नेक चंद का रॉक गार्डन – चंडीगढ़ के पर्यटन स्थल

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नेक चंद का रॉक गार्डन - चंडीगढ़ नेक चंद का रॉक गार्डन चंडीगढ़ की सबसे खूबसूरत और प्रसिद्ध जगह है। मैं बचपन में बहुत बार वहां पर जा चुकी हूँ। बाद में विद्यार्थी जीवन के दौरान पाठशाला में आयोजित की जाने वाली पिकनिक के समय भी बहुत बार वहां पर जाना होता रहा। लेकिन इस बार मैं लगभग 10 सालों बाद इस गार्डन में गयी हूँ। यह ऐसी जगह है जो इस शहर के लोकाचार को परिभाषित करती है। टूटी हुई कटलरी और कंगन, फेंके हुए इलैक्ट्रिकल पार्ट्स और बेकार टाइल्स, ड्रम और सीमेंट की थैलियाँ, जैसी अनेक बेकार और अनचाही वस्तुओं को विविध प्रकार की कलाकृतियों का रूप देकर उन्हें कला के माध्यम से नया जीवन देकर अमर बनाने का यह बहुत ही अच्छा तरीका है। और अब यह कलात्मक शैली शहर में हर जगह पर, जैसे स्मृतिचिह्नों की दुकानों में और यहां के भित्ति चित्रों में भी धीरे-धीरे दिखाई देने लगी है। यह शैली इतनी तेज़ गति से फैलती जा रही है, कि वह इस शहर में उगती हुई आधुनिकता का रूप बनकर सामने आ रही है।

कभी- कभी इस शहर की स्वच्छता को देखकर लगता है जैसे, यहां पर बेकार और अनचाही वस्तुओं को भी सम्मान से देखा जाता है, जिसके कारण ही उन्हें कलाकृतियों की वस्तुओं में ढाल दिया जाता है। एक तरफ से शहर में स्वच्छता बनाए रखने का यह बढ़िया तरीका है। मैं इस गार्डन में सुबह-सुबह गयी थी और जब मैं वहां पहुंची तो वहां पर मुझे कुछ कर्मी दिखे जो उस गार्डन के परिसर की साफ-सफाई कर रहे थे, जो पहले से ही काफी स्वच्छ दिखाई दे रहा था। इस बात से हम अंदाज़ा लगा सकते हैं कि यहां पर स्वच्छता को कितना महत्व दिया जाता है।

चंडीगढ़ का रॉक गार्डन

टूटे कप प्लेट से बनी मानव कृतियाँ – रॉक गार्डन, चंडीगढ़
टूटे कप प्लेट से बनी मानव कृतियाँ – रॉक गार्डन, चंडीगढ़

पिछले दस सालों में रॉक गार्डन के पहले दो चरणों में कुछ खास बदलाव नहीं हुए हैं। जैसे ही आप इस गार्डन में प्रवेश करते हैं, पीपों के ढेर से बनी दिवार के सामने खड़ा, बड़े-बड़े पत्थरों के ढेर पर भित्ति चित्र की भांति बनाया गया सूचना पट्ट आपका स्वागत करता है। जो इस गार्डन से जुड़ी मूल जानकारी प्रदान करता है। यहां की बहुत सारी बातें ऐसी थी जिन्हें देखकर मेरी पुरानी यादें ताज़ा हो गयी, जब मैं यहां पर अपने परिवार या दोस्तों के साथ आया करती थी। यहां की पत्थरों से बनाई गयी पतली सी गलियाँ, मिट्टी के घड़ों को एक के उपर एक ऐसे रखकर बनाई गयी आकर्षक सी संरचना, अनचाहे टाइल्स से बनी दीवारें, सीमेंट से बनी मूर्तियों के विविध प्रकार और वहां के पतले से छोटे-छोटे दरवाजे सब कुछ वैसा ही था।

बेकार ट्यूब लाइट्स से बनाई गयी दीवार के सामने खड़ी, टूटे हुए कप और तश्तरियों से बनाई गयी मॉडल्स की सेना आपका ध्यान अपनी ओर खिचती है। तथा टूटे हुए काँच के कंगनों से बनाई गयी गुड़िया आपको उनके निर्माता की सादगी और उनकी अप्रतिम प्रतिभा के बारे में सोचने के लिए मजबूर करती हैं। वैसे तो ये दिखने में बहुत साधारण सी लगती हैं, जैसे कि कोई भी छोटा बच्चा उन्हें आसानी से बना सकता हो। लेकिन अगर ध्यान से देखा जाए तो इन्हें बनाने में कड़ी मेहनत, लगन और धैर्य की बहुत जरूरत होती है।

टूटे घड़ों से बने छज्जे – रॉक गार्डन, चंडीगढ़
टूटे घड़ों से बने छज्जे – रॉक गार्डन, चंडीगढ़

इस गार्डन की दीवारों के उपर छोटी-छोटी संरचनाएं हैं, जो अपनी जगह से बाहर झाँकती हुई नज़र आती हैं। यह गार्डन बाहरी दुनिया से बिलकुल अलग है। इसकी अनोखी रचना आगंतुकों को अपनी दुनिया में समा लेती है। इस गार्डन के रख-रखाव को देखकर लगता है, जैसे आप किसी गाँव में आए हैं, जहां के रास्ते बेतरतीब से हैं और कहीं पर भी आपको खुली और सपाट सी जमीन नहीं दिखती। इन सब के बीचो-बीच एक कुंआ भी है जिसे देखकर लगता है कि, कोई अभी-अभी वहां से पानी भरकर गया हो। यहां के पेचीदा से रास्ते पहली बार आए हुए आगंतुकों के लिए हमेशा आश्चर्य से भरे होते हैं। लेकिन जब आप दूसरी बार वहां जाते हैं तो आप वहां पर अपनी पसंदीदा और परिचित सी जगह ढूंढने लगते हैं।

रॉक गार्डन का तीसरा चरण

चंडीगढ़ के रॉक गार्डन का तीसरा चरण
चंडीगढ़ के रॉक गार्डन का तीसरा चरण

रॉक गार्डन का तीसरा चरण यहां का नवीनतम भाग है, जो यहां का सार्वजनिक क्षेत्र है। इस विशाल क्षेत्र में सार्वजनिक समारोहों का आयोजन होता है, तथा बड़े-बड़े घरेलू समारोह, जैसे शादियों का भी आयोजन किया जाता है। यहां पर टूटे हुए टाइल्स से बने हुए भित्ति चित्र से सुसज्जित मंच है, जो इस क्षेत्र के एक कोने में स्थित है। दूसरे कोने में बड़े-बड़े मेहराबों से लटकते हुए झूले स्थित हैं। इस गार्डन के पृष्ठ भाग की दीवार के पास ही खंबों से बनाया गया एक गलियारा है, जिसमें एक मछलीघर भी है, जो उसे और भी आकर्षक बनाता है। रॉक गार्डन का यह भाग सच में बहुत व्यापक है और यह पूरा क्षेत्र बोहेमियान कला से सुसज्जित है। मुझे यहां के भित्ति चित्र बहुत ही सुंदर और आकर्षक लगे। यहां पर तीज का त्योहार बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता, जो कि चंडीगढ़ का प्रसिद्ध त्योहार है। यह सब देखने के बाद मुझे कहीं ना कहीं लगा कि क्यों भारतीय उद्योग परिसंघ (सी.आय.आय.) ने इस जगह को एक उत्तम यात्रा सम्मेलन के तौर पर नहीं चुना। मैं चंडीगढ़ में सी.आय.आय. के निमंत्रण पर पर्यटन महोत्सव पर अपने विचार रखने गयी थी।

नेक चंद – चंडीगढ़ के रॉक गार्डन के निर्माता

नए चरण का ऑडिटोरियम – रॉक गार्डन, चंडीगढ़
नए चरण का ऑडिटोरियम – रॉक गार्डन, चंडीगढ़

चंडीगढ़ के रॉक गार्डन के निर्माता नेक चंद जी की कहानी भी इस गार्डन की तरह बहुत ही दिलचस्प है। नेक चंद जी मूलतः पाकिस्तान के हैं और भारत-पाक विभाजन के समय वे भारत में आए थे। वे स्वयं ही मलबे से छोटे-छोटे टुकड़े एकत्रित करके उन्हें विविध प्रकार के आकार देने का काम किया करते थे। धीरे-धीरे यह बात फैलती गयी और जब तक लोगों को उनकी कला और कलाकृतियों के बारे में पता चला, तब तक वे 2000 से भी अधिक मूर्तियाँ बना चुके थे। यह सिर्फ चंडीगढ़ में ही हो सकता है, कि यहां का प्रशासन किसी व्यक्ति के कार्य के ज्यादा महत्व देकर, उसकी प्रतिभा को पहचाने तथा उनके द्वारा बनाए गए गार्डन को शहर के महत्वपूर्ण स्थल के रूप में अपनाए और उसे एक नयी पहचान दे। 1976 में इस गार्डन का आधिकारिक तौर पर उद्घाटन होने के बाद यह रॉक गार्डन धीरे शीरे अपनी प्रगति और विकास की ओर बढ़ता रहा। वह नए-नए प्रकार की कलाकृतियों का निर्माण करता गया। धीरे-धीरे यह स्थानीय लोगों और पर्यटकों की पसंदीदा जगह बन गयी। इसका फैलाव भी धीरे- धीरे बढ़ता गया, जैसे कि यहां पर एक झरना बनाया गया तथा विभिन्न समारोहों के आयोजन के लिए एक खास जगह भी बनवाई गयी।

नेक चंद जी की बहुत सी रचनाएँ अब दुनिया भर के प्रमुख संग्रहालयों का भाग बन गयी हैं। जिस छोटी सी कुटिया से उन्होंने रॉक गार्डन की यात्रा शुरू की थी वह आज भी वैसी ही है। नेक चंद जी को भारत सरकार द्वारा बहुत सारे पुरस्कारों से सम्मानित भी किया गया है। आज भी जब मैं उस गार्डन में गयी थी, तो उनसे मेरी मुलाक़ात नहीं हो पायी। लेकिन मेरी यही आशा है कि कभी मुझे उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलने का मौका मिले।

पर्यावरण हितैषी गार्डन

बिजली के सामान से बनी दीवारें – रॉक गार्डन, चंडीगढ़
बिजली के सामान से बनी दीवारें – रॉक गार्डन, चंडीगढ़

इस गार्डन में एक सूचना पट्ट लगाया गया है, जो आपको बताता है कि यह गार्डन पूर्ण रूप से पर्यावरण के अनुकूल बनवाया गया है। यहां पर बारिश के पानी का संचयन करने की सुविधा भी है। इसके अलावा यहां पर बहने वाले झरनों के लिए भी रिसाइकल किए हुए पानी का इस्तेमाल किया जाता है।

यह सब देखकर मुझे लगा कि भारत में पहले सबकुछ पर्यावरण के अनुकूल ही हुआ करता था। लेकिन धीरे-धीरे मनुष्य अपनी तृष्णा पूर्ति के लिए इस पर्यावरण का नाश करता गया। जिसके कारण आज हमे समझदारी से पर्यावरण हितैषी बनने पर मजबूर किया जाता है।

चंडीगढ़ का रॉक गार्डन बहुत ही सुंदर और अप्रतिम है। अगर आपने अभी तक यह जगह नहीं देखी है, तो कभी यहां पर जरूर जाइए।

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