चित आवश्यकताएं स्पष्ट रूप से उल्लेख करेंगे उतनी शीघ्रता से आपको मनपसंद साड़ियाँ प्राप्त हो सकती हैं। अन्यथा साड़ियों के इस अथाह सागर में आप स्वयं तो अवश्य खो जायेंगे, आपका समय भी व्यर्थ होगा। मेरे समान यदि आप निश्चित आवश्यकता के बजाय खुले मन से जायेंगे कि ‘जो भा जाये वो खरीद लेंगे’ तो भरपूर समय हाथों में लेकर ही आपको इन दुकानों में प्रवेश करना पडेगा। साथ ही यह आशा करनी पड़ेगी कि विक्रेता सहायक संयम खोकर दूसरे ग्राहकों की ओर ध्यान देना आरम्भ ना कर दे।

शुद्ध रेशमी साड़ियाँ

मेरे स्थानीय परिचितों के अनुसार, सभी कांजीवरम साड़ियाँ सदैव शुद्ध रेशमी साड़ियाँ नहीं होतीं। शुद्ध रेशमी साड़ियों पर रेशम चिन्ह (silk mark) अंकित होता है। अतः आप इस रेशम चिन्ह को अपना मापदंड बना सकते हैं। रेशमी कांजीवरम साड़ियों के अलावा आप रेशमी सूती तथा शुद्ध सूती साड़ियाँ भी खरीद सकते हैं। इनके अलावा एक और प्रकार की साड़ियाँ भी उपलब्ध हैं जिन्हें वे बचे-खुचे रेशमी धागों से बुनते हैं।

सोने के तार और रेशम की जुगलबंदी
सोने के तार और रेशम की जुगलबंदी

चूंकि मैं कांचीपुरम की यात्रा अकेले ही कर रही थी, मेरे साथ इन दुकानों में एक मनोरंजन घटना बार बार होती थी। इन दुकानों में साड़ियाँ खरीदने बहुधा बड़े परिवार अथवा स्त्रियों के समूह आते हैं। यहाँ के अधिकतर सहायक ऐसे ग्राहकों से ही अभ्यस्त होते हैं। मैं तो अकेले ही दुकानों में प्रवेश करती थी, वह भी साड़ी पहनने के बजाय अन्य परिधान धारण किये हुए होती थी। दुकानदार मेरी उपेक्षा कर मेरे आसपास मेरे साथ आये लोगों को खोजने लगते थे। अकेले खरीददारी करते देख उनकी साड़ियाँ दिखाने की रूचि में कमी आने लगती थी। एक स्थान पर तो मैं यह कहने को विवश हो गयी कि मैं अपना क्रेडिट कार्ड लेकर आयी हूँ, अतः वे मुझे साड़ियाँ दिखा सकते हैं! इसे आप सांस्कृतिक भेदभाव ही कहेंगे ना?

और पढ़ें – विष्णु कांची का वरदराज पेरूमल मंदिर – कांचीपुरम

कांजीवरम रेशमी साड़ियों के पर्यायवाची शब्द

कांजीवरम रेशमी साड़ियों को तमिल नाडू में पट्टू कहा जाता है। इन्हें कांचीपुरम या कोंजिवरम जैसे नामों से भी जाना जाता है। जी हाँ! कांजीवरम साड़ियों तथा कांचीपुरम साड़ियों में कोई अंतर नहीं है।

बुनकर सहकार तथा विशाल शोरूम के अलावा तीसरे प्रकार की भी दुकानें हैं जहां आप अपनी पुरानी कांजीवरम साड़ियाँ बेच सकती हैं। उन साड़ियों में कितनी सुनहरी जरी बुनी हुई है, इसके अनुसार वे आपको उन साड़ियों का मूल्य देते हैं। तत्पश्चात दुकानदार उन साड़ियों को जलाकर उससे सोना निकालते हैं तथा उसे पुनः प्रयोग में लाते हैं। है ना अनोखी बात!

अपने कांजीवरम साड़ियों के रेशम की शुद्धता कैसे पहचानें?

सैद्धांतिक रूप से देखा जाये तो रेशम की शुद्धता उसके एक धागे को जलाकर देखा जा सकता है। यदि जलने पर वह राख में परिवर्तित होता है तो वह शुद्ध रेशम है। अन्यथा वह रेशम का धागा नहीं है। जरी जांचने के लिए जरी धागे के एक छोर पर भीतर का धागा देखा जाता है। यदि भीतरी धागा लाल है तो वह जरी धागा है। परन्तु यह पक्की एवं विश्वसनीय जांच नहीं है। व्यवहारिक रूप से आपको अपने सहज ज्ञान एवं दुकानदार के शब्दों पर विश्वास रखना होगा। प्राप्त उपायों में से रेशम चिन्ह जांचना ही सर्वाधिक उत्तम समाधान है। अंततः यह विश्वास का खेल ही तो है।

कांचीपुरम में साड़ियों की दुकानें

यूं तो मैं कांचीपुरम आयी थी यहाँ के प्राचीन मंदिरों के दर्शन करने तथा उनके विषय में जानकारी प्राप्त करने के लिए। कांची कामाक्षी मंदिर में मेरी विशेष रूचि थी। परन्तु यहाँ प्रचलित प्रथा के अनुसार सब मंदिरों के कपाट मध्यान्ह भोजन से पूर्व बंद हो जाते हैं। ये कपाट संध्या ४.३० बजे के पश्चात ही पुनः खोले जाते हैं। यह प्रथा मेरे लिए विडम्बना कम, वरदान अधिक सिद्ध हुआ। मैंने इस समय का भी भरपूर सदुपयोग किया। यह समय मैंने कांचीपुरम के साड़ियों की दुकानों में व्यतीत किया। कांचीपुरम में मेरा आश्रय गाँधी मार्ग पर था। इसलिए इस मार्ग की सब दुकानों को छानने का मुझे भरपूर अवसर प्राप्त हुआ।

कांचीपुरम में मेरे द्वारा खंगाली गयी कुछ साड़ी की दुकानें:

  • एएस बाबु साह – यह कांचीपुरम का सबसे बड़ा ब्रांड है। आपको इस ब्रांड के बड़े बड़े विज्ञापन कांचीपुरम के कोने कोने में दिख जायेंगे। इन विज्ञापनों के देखकर मन में एक हूक उठती है कि यदि जगह जगह पर इसी प्रकार के फलक यहाँ के मंदिरों के विषय में भी लगाए जाते तो उन्हें ढूँढते हुए हर बार मैं राह नहीं भटकती। जाने दीजिये। इन फलकों को देख आप आसानी से इस दुकान तक पहुँच सकते हैं। इस दुकान के भीतर पहुंचकर मुझे खरीददारों की प्रचंड भीड़ दिखाई दी। अधिकतर लोग विवाह समारोह के लिए खरीददारी करते दिखाई दिए। इस दुकान में साड़ियों का संग्रह भी अधिकांशतः विवाहोपयोगी ही प्रतीत हुआ। अतः यदि आप सामान्य खरीददारी के लिए यहाँ आयें हैं तो इस दुकान को छोड़ सकते हैं।
  • एसएसके हैंडलूम सिल्क – मुझे इस दुकान की कीमतें सर्वोत्तम लगीं। यहाँ साड़ियों के दाम इतने संगत प्रतीत हुए कि यहाँ मोलभाव करना भी मुझे उचित नहीं लगा। यहाँ का संग्रह भी मुझे बहुत भाया। यह और बात है कि यहाँ से मैंने मुख्यतः सूती साड़ियाँ ही खरीदी थीं।
  • प्रकाश सिल्क्स – यहाँ भी साड़ियों का अच्छा संग्रह है। एक सम्पूर्ण तल केवल विवाह साड़ियों के लिए ही निश्चित किया गया है।
  • पचैयाप्पास सिल्क – मुझे इस दुकान का संग्रह भी भाया। यहाँ साड़ियों के मूल्य भी सामान्य थे।
  • कोमथी सिल्क्स – यद्यपि इस दुकान की साड़ियाँ अधिक मूल्यवान थीं, तथापि यहाँ आधुनिक व समकालीन रूपरेखाओं युक्त कुछ साड़ियाँ अत्यंत मनमोहक प्रतीत हुईं।
  • टेम्पल –एएस बाबु साह दुकान के समीप स्थित यह आधुनिक डिज़ाइनर साड़ियों की अच्छी सी दुकान है। यहाँ सीमित, तथापि आकर्षक समकालीन साड़ियों का संग्रह है।

यदि निकट भविष्य में आपकी कांचीपुरम यात्रा की कोई योजना नहीं है तो आप वेबस्थल अमेज़न से भी साड़ियाँ मंगवा सकते हैं।

कांचीपुरम का बुनकर सहकारी संगठन

कांचीपुरम के कुछ बुनकर सहकारी संगठन इस प्रकार हैं:

  • कांचीपुरम कामाक्षी अम्मा रेशम बुनकर सहकारी संस्था
  • कांचीपुरम मुरुगन रेशम सहकारी संस्था
  • वेंकटेश्वरा बुनकर सहकारी संस्था
  • अन्ना हथकरघा रेशम बुनकर संस्था

को-औपटेक्स वेबस्थल से भी आप इस संस्थाओं की साड़ियाँ खरीद सकते हैं।

कांचीपुरम नगरी की स्मारिका स्वरूप कांजीवरम रेशमी साड़ियाँ ही सर्वोत्तम खरीदी है।

कांचीपुरम में कांजीवरम साड़ियों का इतिहास

मौखिक इतिहास के अनुसार ऐसा माना जाता है कि ये रेशम बुनकर ऋषि मार्कंडेय के वंशज हैं जो स्वयं एक कुशल बुनकर थे। वहीं अभिलिखित इतिहास के अनुसार लगभग ४०० वर्षों पूर्व, विजयनगर राज्य के राजा कृष्णदेवराय के शासन में, देवंगर एवं सलीगर समुदाय के बुनकर आंध्र प्रदेश से कांचीपुरम आकर बस गए थे।

खड्डी पर हाथ से बुनी कांजीवरम साड़ियाँ
खड्डी पर हाथ से बुनी कांजीवरम साड़ियाँ

इन बुनकरों की विशेषता है कि ये पत्थरों पर उत्कीर्णित नक्काशियों को रेशम व जरी द्वारा साड़ियों पर बुनते हैं।

इन साड़ियों में प्रयुक्त मलबरी रेशम तमिल नाडू का ही उत्पाद है। वहीं जरी के लिए सोने के धागे गुजरात जैसे स्थानों से लाये जाते हैं।

सर्वोत्कृष्ट कांजीवरम साड़ी

एक सर्वोत्कृष्ट कांजीवरम साड़ी में किनार एवं पल्लू पृथक पृथक बुने जाते हैं। तत्पश्चात इन्हें मुख्य साड़ी में जोड़ा जाता है। इस जोड़ को पिटनी कहा जाता है। साड़ी के पीछे की ओर पर आप इस जोड़ को देख सकते हैं। ऐसा कहा जाता है कि यह जोड़ अत्यंत मजबूत होता है। समय के साथ आपकी साड़ी कट-फट सकती है पर यह जोड़ टस से मस नहीं होगा।

कांचीपुरम अथवा कांजीवरम साड़ियाँ दो लम्बाईयों में उपलब्ध हैं – सामान्य ६ गज साड़ियाँ तथा पारंपरिक ९ गज साड़ियाँ।

कांजीवरम साड़ियों को भौगोलिक संकेत प्राप्त है। अर्थात् यह एक धरोहर बुनाई है। इसका अर्थ है कि कांजीवरम साड़ियाँ केवल कांचीपुरम में ही बनकर बाहर आयेंगी।

कांजीवरम साड़ियों पर बने नमूने

कांचीपुरम साड़ियों की रंगीन छटा
कांचीपुरम साड़ियों की रंगीन छटा

कांजीवरम साड़ियों पर बना सर्वाधिक प्रसिद्ध एवं सर्वाधिक पसंदीदा नमूना है, मंदिर। इन साड़ियों पर मंदिर के नमूने किनार पर बने होते हैं। रेशम एवं जरी का प्रयोग कर मंदिरों के शिखर ज्यों का त्यों इन किनारों पर बुने जाते हैं। कुछ अन्य नमूने हैं पुष्प, पत्तियाँ, गज, हंस, तोते, रुद्राक्ष इत्यादि। भारतीय संस्कृति के इन पवित्र चिन्हों को आप भिन्न भिन्न संयोजनों में इन साड़ियों पर देख सकते हैं।

कुछ भारी एवं महंगी कांजीवरम साड़ियों की बुनाई में आप देवी-देवताओं एवं इनकी कथाओं को भी देख सकते हैं।

और पढ़ें:- कांचीपुरम का कांची कामाक्षी मंदिर

कांजीवरम साड़ियों के पिटारे में एक और विशेषता है। यदि आप अपने लिए विशेष साड़ी बनवाना चाहें जिसमें आप अपनी चुनी कहानी एवं नमूने अपने इच्छित रंग में बुनाई करवाना चाहें तो यह संभव है। परन्तु सावधान! इसके लिए मुँह माँगा दाम चुकाने के लिए भी तत्पर रहें।

तो बताईये क्या आपने अपने विवाह में कांजीवरम साड़ी पहनी थी, या पहनने वाली हैं? मैंने अपने विवाह में कांजीवरम साड़ी ही पहनी थी।

 अनुवाद: मधुमिता ताम्हणे

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here