आगा खान महल – पुणे में महात्मा गाँधी का कारावास

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आगा खान महल - पुणे
आगा खान महल – पुणे

आईये आज मैं पुणे में यरवडा के समीप आगा खान के एक सुंदर महल से आपको अवगत कराती हूँ जहाँ महत्मा गाँधी ने अपने दो साल के कारावास का समय बिताया था। जब आप इस महल के बारे में जानेगें तो आप भी मेरी तरह सोचने पर मजबूर हो जायेगें कि क्या कारावास की जगह इतनी सुंदर हो सकती है।

आगा खान महल का इतिहास

सन् १८९२ में पुणे के लोगों को रोज़गार देने के लिये आगा खान महल का निर्माण किया गया था, इसलिए इस महल की जड़ें दया भाव एवं नेक विचारों में डूबी हैं। यह भवन १९ एकड़ में फेला हुआ है जिसमें ७ एकड़ में भवन का निर्माण किया गया है। इसको बनाने में १००० मजदूरों को पांच वर्ष का समय लगा और लागत आयी थी करीब बारह लाख रुपए।

आगा खान महल और महात्मा गाँधी

महात्मा गाँधी और कस्तूरबा गाँधी - आगा खान महल - पुणे
महात्मा गाँधी और कस्तूरबा गाँधी – आगा खान महल – पुणे

अगस्त १९४२ से मई १९४४ तक अपने कारावास के समय महात्मा गाँधी आगा खान महल में ही रहे थे। यहाँ पर वो अपनी पत्नी कस्तूरबा गाँधी, अपने सहायक महादेव देसाई और स्वतंत्रता सेनानी नायडू के साथ रहे। सच तो यह है कि कस्तूरबा गाँधी और महादेव देसाई का स्वर्गवास इसी कारावास के दौरान इसी महल में हुआ था। इस महल का एक कोना इन्हीं दोनों की समाधि को समर्पित है। इन दोनों समाधियों के पास महात्मा गांधीजी के अवशेष का कुछ हिस्सा रखा हुआ है। असल में यह समाधि नही है बस यहाँ पर इन दोनों का दाहसंस्कर किया गया था। इस जगह पर तुलसी के पौधों को लगाया गया है।

कस्तूरबा गाँधी को समर्पित एक मराठी कविता - आगा खान महल - पुणे
कस्तूरबा गाँधी को समर्पित एक मराठी कविता – आगा खान महल – पुणे

कस्तूरबा गाँधी की समाधि के पास उनको समर्पित मराठी में एक कविता लाल दीवार पर लिखी गयी है।

कस्तूरबा एवं महादेव देसाई की समाधी - आगा खान महल - पुणे
कस्तूरबा एवं महादेव देसाई की समाधी – आगा खान महल – पुणे

सच कहूँ तो, जब आप इस महल का भ्रमण करते हुए वहाँ के बागीचों, लम्बें गलियारों और बड़े बड़े कमरों को देखते हैं तो यह विचार आपके मन में अवश्य आता है कि क्या इस जगह को कारावास का नाम दिया जा सकता है। मैंने पाया कि इतने बड़े प्रांगण में घूमने फिरने पर किसी भी प्रकार की कोई पाबंदी नहीं थी। हो सकता है यहाँ रहनें वाले अपने कारावास के दौरान बाहर भी आते जाते हों। याद रहे यह वोह समय था जब मीडिया का बोल बाला नहीं था अन्यथा उस समय का विवरण हमें उस दौरान ही ज्ञात हो जाता।

आगा खान का परिचय

आगा खान महल का आगे का चित्र - पुणे
आगा खान महल का आगे का चित्र – पुणे

आगा खान तृतीय या सर सुल्तान मुहम्मद शाह आगा खान तृतीय इस्लामी मुस्लिम खोजा के ४८वें इमाम थे। वह आल इंडिया मुस्लिम लीग के संस्थापक थे। भारतवर्ष में मुसलमानों के अधिकारों के लिये उन्हीनें बहुत काम किया। आगा खान उनमें से एक थे जिहोनें भारत में मुसलमानों के लिये अलग राज्य बनानें पर जोर दिया था। आगा खान का जन्म कराची के एक उच्च परिवार में हुआ था। उन्होंने ईटन और कैंब्रिज से शिक्षा ग्रहण की। अपने जीवनकाल में उन्होनें ब्रिटिश सरकार से कुछ उपाधियाँ भी हासिल की। अपने नाम के आगे सर की उपाधि भी हासिल की। उनके पास दौड़ के कई घोड़े भी थे। अपने जीवन काल में उन्हीनें कई शादियाँ की। इजिप्ट के असवान में दफ़न होनें से पहले उन्होनें कई पुस्तकें भी लिखीं। उन पुस्तकों में उनकी यादें भी शमिल हैं।

आगा खान महल पुणे
आगा खान महल का पृष्ठ भाग –
पुणे

आगा खान चतुर्थ जो आगा खान तृतीय के पोते थे उन्होनें यह महल १९६९ में भारत को दान में दे दिया।सही मायने में यह महल गाँधी स्मारक निधि भारत सरकार की संपति है। यह हमारे राष्ट्रपिता को सम्मान देने का उनका एक तरीका था। अगर आप आगा खान तृतीय के बारे में और अधिक जानकारी पाने की इच्छा रखते हैं तो उनके विकिपीडिया पेज से प्राप्त कर सकते हैं।

आगा खान महल का भ्रमण

महात्मा गाँधी और कस्तूरबा की प्रतिमा - आगा खान भवन - पुणे
महात्मा गाँधी और कस्तूरबा की प्रतिमा – आगा खान भवन – पुणे

अगर आप शांति से टहलने की इच्छा रखते हैं तो इस महल से अच्छी कोई जगह नही हो सकती। इस पूरी इमारत के चारों ओर ऊँचे ऊँचे वृक्ष हैं। इतनें अधिक वृक्ष होने के कारण मैं इस महल की एक भी फोटो ठीक से लेनें में कामयाब नहीं हो पा रही थी। तब मैनें महसूस किया कि वृक्ष ही तो हैं जो इस महल की शोभा को बढ़ा रहें हैं।

यह महल हल्के पीले रंग और अपनी ढलावदार लाल छत के कारण बहुत सुंदर प्रतीत होता है। मुझे नहीं मालूम कि यह महल हमेशा से ही इतना सुंदर लगता था या गांधीजी की समृति स्वरुप इसको और अधिक महत्व देने के लिये सुंदर बनाया गया है।

गाँधी संग्रहालय

गाँधी जी के चित्र और पत्र - आहा खान महल - पुणे
गाँधी जी के चित्र और पत्र – आहा खान महल – पुणे

जो कमरे गांधीजी ने इस्तमाल किये थे अब उन्हें संग्रहालय में परिवर्तित कर दिया गया है। देखनें में वे कमरें बहुत ही स्वच्छ और साधरण से हैं। उन कमरों में गांधीजी द्वारा इस्तमाल की गयी वतुएँ जैसे बर्तन, चप्पल, कपड़े और पत्र आदि रखे हुए हैं।

महल में प्रवेश करते ही बड़े से कमरे में गांधीजी की मूर्ति रखी हुई है। गांधीजी की बड़ी-बड़ी तस्वीरें इतनी अच्छी तरह बनाई गयी हैं मानों उनमें जान हो। महात्मा गाँधी के आज़ादी के आन्दोलन के समय की भी कुछ तस्वीरें वहाँ पर हैं खास तौर पर वो तस्वीर जिसमें बहुत से लोगों के समक्ष महत्मा गाँधी के हाथ में भिक्षापात्र है। ऐसे चित्र अपने आप में कई चिन्ह समेटे हुए हैं।

गाँधी जी का चित्रांकन - आगा खान महल - पुणे
गाँधी जी का चित्रांकन – आगा खान महल – पुणे

दुसरे कमरें में चित्रावली के माध्यम से गांधीजी द्वारा एक छोटे बच्चे को गोद में उठाया दर्शया गया है। इस भवन में गांधीजी के जीवन की घटनाओं को रंगीन चित्रों के माध्यम से अंकित किया गया है। तस्वीरें उस कमरें में भी थीं जहाँ पर कमरे के बीचोबीच एक गोल मेज़ सात सात कुर्सियों के साथ रखी हुई थी। इनको एक बाड़े के अंदर सुरक्षित रखा गया था ताकि उन्हें कोई छू न सके।

गांधीजी द्वारा लिखा गया पत्र

एक बहुत ही रोचक चीज वहाँ रखी हुई थी और वो थी गांधीजी द्वारा उनके सहायक महादेव देसाई के देह्न्त पर लिखा गया पत्र। मुझे पूरा विश्वास है कि यह पत्र उस पत्र की नक़ल थी क्यूंकि गांधीजी की लिखाई अच्छी नहीं थी।

महल की उपरी मंजिल पर पीछे की तरफ कुछ कमरे थे परन्तु वो दर्शकों के लिये नहीं खुले थे मैंने अंदाज़ा लगाया कि उनका इस्तमाल कार्यालय स्वरुप किया जाता होगा।

मैनें बहुत से विद्यार्थियों को वहाँ पर फोटो खीचते हुए देखा खासकर फैशन फोटोग्राफी करते हुए जिसका मुख्य कारण यह सुंदर महल और उसका बगीचा था।

अब मैं भ्रमण करते हुए महल के पीछे पहुंच चुकी थी वहाँ से मुझे छत पर कांच का अहाता दिखा। उसने मुझे हैदराबाद के फलकनुमा महल की याद दिला दी। कुछ सोचनें के बाद मैनें महसूस किया कि ये दोनों महल समकालीन हैं और हो सकता है ये एक दुसरे की प्रेरणा हों। लेकिन एक सदी बीत जानें के बाद उनकी किस्मत उनका जीवन जितना अलग हो सकता था, है।

आगा खान महल की कुछ और रोचक चीजें

आगा खान महल का प्रवेश द्वार - पुणे
आगा खान महल का प्रवेश द्वार – पुणे

इनके अलावा भी आगा खान महल में और बहुत कुछ था जैसे –

  • एक पुस्तकालय
  • गाँधी साहित्य को बेचने वाली एक दुकान
  • खादी ग्रामोधोग की दुकान
  • औरतों का प्रशिक्षण केंद्र
  • यू एन एच आर सी दफ्तर
  • बच्चों का फ़िल्मी क्लब आदि

आगा खान महल में मनाये जाने वाले उत्सव

यहाँ जानें से पहले इन्टरनेट के माध्यम से मुझे पता चला था कि इस महल में हर समय भजन या गानें बजते रहते हैं। परन्तु यहाँ के कर्मचारी ने इस बात को मानने से इनकार कर दिया। खैर, जो दिन साल में यहाँ मनाये जाते हैं, वो हैं :

  • २४ जनवरी- राष्ट्रिय बालिका दिवस
  • २६ जनवरी- गणतन्त्र दिवस
  • ३० जनवरी- गांधीजी की पुण्यतिथि
  • २२ फरवरी- या महाशिवरात्रि
  • ८ मार्च- महिला दिवस
  • १५ अगस्त- स्वतंत्रता दिवस
  • २ अक्टूबर- गाँधी जयंती
  • १४ नवम्बर- बाल दिवस

पुणे के तड़क भड़क वाले कल्याणी नगर से मैं एक दिन शाम को इस एतिहासिक इमारत को देखने गयी। मैंने टिकिट खरीदा और बड़े ही आनंदपूर्वक मुझे इस बात से अवगत कराया गया कि मैं वहाँ के चित्र ले सकती हूँ। क्यूंकि ज्यादातर जगहों पर फोटोग्राफी निषेध होती है, मैंने ऊपर की ओर देखा और ईश्वर को धन्यवाद दिया कि मुझे यहाँ फोटो खीचनें की अनुमति है।

गाँधी जी के अन्य निवास :

मुंबई में मणि भवन

अम्हदाबाद में कोचरब आश्रम 

हिंदी अनुवाद – शालिनी गुप्ता

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