प्राचीन कांचीपुरम नगर के दर्शनीय पर्यटक स्थल एवं अनुभव

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कांचीपुरम एक अत्यंत चित्ताकर्षक नगर है जो अपने भव्य मंदिरों एवं मनमोहक रेशमी साड़ियों के लिए जगत प्रसिद्ध है। जी हाँ, यहाँ आने से पूर्व मैं भी इस नगर के विषय में केवल इतना ही जानती थी। किन्तु अब मैंने जाना कि यह नगर रोमांचक कथाओं से परिपूर्ण है। यहाँ की उत्कीर्णित शिलाएं, रंगबिरंगी रेशमी साड़ियाँ कांचीपुरम की ऐसी ही कई कथायें बखान करती हैं। यहाँ तक कि यहाँ की इडली का घोल भी विशेष है जिसका नाम इस नगरी पर ही दिया गया है। कांचीपुरम में देखने एवं अनुभव करने के लिए मेरी सूची अत्यंत लम्बी थी।

कांचीपुरम - तमिल नाडु
कांचीपुरम

मैंने कांचीपुरम यात्रा का आरम्भ यहाँ के ५ मुख्य मंदिरों के दर्शन से किया था जो यहाँ के सर्वाधिक प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल माने जाते हैं। इनमें प्रत्येक मंदिर स्वयं में अत्यंत विशेष है। ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य एवं वास्तुकला की दृष्टी से ये अद्भुत जवाहरात हैं। इन मुख्य मंदिरों के दर्शन के पश्चात मैंने शिव कांची, विष्णु कांची एवं जैन कांची के अन्य छोटे-बड़े मंदिरों के भी दर्शन किये। उन में से कई मंदिरों के विषय में मैंने अपने संस्मरण पूर्व में ही लिखे हैं। आशा है उन्हें पढ़कर आपको परम आनंद प्राप्त हुआ होगा।

कांचीपुरम में आप जहां भी दृष्टी दौड़ाएं, आपको मनमोहक रेशमी साड़ियाँ दृष्टिगोचर होंगी। कांचीपुरम में आकर्षण मनभावन रेशमी साड़ियाँ कहाँ कहाँ से प्राप्त कर सकते हैं, इस पर भी मैंने विस्तार पूर्वक एक संस्मरण लिखा है। उसे पढ़कर आपको अवश्य लाभ होगा।

कांचीपुरम का संक्षिप्त इतिहास

कांचीपुरम, इस प्राचीन नगरी का विवरण कई हिन्दू शास्त्रों में प्राप्त होता है। यह ७ नगरों का समूह अर्थात् सप्तपुरी में से एक नगर है। सप्तपुरी के अन्य ६ नगर हैं, अयोध्या, मथुरा, माया अर्थात् हरिद्वार, काशी अर्थात् वाराणसी, अवंतिका अर्थात् उज्जैन तथा द्वारावती अर्थात् द्वारका। वामन पुराण में कांचीपुरम के विषय में कुछ इस प्रकार कहा गया है, नगरेशु कांची। इसका अर्थ है, भारत के सर्व नगरों में सर्वश्रेष्ठ।

कांचीपुरम दो भागों में बंटा है, शिव कांची तथा विष्णु कांची। दोनों कांची कामाक्षी अम्मा मंदिर को घेरे हुए हैं। यह और बात है कि आप विष्णु कांची में कई शिव मंदिर देखेंगे तथा शिव कांची में कई विष्णु मंदिर।

कांचीपुरम ४ से १०वीं. सदी तक पल्लवों की राजधानी थी। इसके पश्चात यह चोल, पंड्या तथा विजयनगर साम्राज्य के अंतर्गत आ गया था। यहाँ उपस्थित जैन एवं बौध शैली के चित्र इस तथ्य का प्रमाण हैं कि इस नगरी में ये तीनों संप्रदाय एक साथ उपस्थित थे। ठीक उसी प्रकार जैसा कि किसी बहुदेशीय नगरी में बहुधा होता है।

यह शिक्षण का एक उत्तम केंद्र था। राज-परिवार से सम्बंधित कई विद्यार्थी यहाँ उच्चतम शिक्षा ग्रहण करने आते थे। विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करते इन विद्यालयों को घटिका कहा जाता था। दुर्भाग्य से इस समय इन प्राचीन घटिकाओं का अंश मात्र भी शेष नहीं है। यद्यपि नवयुग के कई नवीन एवं आधुनिक विश्वविद्यालय अब यहाँ उपलब्ध हैं तथा कई अन्य का आगमन शेष है।

आईये अब इतिहास से वर्त्तमान में आते हैं। इस संस्मरण में मैं आप सब को कांचीपुरम के ५ मुख्य मंदिरों के साथ उन स्थलों के विषय में बताउँगी जिनके विषय में अधिक लोग नहीं जानते।

कांचीपुरम के सर्वोत्तम आकर्षण – मंदिर

कांचीपुरम के  ५ बड़े मंदिर

कांचीपुरम के ५ बड़े मंदिर जिनके दर्शन प्रत्येक पर्यटक करता है:
श्री कांची कामाक्षी मंदिर – कांचीपुरम की परमपूज्य देवी तथा उनके परिसर में स्थित अन्य मंदिर
श्री एकम्बरेश्वर मंदिर – कांचीपुरम का विशालतम शिव मंदिर
श्री कैलाशनाथ मंदिर – कांचीपुरम का प्राचीनतम शिव मंदिर
श्री वरदराज पेरूमल मंदिर – विष्णु का विशालतम मंदिर एवं विष्णु कांची का केंद्र
श्री वैकुण्ठ पेरूमल मंदिर – शिव कांची में स्थित विष्णु का अप्रतिम मंदिर

मैंने कांचीपुरम में कुल ६ दिवस भ्रमण किया जिसमें मैंने इन ५ प्रमुख मंदिर तथा कई अन्य दर्शनीय स्थलों के दर्शन किये। मैंने इन मंदिरों के विषय में विस्तृत संस्मरण लिखे हैं। कांचीपुरम यात्रा से पूर्व इन संस्मरणों को अवश्य पढ़ें।

शिव कांची के अन्य मंदिर

कुमार कोट्टम मंदिर

कुमार कोट्टम मंदिर - कांचीपुरम
कुमार कोट्टम मंदिर – कांचीपुरम

कुमार कोट्टम मंदिर कांची कामाक्षी एवं एकम्बरेश्वर मंदिरों के मध्य स्थित है। यदि आप इस स्थान को ऊंचाई से देख पायें तो ये तीनों मंदिर सोमस्कंद की आकृति बनाते प्रतीत होते हैं। एक मंदिर से दूसरे मंदिर की ओर जाते समय आप इस मंदिर के दर्शन कर सकते हैं।

यद्यपि कुमार कोट्टम मंदिर इस दोनों विशाल मंदिरों से अपेक्षाकृत छोटा है, तथापि दो प्राकारों से युक्त यह भी एक बड़ा मंदिर है। गर्भगृह के भीतर बैठी मुद्रा में मुरुगन की प्रतिमा है जिसे ब्रम्हा चट्टम कहा जाता है। उनकी पत्नियां, वल्ली एवं देवयानी अपने उत्सव मूर्ति के रूप में उपस्थित हैं।

ऐसा माना जाता है कि कंद पुराण की रचना इसी मंदिर में हुई थी।

श्री उलगनंद पेरूमल मंदिर

कांची कामाक्षी मंदिर के समीप स्थित उलगनंद मंदिर विष्णु के वामन अवतार को समर्पित है। यहाँ उनकी काले पत्थर में बनी ३५X२५ फीट की विशाल प्रतिमा है जिसमें वे एक पाँव उठाये हुए हैं तथा एक हाथ की दो उंगलियाँ उठाकर पहले से ले चुके दो पगों को इंगित कर रहे हैं। प्रतिमा की विशालता एवं उसका श्याम रंग आपको अभिभूत करने में पूर्णतः सक्षम है।

उनकी पत्नी को अमृतवल्ली थयर के रूप में पूजा जाता है।

श्री कच्छपेश्वर मंदिर

श्री कच्छपेश्वर मंदिर
श्री कच्छपेश्वर मंदिर

कुमार कोट्टा के समीप स्थित श्री कच्छपेश्वर मंदिर एक बड़ा मंदिर है। नगर के प्रमुख सड़क मार्ग से सटा हुआ इसका एक विशाल जलकुंड भी है। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर में विष्णु ने कच्छप अर्थात् कूर्म अवतार में शिव की आराधना की थी। इसीलिए इस मंदिर को कच्छ्पेश्वर कहा जाता है। ऐसा भी माना जाता है कि ब्रम्हा एवं सरस्वती ने भी इस मंदिर में पूजा की थी।

एक अन्य मान्यता के अनुसार इसे कचिकान्ची ईश्वर अर्थात् कांची नगरी का देव भी माना जाता है।

जलकुंड को इष्टसिद्धी तीर्थं कहा जाता है।

५ प्रमुख मंदिरों के पश्चात यही मंदिर है जिसके दर्शन अधिकतम यात्री व पर्यटक करते हैं।

श्री चित्रगुप्त स्वामी मंदिर

चित्रगुप्त यम के सहायक एवं एक प्रमुख हिन्दू देवता हैं जो मनुष्यों के पाप-पुण्यों का लेखा-जोखा कर न्याय करते हैं। ऐसा माना जाता है कि चित्रगुप्त मनुष्यों के मानसपटल पर चित्रित विचारों को गुप्त रूप से संचित कर रखते हैं। अंत समय पर इन्ही चित्रों के आधार पर वे उनके परलोक एवं पुनर्जन्म के विषय में निर्णय लेते हैं। उन्हें समर्पित मंदिर साधारणतः दुर्लभ हैं। मुझे बताया गया कि दिल्ली में भी उन्हें समर्पित एक मंदिर है। मैं अब तक उस मंदिर के दर्शन नहीं कर पाई हूँ।

यह एक छोटा मंदिर है। गर्भगृह में स्थित उनका विग्रह अत्यंत सुन्दर है।

श्री पांडवदूत पेरूमल मंदिर

श्री पांडवदूत पेरूमल मंदिर - शिव कांची
श्री पांडवदूत पेरूमल मंदिर – शिव कांची

एकम्बरेश्वर मंदिर के समीप स्थित यह एक छोटा तथा मनमोहक श्री कृष्ण मंदिर है। यह मंदिर उस क्षण को समर्पित है जब श्री कृष्ण पांडवों के दूत बनकर हस्तिनापुर गए थे। इसीलिए इस मंदिर को पांडवदूत मंदिर कहा जाता है।

यह भारत के उन मंदिरों में से एक है जो पौराणिक कथाओं के विभिन्न क्षणों को समर्पित हैं। इसी प्रकार का एक मंदिर है खिद्रापुर का कोपेश्वर मंदिर जो देवी सती के अग्निदाह के क्षण को समर्पित है।

ज्वरहरेश्वर मंदिर

पांडवदूत मंदिर के समीप स्थित यह मंदिर भी छोटा किन्तु अत्यंत सुन्दर है। इसकी गजपृष्ठाकार आकृति विशेष है। यह मंदिर शिव के ज्वर हरण करने वाले रूप को समर्पित है।

मथन्गेश्वर मंदिर

यह छोटा सा मंदिर वैकुंठ पेरूमल मंदिर के समीप है। यहाँ पल्लव शैली के सिन्हमुख युक्त स्तम्भ हैं जिन पर क्षरण के चिन्ह स्पष्ट दृष्टिगोचर होने लगे हैं।

श्री कौशिकेश्वर मंदिर

कांची कामाक्षी मंदिर के समीप स्थित यह मंदिर उनके सन्निधी मंदिरों में से एक है। आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित ६ पंथों को यह मंदिर समर्पित है। इसे कांचीपुरम का प्राचीनतम शिला मंदिर भी माना जाता है। यह एक अत्यंत छोटा मंदिर होते हुए भी स्वयं में सम्पूर्ण मंदिर है।

इरावतनेश्वर एवं पिरावतनेश्वर मंदिर

इरावतनेश्वर मंदिर - शिव कांची
इरावतनेश्वर मंदिर – शिव कांची

ये दोनों मंदिर एक दूसरे के समक्ष स्थित, न्यूनतम संभव मंदिर हैं। यद्यपि वर्त्तमान में इनके मध्य से एक सड़क जाती है। जिस समय मैं यहाँ पहुँची थी, ये दोनों मंदिर बंद थे। इन्हें देख कर ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे दोनों मंदिर सदैव बंद रहते हैं। पूछताछ करने पर ज्ञात हुआ कि इन्हें केवल जन्म एवं मृत्यु संबंधी अनुष्ठानों हेतु ही खोला जाता है।

यम मंदिर

यह एक छोटा सा शिव मंदिर है जो एम् एम् होटल के समीप स्थित है। ऐसा प्रतीत होता है कि समय के साथ इस मंदिर का नाम अपभ्रंशित होकर यम मंदिर पड़ गया है। ये छोटे मंदिर उन छोटे समुदायों को समर्पित हैं जो किसी समय इस मंदिर नगरी में अस्तित्व में थे।

ऐरावतेश्वर मंदिर

ऐरावातेश्वर मंदिर में दुर्गा
ऐरावातेश्वर मंदिर में दुर्गा

श्री कच्छपेश्वर मंदिर के समीप स्थित यह एक छोटा मंदिर है। जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है, इस मंदिर का निर्माण संभवतः इंद्र ने किया था।

अरुल्मिगु श्री विलकोली पेरूमल मंदिर

विलाकोली मंदिर का जलकुंड
विलाकोली मंदिर का जलकुंड

यह अपेक्षाकृत विशाल मंदिर है। विष्णु को समर्पित इस मंदिर का जलकुंड विचित्र आकृति का है।

श्री मुक्तीश्वर मंदिर

गाँधी मार्ग पर स्थित यह अपेक्षाकृत बड़ा मंदिर एक शिव मंदिर है। इस मंदिर की विशेषता है एक भक्त, थोंडा नयनार की शिवलिंग को प्रणाम करते हुए एक प्रतिमा। इसके परिसर में कई अन्य छोटे-बड़े मंदिर भी हैं।

सर्व तीर्थम् कुलम्

सर्व तीर्थम कुलम - कांचीपुरम
सर्व तीर्थम कुलम – कांचीपुरम

यह एक विशाल चौकोर जलकुंड है। इसके भीतर जाती सीड़ियों पर लाल एवं श्वेत पट्टियां रंगी हुई हैं। इसके चारों ओर कई छोटे मंदिर हैं, जैसे सीतेश्वर मंदिर, मल्लिकारुजेश्वर मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर तथा हनुमंतेश्वर मंदिर इत्यादि। मंदिर का जलकुंड दूर से अत्यंत सुन्दर प्रतीत होता है। दुर्भाग्य से पास से देखने पर समझ आया कि इसका रखरखाव ठीक प्रकार से नहीं किया गया है। इसके चारों ओर कूड़ा-कर्कट एवं मैला पसरा हुआ है।

आशा है कि सम्बंधित विभाग इस स्थल को शीघ्र ही स्वच्छ करेगा। यह स्थानीय निवासियों के साथ साथ पर्यटकों एवं तीर्थयात्रियों के लिए एक सुन्दर आमोद स्थल सिद्ध हो सकता है।

विष्णु कांची के अन्य मंदिर

पुण्यकोटेश्वर कोइल – एक छोटा शिव मंदिर जिसके गर्भगृह के चारों ओर संकरी खंदक है। यह मंदिर विष्णु कांची में वरदराज पेरूमल मंदिर के समीप स्थित है।

व्यासेश्वर एवं वसिष्टेश्वर मंदिर – विष्णु कांची की गलियों में, एक दूसरे के समीप स्थित ये दोनों मंदिर दो ऋषियों, व्यास एवं वसिष्ट को समर्पित हैं। इनके जलकुंड अब सूख चुके हैं।

अष्टभुजा पेरूमल मंदिर – विष्णु कांची का यह दूसरा सर्वाधिक लोकप्रिय मंदिर है। मुख्य मार्ग पर स्थित इस मंदिर के अधिष्टात्र देव पेरूमल अर्थात् विष्णु की आठ भुजाएं हैं। इसी कारण इस मंदिर का नाम अष्टभुजा पेरूमल मंदिर पड़ा।

यथोर्तकारी पेरूमल मंदिर – अष्टभुजा पेरूमल मंदिर के समीप स्थित यह एक प्राचीन मंदिर है। जब मैं इसके दर्शनार्थ यहाँ आयी थी, उस समय इस मंदिर के नवीनीकरण का कार्य प्रगती पर था।

कांचीपुरम में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अंतर्गत आते मंदिरों की सम्पूर्ण सूची यहाँ देखें।

कांची कामकोटी मठ

कांची आदि शंकराचार्य की बैठक है। कांची कामकोटी मठ कांचीपुरम के हृदयस्थली में स्थित है। ऐसा कहा जाता है कि आदि शंकराचार्य ने अपने अंतिम क्षण कांची में व्यतीत किये थे। यह उनके द्वारा स्थापित पांचवां मठ है। इससे पूर्व उन्होंने बद्री, पुरी, द्वारका एवं श्रृंगेरी में मठों की स्थापना की थी। कामाक्षी मंदिर परिसर में आप उनकी समाधि भी देख सकते हैं।
कांची मठ की भित्तियों पर आप आदि शंकराचार्य एवं कांची मठ के शंकराचार्यों की वंशावली के विषय में पढ़ सकते हैं। सम्पूर्ण भारत में उनके द्वारा किये गए परोपकारी कार्यों के विषय में भी आप यहाँ से जान सकते हैं।

कांची कामकोटि मठ में संगीत कचेरी
कांची कामकोटि मठ में संगीत कचेरी

कांचीपुरम का कांची मठ आध्यात्मिक जीवन का केंद्र है। लोग दूर दूर से तात्कालीन शंकराचार्यजी से भेंट करने यहाँ आते हैं। उनकी एक झलक पाने के लिए अथवा उन्हें आरती करते देखने के लिए लोग घंटों प्रतीक्षा करते हैं। उनमें से कुछ को शंकराचार्यजी से चर्चा करने का सौभाग्य भी प्राप्त हो जाता है। मैं भी उनमें से एक थी।

सादा पौष्टिक प्रसाद
सादा पौष्टिक प्रसाद

कांची मठ से मैं उनका आशीर्वाद प्राप्त कर एवं पढ़ने के लिए कांचीपुरम पर प्रकाशित अनेक पुस्तकें ले कर वापिस लौटी।
कांचीपुरम यात्रा बिना कांची मठ दर्शन के अपूर्ण है। यद्यपि कांचीपुरम में विभिन्न युग के मंदिर हैं, तथापि कांची मठ उसकी जीवंत आत्मा है। मुझे बताया गया कि यहाँ नियमित रूप से कचेरी अर्थात् संगीत कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। आप शान्ति से बैठकर इसका आनंद उठा सकते हैं। यह कांचीपुरम का उत्तम दर्शनीय स्थल है।

श्री चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वती विश्व महाविद्यालय

श्रीयन्त्र की संरचना में पुस्तकालय
श्रीयन्त्र की संरचना में पुस्तकालय

यह विश्वविद्यालय कांचीपुरम नगरी से किंचित दूर स्थित है। मैं यहाँ एक विशेष उद्देश्य से आयी थी। मुझे यहाँ की अंतरराष्ट्रीय पुस्तकालय देखने की इच्छा थी। यहां कई भारतीय शास्त्रों का अद्भुत संग्रह है। साथ ही मैं एक प्राध्यापक से भी भेंट करना चाहती थी जिन्होंने मुझे कांचीपुरम के पवित्र भूभाग की विस्तृत जानकारी दी। श्री चक्र के आकार में निर्मित इस पुस्तकालय की इमारत ने मुझे स्तब्ध कर दिया।

कई वर्षों पश्चात एक बार फिर मैंने छात्र कैंटीन में भोजन किया। वहां छात्रों से वार्तालाप में मुझे बड़ा आनंद आया।

कांचीपुरम के जैन मंदिर

यहाँ थिरुप्परुथीकुन्द्रम में दो प्रमुख जैन मंदिर हैं जो एक दूसरे के समीप स्थापित हैं। ये हैं त्रिलोक्यनाथ मंदिर एवं चंद्रप्रभा मंदिर।

त्रिलोक्यानाथ जैन मंदिर - कांचीपुरम
त्रिलोक्यानाथ जैन मंदिर – कांचीपुरम

त्रिलोक्यनाथ मंदिर भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग के अंतर्गत आता है। किन्तु मंदिर की चाबियाँ एक वृद्ध स्त्री के पास रहती हैं। इन्ही की इच्छानुसार मंदिर खुलता एवं बंद होता था। जब मैं यहाँ आयी थी, सौभाग्य से मंदिर खुला था तथा मुझे यहाँ कुछ समय बिताने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मैंने उनसे दुबारा मंदिर खोलने की कई मिन्नतें की किन्तु सब व्यर्थ हुआ।

पल्लवों के युग का यह मंदिर ठेठ द्रविड़ वास्तुशैली में ९ वी. सदी के आरम्भ में निर्मित किया गया है। कालान्तर में १४ वी. सदी में इसमें मंडप जोड़ा गया था। १७ वीं सदी में इस पर विभिन्न चित्रकारी की गयी। जैन धर्म के २४ वें. तीर्थंकर महावीर यहाँ के प्रमुख देव हैं। बाकी के मंदिरों में जैन धर्म के अन्य तीर्थंकर स्थापित हैं।

जैन मंडल
जैन मंडल

इस मंदिर में इतने मनमोहक जैन भित्तीचित्र हैं जितने इससे पूर्व आपने कभी नहीं देखे होंगे। सौभाग्य से इनका रख रखाव उत्तम है। मंदिर के मंडप को आधार देते कई रंगबिरंगे स्तम्भ हैं। इसकी छत पर ब्रम्हांड को प्रदर्शित करते अप्रतिम मंडल चित्रित हैं। ज्यामितीय आकृतियाँ अत्यंत रोचक हैं। तीर्थयात्रियों एवं पर्यटकों को जैन दर्शन की बारीकियां समझाने के लिए किसी जानकार की अनुपस्थिति मुझे बहुत खली। मुझे ये तथ्य भलीभांति ज्ञात है कि भारत के मंदिरों की शिल्पकारी एवं चित्रकारी केवल उनके लिए ही है जो इन्हें समझते हैं तथा इनके विषय में जानते हैं। सहसा यहाँ पहुंचे किसी यात्री के लिए इन्हें समझना आसान नहीं है।

जैन मंदिर के भित्तिचित्र
जैन मंदिर के भित्तिचित्र

अवश्य पढ़ें: कर्नाटक के मूदाबिद्री में जैन काशी

कितने यात्री इस मंदिर के दर्शन करते हैं यह मुझे ज्ञात नहीं। मेरे लिए इस मंदिर के अप्रतिम भित्तिचित्र अवश्य दर्शन योग्य हैं।

बुद्ध की प्रतिमा

कांचीपुरम में प्राचीन बुद्ध प्रतिमा
कांचीपुरम में प्राचीन बुद्ध प्रतिमा

यूँ तो चीनी यात्री ह्वेनसांग ने अपने संस्मरण में कांचीपुरम को कई बौध मठों से युक्त दर्शाया था, किन्तु वर्त्तमान में वे यहाँ दिखाई नहीं देते। सिवाय बुद्ध की एक सुन्दर प्रतिमा के, जिसे कुछ वर्षों पूर्व ही खोजा गया है। अब यह प्रतिमा कांची कामाक्षी मंदिर के समीप स्थित एक विद्यालय के प्रांगण में स्थापित है।

रोचक तथ्य यह है कि इस प्रतिमा को खोजते हुए मैंने एक घंटे से अधिक समय नगर के सड़कों की धूल छानी।

कांचीपुरम के समीप स्थित दर्शनीय स्थल – मंदिर

आयंगारकुलम का संजीवी राया आंजनेय मंदिर

यह एक विशाल हनुमान मंदिर है जो किसी समय यहाँ उपस्थित एक विशाल जलकुंड के तट पर स्थित है। एक भव्य एवं विशाल मंडप से युक्त यह मंदिर अत्यंत मनमोहक है। किवदंतियों के अनुसार जब हनुमान हिमालय से संजीवनी बूटी सहित पहाड़ उठाकर श्री लंका ले जा रहे थे तब उनकी उँगलियों के बीच से पहाड़ का एक भाग टूटकर यहाँ गिर गया था। इसीलिए इसका नाम संजीवी राया पड़ा।

संजिविराया आंजनेय मंदिर
संजिविराया आंजनेय मंदिर

मैंने कांचीपुरम में जितने भी मंदिर देखे, यह उनमें से सर्वाधिक शांत मंदिर था। भक्तगण अधिक नहीं होने के बाद भी मुझे यह मंदिर अत्यंत जीवंत प्रतीत हुआ। मंदिर के जलकुंड के समीप एक खुले रंगमंच सी सुन्दर संरचना है। कदाचित किसी समय इस स्थल का प्रयोग त्यौहारों एवं उत्सवों के लिए किया गया होगा।

प्रत्येक वर्ष, चैत्र पूर्णिमा के दिवस, वरदराज पेरूमल इस मंदिर में आते हैं तथा नाता भावी बावड़ी में स्नान करते हैं। समीप स्थित एक मंच पर उनकी उत्सव मूर्ति विराजमान होती है।

कांचीपुरम की यात्रा के समय इसके दर्शन करना ना भूलें।

नटभावी पुष्करणी

नटभावी पुष्करणी
नटभावी पुष्करणी

संजीवी राया मंदिर से कुछ ही दूरी पर शिलाओं द्वारा निर्मित एक सुन्दर बावड़ी है। इसके द्वार के तोरण पर गजलक्ष्मी विराजमान हैं।

संकरी और दीघ नटभावी पुष्करणी
संकरी और दीघ नटभावी पुष्करणी

धूसर रंग की शिलाओं से निर्मित यह लम्बी एवं संकरी बावड़ी गुजरात एवं राजस्थान में स्थित बावड़ियों की बहिन प्रतीत होती है। निचले तलों पर कई मंडप हैं। किसी समय इनका प्रयोग ग्रीष्म ऋतू की ऊष्मता से बचने के लिए किया जाता रहा होगा। वर्त्तमान में वहां पहुँचने के सभी मार्ग बंद कर दिए गए हैं।

कांची कुदिल

कांची कुदिल
कांची कुदिल

कैलाशनाथ मंदिर के समीप एक प्राचीन कांची निवास है जिसे अब संग्रहालय में परिवर्तित किया गया है। यहाँ कांची संस्कृति स्पष्ट दृष्टिगोचर होती है। लाल ऑक्साइड की धरती पर सुन्दर रंगोली, नवरात्रि के उपलक्ष्य में प्रदर्शित की जाने वाली गोलू गुड़ियाँ, प्राचीन काल के बर्तन, लकड़ी की घरेलू साजसज्जा तथा एक मनमोहक झूला उनमें से कुछ हैं।

मुझे लाल धरती पर श्वेत पदार्थ से बनी कोलम अर्थात् रंगोलियाँ अत्यंत ही भा गयी। वे मानो कोलम का संग्रह हों।

पूर्व सूचना देकर आप यहाँ का स्थानीय स्वादिष्ट खाना भी खा सकते हैं।

सरकारी संग्रहालय

काष्ठ प्रतिमा - सरकारी संग्रहालय में
काष्ठ प्रतिमा – सरकारी संग्रहालय में

यह एक छोटा सा संग्रहालय है। ऐसा प्रतीत होता है जैसे इसमें निर्माण के पश्चात कोई सुधार ही नहीं किया गया है। यहाँ आप लकड़ी द्वारा निर्मित कुछ कलाकृतियाँ देख सकते हैं। यह एक सर्वसामान्य संग्रहालय है। यदि आप इसे ना देखें तो कुछ नुक्सान नहीं होगा।

कांचीपुरम में क्या खाएं?

कांचीपुरम इडली
कांचीपुरम इडली

कांचीपुरम में आपको प्रत्येक संभव तमिल पकवान उपलब्ध होगा। नगर में कई सर्वन्ना भवन हैं जहां आप आँख मूँद कर जा सकते हैं तथा विभिन्न स्वादिष्ट व्यंजनों का आस्वाद ले सकते हैं। अन्य प्रसिद्ध जलपानगृह हैं शक्ति गणपति तथा श्री राम कैफ़े।

सेवई इडली
सेवई इडली

मेरा सुझाव है कि आप एक भोजन कांची मठ में भी करें। यह एक वरदान स्वरूप है।

व्यंजनों में इन दो व्यंजनों का आस्वाद आप अवश्य लें:

कांचीपुरम इडली – यह सामान्य इडली का किंचित सूखा एवं कड़ा रूप है जिसमें कई दालें डाली जाती हैं। इसके स्वाद से अभ्यस्त होने में कुछ समय अवश्य लगता है। किन्तु कांचीपुरम नगर आकर कांची इडली ना खाएं यह संभव नहीं।

सेवईं इडली – यह इडली सेवईं से बनायी जाती है। संध्या के समय यह छोटी दुकानों में उपलब्ध होती हैं।

कांचीपुरम कैसे पहुंचे?

मनभावन कोलम
मनभावन कोलम

• कांचीपुरम रेल एवं सड़क मार्ग द्वारा सभी अन्य नगरों से जुड़ा हुआ है। यह चेन्नई से लगभग ७५ की.मी. की दूरी पर स्थित है जो निकटतम विमानतल भी है। मैं चेन्नई से ओला टैक्सी लेकर यहाँ पहुँची थी।
• कांचीपुरम में रहने के लिए जीआरटी रीजेंसी सर्वोपयुक्त अथितिगृह है। आशा है शीघ्र ही सुख-सुविशाओं से लैस नवीन अतिथिगृहों का भी निर्माण हो जायेगा।
• अधिकतर पर्यटक चेन्नई में ठहरकर एक दिवसीय यात्रा के रूप में कांची का भ्रमण करते हैं। मेरा सुझाव है कि कांची को सही प्रकार से जानने के लिए २ से ३ दिवसों का समय अवश्य दीजिये।
• नगर में भ्रमण करने के लिए ऑटोरिक्शा उपयुक्त एवं उपलब्ध है।
• गूगल नक़्शे के अनुसार यहाँ पैदल भ्रमण आसान प्रतीत होता है। किन्तु वास्तव में यह इतना आसान नहीं है। यह स्थान अत्यंत गर्म तथा उमस भरा है। पैदल चलने के लिए उपयुक्त पगडंडियाँ भी नहीं हैं।

कांचीपुरम भ्रमण के अपने अनुभव हमसे बांटना ना भूलें।

अनुवाद: मधुमिता ताम्हणे

4 COMMENTS

  1. अनुराधा जी, कांचीपुरम के विभिन्न दर्शनीय पर्यटक स्थलों के बारे में बहुत ही सुंदर जानकारी ! यह भी अचरज की बात है कि शिव कांची में विष्णु मंदिर अधिक हैं और विष्णु कांची में शिव को समर्पित मंदिर अधिक है !
    सुंदर आलेख हेतू धन्यवाद.

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