बाली इंडोनेशिया के जल मंदिर – तमन अयुन, तीर्थ एम्पुल

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इंडोनेशिया के जल मंदिर - प्रवेश द्वार
इंडोनेशिया के जल मंदिर – प्रवेश द्वार

इंडोनेशिया का बाली द्वीप उसकी सुन्दरता, शांत वातावरण एवं सुरम्य समुद्रतटों से जाना जाता है। आप में से जिसने भी बाली भ्रमण किया है, उन्होंने इसका अनुभव अवश्य लिया होगा। वो सुखद स्मृतियों अब भी आपके मन को में विचरण कराती होंगी। किन्तु आपका ध्यान धान के सीढ़ीदार खेतों की ओर कदाचित नहीं गया होगा। मैं आपको बताना चाहूंगी कि ये धान के खेत एवं इंडोनेशिया के जल मंदिर बाली के सांस्कृतिक परिदृश्य का अहम् भाग हैं। इन्ही परिदृश्यों को यूनेस्को ने विश्व विरासत स्थल की मान्यता प्रदान की है।

यूँ तो बाली दर्शन के पीछे मेरे कई हेतु थे। उनमें सर्वाधिक महत्वपूर्ण आशय था यूनेस्को विश्व विरासती स्थलों के दर्शन करना। बाली को अब तक आपने प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर पर्यटन स्थल के रूप में ही जाना होगा। तथापि बाली का सांस्कृतिक धरोहर रूप आप को अचंभित कर देगा। यूनेस्को का वेबस्थल इसे सांस्कृतिक परिदृश्य मानते हुए, यहाँ के धान की खेती हेतु सुबक सिंचाई व्यवस्था को विरासती स्थल घोषित करता है। इस वेबस्थल पर बाली का केवल एक ही मंदिर दर्शाया गया है। तमन अयून नामक इस राजमंदिर के सिवाय कोई ओर मंदिर का उल्लेख यहाँ नहीं किया गया है। तथापि बाली के तीर्थ एम्पुल नामक जलमंदिर के दर्शन के समय, इसके भी यूनेस्को द्वारा घोषित विरासती स्थल होने के विषय में जानकारी प्राप्त हुई थी। बाली के इन विरासती स्थलों का मूल तत्व यहाँ की जल प्रबंधन प्रणाली है। अतः मैं बाली इंडोनेशिया के उन सब जलमंदिरों का यहाँ उल्लेख करना चाहूंगी जो मेरे अनुमान से बाली के सांस्कृतिक परिदृश्य का भाग होते हुए, विश्व विरासती स्थल के अंतर्गत आते हैं।

बाली के हिन्दू मंदिर

तीर्थ एम्पुल जल मंदिर में भव्य पेड़ के नीचे मंदिर
तीर्थ एम्पुल जल मंदिर में भव्य पेड़ के नीचे मंदिर

बाली हजारों हिन्दू मंदिरों का एक हिन्दू द्वीप है। अतः भारतीय हिन्दुओं का बाली से एक विशेष भावनात्मक रिश्ता है। आपको भारत से अपेक्षाकृत कहीं अधिक हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ बाली के सार्वजनिक स्थलों में देखने को मिलेंगी। बाली के सडकों के नाम भी भारतीय मूल के हैं। इनमें कई नाम पौराणिक कथाओं के प्रसिद्ध पात्रों के नामों से व्युत्पन्न हैं, जैसे भीम, हनुमान इत्यादि। यहाँ प्रदर्शित रामायण देख आप अचंभित रह जायेंगे। मुझे आज भी आश्चर्य होता है कि कैसे वे कलाकार बिना वाद्यों के भी संगीत उत्पन्न कर रहे थे।

किन्तु इन सब का एक दूसरा पहलू भी है। बाली के मंदिर भारत के अधिकाँश मंदिरों से भिन्न हैं। बाली के मंदिरों में देवी-देवताओं की प्रतिमाएं नहीं होती। अपितु वहां स्थित मंच पर ही चढ़ावा अर्पित किया जाता है। अधिकतर मंदिरों में केवल बाली के हिन्दुओं को ही प्रवेश की अनुमति है। अन्य हिन्दुओं को गर्भगृहो में प्रवेश की अनुमति नहीं है। गैर-हिन्दुओं का प्रवेश पूर्णतः निषिद्ध है। हालांकि मैंने उन्हें अपने हिन्दू होने का विश्वास दिलाया, तब भी मुझे कुछ मंदिरों में प्रवेश नहीं दिया गया। प्रवेश की इच्छा में मैंने उनके पारंपरिक वस्त्र अर्थात् सेरोंग एवं कमरपट्टा भी धारण किया। किन्तु ज्यादातर मंदिरों के भीतर मुझे प्रवेश नहीं मिला। कहीं प्रवेश मिला भी तो मुझे संदेह से देखा गया। इन सब के बावजूद, बाली में मैंने जितना कुछ भी इन मंदिरों के विषय में देखा एवं जाना, वह इतना समृद्ध था कि प्रवेश निषेध का मुझे विशेष खेद नहीं है।

सुबक सिंचाई व्यवस्था- बाली की पारंपरिक जल प्रबंधन प्रणाली

बाली - इंडोनेशिया के जल मंदिर
बाली – इंडोनेशिया के जल मंदिर

बाली की पारंपरिक जल प्रबंधन प्रणाली त्रि-हित-करण है। यह शब्द जो संस्कृत के तीन शब्दों से बना है, बाली की सुबक सिंचाई व्यवस्था का आधार है। त्रि अर्थात् तीन, हित अर्थात कल्याण एवं करण अर्थात करना। यह वह सिद्धांत है जो तीनों का कल्याण करता है, आप, आपका पासपड़ोस एवं पर्यावरण। इसका मूल सिद्धांत है जल पर सबका सामान अधिकार। अर्थात् आप व आपके खेतों को, बिना पर्यावरण को क्षति पहुंचाए, जल की आपूर्ति करना। यह व्यवस्था प्राकृतिक संसाधनों का न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करती है। जल एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन होने के कारण, सम्पूर्ण सम्प्रदाय इस व्यवस्था से लाभान्वित होता है।

बाली की सुबक सिंचाई प्रणाली में धान के खेतों की विशेष व्यवस्था है, क्योंकि धान के खेतों को भरपूर जल की आवश्यकता होती है।

सुबक व्यवस्था का उल्लंघन करने वाले नागरिकों की मंदिर में सुनवाई होती है। जनकल्याण एवं पर्यावरण संरक्षण के बड़े उद्देश्य की प्राप्ति हेतु यह एक सटीक सामाजिक नियंत्रण व्यवस्था है। सुबक जल सिंचाई प्रणाली के विषय में आप बाली के इस वेबस्थल से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। आप इस अत्यंत सु-रचित प्रणाली की प्रशंसा किये बिना नहीं रहेंगे। मैंने जाना कि सुबक केवल एक सम्प्रदाय की व्यवस्था नहीं है। अपितु इसके कई सामाजिक एवं सांस्कृतिक आयाम हैं। सारे किसान उर्वरता एवं प्रचुरता हेतु मिलजुलकर देवी से प्रार्थना करते हैं

सुबक व्यवस्था लिए इंडोनेशिया के जल मंदिर

इंडोनेशिया के जल मंदिर गुआ गजः की पुष्कर्णी
इंडोनेशिया के जल मंदिर गुआ गजः की पुष्कर्णी

प्रत्येक सुबक प्रणाली व्यवस्था के साथ एक जल मंदिर जुड़ा हुआ है। यदि आप चाहें तो बाली संग्रहालय में आपको सुबक व्यवस्था के कार्यप्रणाली की आवश्यक जानकारी प्राप्त हो सकती है।

सुबक व्यवस्था के अंतर्गत जंगल, धान के वेदिका खेत, नहरें एवं अन्य जलपरिवहन साधन, मंदिर इत्यादि आते हैं। बाली में इस तरह के हजार से अधिक सुबक व्यवस्थाएं हैं। प्रत्येक सुबक के अंतर्गत ५० से ४०० किसानों का समावेश हो सकता है।
यह सुबक व्यवस्था यूनेस्को द्वारा घोषित विश्व विरासती धरोहर है। इसके अंतर्गत आते हैं-
• बतूर झील के किनारे स्थित पूरा उलुन दानु बतूर – इसे सम्पूर्ण बाली के जल का मूल स्त्रोत माना जाता है।
• पाकेरीसन जलोत्सारण क्षेत्र का सुबक परिदृश्य – यह बाली की सर्वाधिक प्राचीन सिंचाई प्रणाली है।
• चतुर अँग बातुरकारु का सुबक परिदृश्य- १० वीं शताब्दी के अभिलेखों में इस सुबक प्रणाली का उल्लेख पाया गया है।
• पुरा तमन अयुन – राज परिवार का मंदिर जहां विशालतम सुबक प्रणाली स्थापित है।

तथापि मेरे तीर्थ एम्पुल के दर्शन के समय मैंने वहां भी यूनेस्को के अभिलेख प्रदर्शित देखे जो इंडोनेशिया के जल मंदिर हैं ।
इस संक्षिप्त प्रस्तावना के उपरांत आईये हम बाली के उन जल मंदिरों की चर्चा करें जो बाली के संस्कृति समृद्ध परिदृश्य का महत्वपूर्ण अंग है।

पुरा तमन अयुन – बाली इंडोनेशिया का विशालतम जल मंदिर

तमन अयुन - बाली इंडोनेशिया के जल मंदिर
तमन अयुन – बाली इंडोनेशिया के जल मंदिर

पुरा तमन अयून बाली का राजवंशी मंदिर है। एक बड़े क्षेत्र में स्थापित इस मंदिर के सुन्दर व्यापक बगीचे एवं कमल ताल इसका द्योतक है।

हरे भरे उपवन - पुरा तमन अयुन - बलि इंडोनेशिया
हरे भरे उपवन – पुरा तमन अयुन – बलि इंडोनेशिया

एक सुरम्य ताल को मध्य से द्विभाजित करती पगडंडी पर मैं पहुंची। यहाँ मेरी भेंट हुई दो संत्रियों से जिन्होंने अपने कानों में ताजे पुष्प धारण किये हुए थे। मंदिर का प्रवेशद्वार ठेठ बाली पद्धति से निर्मित था। इस प्रवेशद्वार से होते हुए मैं एक विस्तृत बगीचे तक पहुंची जिसके बीचोंबीच एक छोटा चौकोर कुंड बना था। इसके बीचोंबीच अप्रतिम कलाकृति से सज्ज एक फव्वारा बनाया गया था। बगीचे के एक कोने में प्यारा सा छत्र बना हुआ था। बगीचे का रखरखाव इस मंदिर की सुन्दरता को चार चाँद लगा रहा था। तत्पश्चात पगडंडी मुझे कुछ सीड़ियों तक ले गयी जो मुझे मंदिर तक पहुंचा रही थीं। मंदिर चारदीवारी के भीतर स्थापित था। मंदिर परिसर के एक कोने में मुझे एक दोहरी छत का शिखर दृष्टिगोचर हुआ।

पत्थर में उत्कीर्ण कहानियां - इंडोनेशिया के जल मंदिर
पत्थर में उत्कीर्ण कहानियां – इंडोनेशिया के जल मंदिर

सीढ़ियाँ चढ़ते ही हमारे सम्मुख एक ऊंचा मंदिर प्रस्तुत हो गया। यहाँ के मंदिरों की एक विशेषता जो मेरे ध्यान में आई, चाहे सीड़ियाँ हों या प्रवेशद्वार, दोनों ओर द्वारपाल प्रतिमाएं अवश्य स्थापित होती हैं। मंदिर के भीतर प्रवेश की अनुमति नहीं है। तथापि आप मंदिर की परिक्रमा कर इसकी उत्कृष्ट कलाकृति को अवश्य निहार सकते हैं।

मुख्य प्रवेशद्वार के पृष्ठ भाग पर स्थित पगडंडी के दोनों ओर अलंकृत कटघरा बनाया गया था जिसका ऊपरी भाग सर्प के आकार का बनाया गया था। कटघरे की भित्त के ऊपर एक साधू की उभरी हुई नक्काशी की गयी थी। इसके एक ओर वाद्य बजाता एक पुरुष एवं दूसरी ओर पर्णसमूह के मध्य बैठी एक स्त्री की नक्काशी की गयी थी।

मेरु – इंडोनेशिया के जल मंदिर

मेरु - इंडोनेशिया के जल मंदिर
मेरु – इंडोनेशिया के जल मंदिर

तमन अयुन मंदिर परिसर में चौकोर मंचों पर कई ऊंची संरचनाएं निर्मित थीं। शिखर सदृश प्रत्येक संरचना में घटते आकार की कई छत्रियों की परतें थीं। मुख्य मंदिर के चारों ओर जल से भरी खंदकें थीं। कदाचित इसीलिए इसे जल मंदिर कहा जाता है।

मंदिर में चढ़ावा अर्पित करने हेतु मंच बने हुए थे। कुछ छोटे मंचों पर दिव्य मूर्तियाँ भी रखी हुई थीं। सुरेख ढंग से बनी फूस की तिरछी छतें इन मंचों को ढांके हुवें थीं। प्रत्येक छत पर वज्र का प्रतिरूप स्थापित था। मंच के चारों ओर स्तंभों पर भी दिव्य प्रतिमाएं स्थापित थीं।

मंदिर में मैंने कई अन्य अलौकिक प्रतिमाएं देखीं भाषा के बंधनों के रहते जिनके ना तो मुझे नाम ज्ञात हुए ना ही इनकी दंतकथाओं की पृष्ठभूमि। कई प्रतिमाएं पंख धारण किये हुए थीं एवं उन पर प्रचुर मात्र में आभूषण भी उत्कीर्णित थे। यदि आप के पास इनके विषय में कोई जानकारी हो तो मैं अवश्य जानना चाहूंगी।

मंडप – इंडोनेशिया के जल मंदिर

जल से घिरा पुरा तमन अयुन मंदिर - बलि - इंडोनेशिया
जल से घिरा पुरा तमन अयुन मंदिर – बलि – इंडोनेशिया

मुख्य मंदिर के बाहर एक मंडप था जिसके चारों ओर स्तंभ स्थापित थे। इन स्तंभों पर भी कई दिव्य प्रतिमाएं उत्कीर्णित थीं। इनमें मैं केवल एक प्रतिमा पहचान पाई जो मेरे अनुमान से वीणा धारी सरस्वती माँ की थी। अन्य प्रतिमाओं के विषय में मुझे जानकारी प्राप्त नहीं हो पाई। वे अब भी मेरे लिए रहस्य है।

एक अन्य मंडप में मुर्गों की लड़ाई का दृश्य नक्काशा हुआ था जिसके दोनों ओर घोड़े उत्कीर्णित थे।

एक कोने में स्थित मंच पर मुझे उत्तेजित उग्र दिव्यात्माओं के चित्र दृष्टिगोचर हुए। समीप उपस्थित बाली वासियों से भाषा बंधनों के कारण इन प्रतिमाओं के विषय में आधिक जानकारी प्राप्त नहीं हो पाई।

पुरा तमन अयुन में देवी देवताओं की प्रतिमाएं
पुरा तमन अयुन में देवी देवताओं की प्रतिमाएं

पुरा तमन अयुन मंदिर के इतिहास की जो जानकारी मैंने दी उसमें बढ़ोतरी करते हुए आपको बताना चाहती हूँ कि यह मंदिर उस मेंग्वाई राजघराने का मंदिर है जिसने १९ वीं सदी के अंत तक शासन किया था। इसका अर्थ है कि बाली में सुबक जलप्रणाली १९ वीं सदी तक उपयोग में लाया जाता रहा था। यूँ तो इस मंदिर की स्थापना १७ वीं शताब्दी में की गयी थी, तथापि २० वीं शताब्दी में इसका पुनरुद्धार किया गया है।

पुरा तमन अयुन मंदिर पर्याप्त रूप से विशाल था। यद्यपि मैंने मंदिर के आतंरिक भागों का अवलोकन नहीं किया था, तथापि पूरा एक घंटा मंदिर के बाह्य भागों के अवलोकन में ही व्यतीत हो गया। मेरी यह अभिलाषा है कि यहाँ परिदर्शक सहित दर्शन की व्यवस्था का आरम्भ हो। कम से कम एक फलक ही स्थापित किया जाय जो इस मंदिर के विषय में, विशेषतः यहाँ के जल प्रबंधन व्यवस्था के विषय में विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान करे।

तीर्थ एम्पुल – बाली का सर्वाधिक सक्रिय जल मंदिर

पुरा तीर्थ एम्पुल में पवोत्र स्नान करते हुए श्रद्धालु - बाली इंडोनेशिया
पुरा तीर्थ एम्पुल में पवोत्र स्नान करते हुए श्रद्धालु – बाली इंडोनेशिया

तीर्थ एम्पुल बाली का व्यस्ततम एवं सर्वाधिक सक्रिय मंदिर है। इसके विशाल परिसर के भीतर देखने एव् समझने हेतु बहुत कुछ है।

इसके प्रवेशद्वार पर ही एक विशाल वृक्ष था। इसके चारों ओर बने मंच पर चढ़ावा अर्पित कर आराधना की जाती है। आप को पुनः स्मरण करा दूँ, यदि आप बाली के हिन्दू नहीं हैं तो आप इस मंच पर नहीं चढ़ सकते। आप केवल मंच के चारों ओर परिक्रमा कर सकते हैं। केवल बाली के हिन्दुओं को ही इसकी आराधना करने की अनुमति है।

तीर्थ एम्पुल का बाली भाषा में शाब्दिक अर्थ है पवित्र स्त्रोत। १० वीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर एक जल स्त्रोत के चारों ओर स्थापित है। यह जल स्त्रोत पाकेरिसन नदी का उद्गम स्त्रोत है। इसी स्त्रोत के नाम पर ही इस मंदिर का नाम तीर्थ एम्पुल रखा गया है।

पुरा तीर्थ एम्पुल के बाहर परिवार प्रतिमाएं - इंडोनेशिया के जल मंदिर
पुरा तीर्थ एम्पुल के बाहर परिवार प्रतिमाएं – इंडोनेशिया के जल मंदिर

जल स्त्रोत का जल कई जल-मुखों से बाहर निकलकर एक विशाल कुंड में इकठ्ठा हो रहा था। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि यह जल कुंड तीर्थ एम्पुल के दर्शनार्थियों हेतु सर्वाधिक आकर्षण का केंद्र था क्योंकि प्रत्येक जल-मुख के सम्मुख एक लंबी पंक्ति थी। वे उस पवित्र जल में शुद्धिकरण स्नान हेतु अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रहे थे। कई दर्शनार्थी कुंड के समीप स्थित मंच पर भी प्रतीक्षारत बैठे हुए थे।

चढ़ावा – इंडोनेशिया के जल मंदिर

चढ़ावा ले जाते हुए श्रद्धालु - पुरा तीर्थ एम्पुल - बाली इंडोनेशिया
चढ़ावा ले जाते हुए श्रद्धालु – पुरा तीर्थ एम्पुल – बाली इंडोनेशिया

मंदिर में मुझे कई दर्शनार्थी अपने हाथों में अत्यंत सुरुचिपूर्ण एवं सुन्दर टोकरियाँ लिए मंदिर की ओर जाते दिखे। माथे पर श्वेत तिलक लगाए एवं पारंपरिक वस्त्र धारण किये हुए दर्शनार्थी अत्यंत मनभावन प्रतीत हो रहे थे। उनकी टोकरियों में कुछ पोटलियाँ रखी हुई थीं। ध्यान से देखने पर ज्ञात हुआ कि यह टोकरियाँ दर्शनार्थी मंदिर में चढ़ावे के रूप में अर्पित करने हेतु ले जा रहे थे। बाली की हिन्दू संस्कृति का सम्पूर्ण सारांश मुझे इस मंदिर में देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

मत्स्य कुंड - पुरा तीर्थ एम्पुल - इंडोनेशिया के जल मंदिर
मत्स्य कुंड – पुरा तीर्थ एम्पुल – इंडोनेशिया के जल मंदिर

तीर्थ एम्पुल मंदिर के एक ओर मछलियों से भरा चौकोर कुंड था। इसके चारों ओर देवालय पद्धति में भित्त निर्मित थी। मैं वहां बैठ कुछ क्षण उन मछलियों को निहारने लगी। दर्शनार्थियों द्वारा दिए खाने की उन्हें लत लग गयी थी। वे जिस ओर लोगों को देखते, उसी ओर तैर कर इकठ्ठा हो जाते थे।

मुख्य मंदिर कई मंचों से अटा पड़ा था। कुछ मंच अत्यंत सुरुचिपूर्ण ढंग से उत्कीर्णित थे जिन पर दिव्य प्रतिमाएं स्थापित थीं। अन्य मंच सादे पद्धति से बने थे जिन पर भक्त चढ़ावे चढ़ाते थे। तीर्थ एम्पुल में मुझे एक अनोखा दृश्य देखने मिला। दर्शनार्थी अपने चढ़ावे इन मंचों पर रखते एवं उसके चारों ओर बैठ जाते थे। तत्पश्चात पुजारीजी वहां जाकर इच्छानुसार अनुष्ठान करते थे।

श्वेत पीट वस्त्र से सुस्सजित शिवलिंग - पुरा तीर्थ एम्पुल - बाली इंडोनेशिया
श्वेत पीट वस्त्र से सुस्सजित शिवलिंग – पुरा तीर्थ एम्पुल – बाली इंडोनेशिया

सम्पूर्ण बाली में तीर्थ एम्पुल ही ऐसा मंदिर दिखा जहां यथोचित शिवलिंग स्थापित था। श्वेत एवं पीत वस्त्रों में लिपटे इस शिवलिंग का भक्तिपूर्वक श्रृंगार किया गया था। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि बाली के भक्तगणों ने पूर्ण मान-सम्मान से इसकी अर्चना की है।

मंदिर के पृष्ठ भाग में भी एक कुंड था जिसके मध्य कई छोटे छोटे मंदिर बने हुए थे। यह मंदिर का अपेक्षाकृत शांत भाग प्रतीत हुआ।

पुरा तीर्थ एम्पुल में श्रद्धालु - इंडोनेशिया के जल मंदिर
पुरा तीर्थ एम्पुल में श्रद्धालु – इंडोनेशिया के जल मंदिर

मंदिर के बाहर विक्रेता चढ़ावे हेतु पुष्प, केले इत्यादि बिक्री कर रहे थे। वे सर्वप्रथम लोगों को एक केला निःशुल्क चखने हेतु देते थे। तत्पश्चात उनसे खरीदने का आग्रह करते थे। मुझे ये अत्यंत अनोखी प्रथा प्रतीत हुई।

मंदिर परिसर के बाहर एक विशाल बाजार भी था जहां से आप बाली की विशेष वस्तुएं स्मरणिका स्वरुप खरीद सकते हैं।

गुआ गजः मंदिर – इंडोनेशिया के जल मंदिर

गुआ गजः मंदिर - बाली इंडोनेशिया
गुआ गजः मंदिर – बाली इंडोनेशिया

गुआ गजः मंदिर अर्थात् हाथी के रूप का गुफा मंदिर जिसका अग्रभाग व्यापक रूप से उत्कीर्णित था। इस पर कई भयावह प्राणियों एवं राक्षसों की उभरी हुई नक्काशियां थीं। गुफा के अग्रभाग को गजमुख सदृश माना जाता है। हालांकि गुफा का मुख मुझे किसी भी दृष्टी से गजमुख प्रतीत नहीं हुआ था। बाली भाषा में गुआ का अर्थ गुफा एवं गजः का अर्थ हाथी होता है। इसी कारण इस गुफा का नाम गुआ गजः पड़ा।

मंदिर के प्रवेशद्वार पर जलकुंड था जिसे एक पगडण्डी दो भागों में विभाजित कर रही थी। कुंड का प्रत्येक भाग मुख्य भित्त पर स्थित तीन जलमुखों से आते जल से भर रहा था। मेरे अनुमान से जलस्तर स्थिर बनाए रखने हेतु कुंड में जल निकासी का साधन भी अवश्य होगा।

गुआ गजः मंदिर में तीन शिवलिंग - बाली इंडोनेशिया
गुआ गजः मंदिर में तीन शिवलिंग – बाली इंडोनेशिया

जलकुंड के चारों ओर कई मंच बने हुए थे जिसका उपयोग बाली के हिन्दू दर्शनार्थी पूजा अर्चना हेतु कर रहे थे।

गुफा के अग्रभाग को कुछ क्षण मैं विस्मयकारी भय से निहारती रही। तत्पश्चात मैंने गुफा में प्रवेश किया। मुझे ऐसा प्रतीत हुआ जैसे मैं किसी दैत्य के मुख के भीतर प्रवेश कर रही थी।

गुफा के भीतर प्रवेश करते ही मुझे दोनों ओर एक एक ड्योढ़ी दिखाई पड़ी। बांयी ड्योढ़ी हमें गणेश भगवान् की प्रतिमा तक ले गयी तथा दांयी ड्योढ़ी द्वारा हमें तीन शिवलिंगों के दर्शन प्राप्त हुए। वहां कुछ अतिरिक्त आले भी थे जिन पर कुछ नहीं रखा गया था। कदाचित किसी काल में इन पर भी प्रतिमाएं स्थापित रही होंगी।

गुफा के बाहर मुझे कुछ घड़ों के भंगित अवशेष दिखे। किन्तु इनके विषय में कुछ जानकारी वहां उपलब्ध नहीं थी।

गुआ मंदिर एक लघु गुफा है जिसके दर्शन हेतु विशेष समय नहीं लगता। गुआ मंदिर के, बाली के जलमंदिरों की सूची में समावेश होने के तथ्य उपलब्ध नहीं हो पाए। तथापि मंदिर के बाहर उपस्थित जलकुंड मुझे इसे जलमंदिर मानने हेतु बाध्य कर रहा था।

सुबक जल सिंचाई प्रणाली के विषय में जानने की कुतूहलता के रहते मैंने बाली के कुछ जलमंदिरों के दर्शन किये। उन्होंने मुझे इतना आकृष्ट किया कि पुनः बाली के दर्शन कर शेष इंडोनेशिया के जल मंदिर के दर्शन की अभिलाषा अब तक तीव्र है।

 इंडोनेशिया के अन्य दर्शनीय स्थलों पर मेरे संस्मरण-

बोरोबुदुर बौध मन्दिर – इंडोनेशिया के जावा द्वीप की ऐतिहासिक सम्पदा
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अनुवाद: मधुमिता ताम्हणे

6 COMMENTS

  1. अनुराधा जी,
    हमेशा की तरह बहुत ही रोचक तथा ज्ञानवर्धक आलेख ! बाली द्वीप वैसे भी सुंदरता एवम् शांत वातावरण के लिये विख्यात है. यूनेस्को द्वारा यहां धान की खेती हेतू अपनाई जाने वाली “सुबक सिंचाई प्रणाली” तथा यहां के जल मंदिरों की “जल प्रबंधन प्रणाली” को विश्व विरासत स्थलों के रूप में सूचीबद्ध करना यह दर्शाता है कि ये कितनी वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित होंगी !
    हां,वहां के मंदिरों के गर्भगृहों मे अन्य हिन्दुओं का प्रवेश-निषेध दुर्भाग्यपूर्ण है !
    धन्यवाद.

    • प्रदीप जी – मेरा ऐसा मानना है की जब उन्हें विश्वास हो जायेगा ही हम हिन्दू हैं तो वो हमारा स्वागत करेंगे। लगता है बहुत से पर्यटक ओने को हिन्दू बता कर प्रवेश पाने की कोशिश करते हैं, इस कारण उनका विश्वास कम है। इन मंदिरों में अधिक लोग नहीं जाते, अधिकतर लोग समुद्र तट पर ही घोऊमकर वापिस आ जाते हैं।

  2. So happy to see you writing in Hindi, Anu. 🙂

    That makes me feel I should also revive my Hindi posts and start writing new ones again.

    Bali is a beautiful place with loads of stories about everything. Have been there twice but won’t mind a few more visits.

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