हिमाचल प्रदेश का धनकर मठ और स्पीति घाटी का गढ़ एवं गाँव

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1780

धनकर मठ पिन नदी के किनारे, एक खड़ी चट्टान की सतह पर निर्मित एक गोम्पा है। इसे देख ऐसा प्रतीत होता है मानो यह गुरुत्वाकर्षण को चुनौती दे रहा है। मुझे अब भी स्मरण है, जब इस मठ पर मेरी प्रथम दृष्टि पड़ी थी, मारे अचरज के मेरा मुंह खुला का खुला ही रह गया था। कितने क्षण मैं अवाक् उसे निहारती रही। मुझे ऐसा आभास हो रहा था जैसे यह मठ अब उस चट्टान पर से गिर पड़ेगा। कुछ क्षणों पश्चात मेरी विवेक बुद्धि जागृत हुई तथा उसने मुझे यह स्मरण कराया कि यह मठ इसी स्थिति में सैकड़ों वर्षों से अबाधित खड़ा है।

धनकर मठ स्पिति घाटी हिमाचल
धनकर मठ स्पिति घाटी हिमाचल

गोलाकार घूमती संकरी सड़क अत्यंत सुरम्य प्रतीत हो रही थी। प्रत्येक घुमाव पर मठ अधिक समीप प्रतीत हो रहा था तथा पिन घाटी के परिदृश्य अधिक चौड़े होते जा रहे थे। नदी की कलकल करती जल वाहिकाएं अपने अपने राग आलाप रही थीं। जैसे जैसे हम ऊपर चढ़ रहे थे, हमारे चारों ओर के परिदृश्य अधिक विस्तृत एवं मनमोहक होते जा रहे थे।

धनकर मठ – हिमाचल प्रदेश

धनकर मठ की और जाते पथ
धनकर मठ की और जाते पथ

धनकर के अन्य नाम हैं, धनखर, द्रंगखर तथा धंगकर जिसका हिमाचली बोली में शाब्दिक अर्थ है, पहाड़ी चट्टान पर आरोहित गढ़। धनकर मठ स्पीति घाटी के ताबो एवं काजा कस्बों के लगभग मध्य में स्थित है। यहाँ पहुँचने के लिए लगभग ८ किलोमीटर का विमार्ग लेना पड़ता है किन्तु सड़क सुगम्य व अच्छी स्थिति में है। यदि आपका निजी वाहन अथवा टैक्सी हो तो आप आसानी से यहाँ पहुँच सकते हैं। मठ लगभग १३००० फीट की ऊँचाई पर स्थित है। यदि आपने स्वयं को समुद्र सतह से ऊँचाई वाले वातावरण से भली भांति अभ्यस्त ना किया हो तो आपको इस ऊँचाई पर श्वास लेने में किंचित असुविधा हो सकती है। साथ ही यह भी कहना चाहूंगी, मार्ग इतना मनोरम है कि वह अनायास ही आपको वाहन से उतर कर पदयात्रा करने के लिए बाध्य कर देता है।

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जिस दिन हम वहां थे, वर्षा हो रही थी। किन्तु जितने भी क्षणों के लिए वर्षा थम रही थी, हम तुरंत वाहन से उतर कर पैदल चलने लगते थे। वह अत्यंत ही मनोरम पदयात्रा थी मानो हम स्वप्न प्रदेश में पहुँच गए हों। एक ओर ऊँचे-नीचे पहाड़ थे तो दूसरी ओर शांत बहती नदी थी। सम्पूर्ण परिदृश्य हमारे लिए ही था। नवीन धनकर गोम्पा पहुँचने तक हमने सड़क पर क्वचित ही किसी मानवीय उपस्थिति का अनुभव किया। नवीन गोम्पा पहुंचकर ही हमने बौद्ध भिक्षुओं एवं गाँववासियों को देखा जो अपने दैनन्दिनी क्रियाकलापों में व्यस्त थे।

धनकर दुर्ग
धनकर दुर्ग

यह अत्यंत प्राचीन स्थल है किन्तु १७वीं सदी में इसकी महत्ता अपनी चरम सीमा पर थी जब यह स्थान यहाँ के शासक, नोनो राजाओं का राज दरबार था। धनकर गढ़ एवं मठ से ऊपर जाकर एक सरोवर भी है किन्तु वहां तक पहुँचने के लिए तीव्र चढ़ाई वाले मार्ग पर पैदल चढ़ना पड़ता है। इसलिए हमने सरोवर तक ना जाने का निश्चय किया तथा मठ से ही चारों ओर के मनमोहक परिदृश्यों में स्वयं को सराबोर करने में व्यस्त हो गए।

मठ की भंगुर संरचना

दलाई लामा के कक्ष का द्वार
दलाई लामा के कक्ष का द्वार

वर्षा के कारण मठ की ओर जाता कच्चा मार्ग अत्यंत फिसलन भरा हो गया था। एक बौद्ध भिक्षु ने हाथ बढ़ा कर हमें सावधानी से मठ के प्रवेश द्वार तक पहुँचाया। द्वार पर लिखा था कि एक समय में २० से अधिक दर्शनार्थियों को प्रवेश करने की अनुमति नहीं है क्योंकि मठ की संरचना अत्यंत भंगुर है तथा अधिक लोगों का भार वहन नहीं कर सकती। साथ ही ऐसे पर्चे भी चिपकाए गए थे जिनके द्वारा मठ को बचाने के लिए धन दान देने की याचना की गयी थी। पर्चों को देख ऐसा प्रतीत हो रहा था कि उन्हें शहर के किसी आधुनिक छपाई केंद्र में छापा गया है। किन्तु उन्हें यहाँ चिपकाने का औचित्य समझ में नहीं आया क्योंकि यहाँ अत्यंत सीमित संख्या में ही पर्यटक अथवा बाहरी व्यक्ति आते हैं। अन्यथा, बौद्ध भिक्षुक एवं गांववासी अपनी क्षमता के अनुसार मठ का रखरखाव कर ही रहे हैं।

साधना कक्ष
साधना कक्ष

सीढ़ियों द्वारा हम मठ के प्रथम तल पर पहुंचे। वहां मध्य में खुला प्रांगण था जिसके चारों ओर कक्ष बने हुए थे। एक कक्ष के भीतर कुछ बौद्ध भिक्षुक मंत्रोच्चारण कर रहे थे। अन्य कक्ष खुले हुए थे जिनका अवलोकन करने हम चल पड़े। प्रत्येक कक्ष के प्रवेश द्वार उत्कीर्णित थे। एक कक्ष सुन्दर कलाकृतियों से भरा हुआ था। मेरे अनुमान से विशेष उत्सवों व आयोजनों में उन कलाकृतियों का  उपयोग किया जाता होगा।

भेड़
भेड़

सीढ़ियों के अंत में एक पहाड़ी भेड़की खाल को भूसे से भरकर लटकाया गया था। मैं उस स्थान पर किंचित भयग्रस्त अनुभव कर रही थी। मुझे अपने चारों ओर तांत्रिक अनुष्ठानों की परंपरा का आभास हो रहा था। मैंने मठ की भित्तियों पर वैरोचन बुद्ध की प्रतिमा तथा अनेक थान्ग्का चित्र भी देखे।

पारंपरिक अर्चना की वस्तुएं
पारंपरिक अर्चना की वस्तुएं

एक कक्ष के भीतर कुछ स्तूप सदृश संरचनाएं थीं। कक्ष के चारों ओर की भित्तियों पर थान्ग्का चित्र थे। एक अन्य कक्ष में रंगबिरंगे ध्वज तथा संगीत के बड़े बड़े वाद्य रखे थे।

मठ की छत

धनकर मठ की छत से परिदृश्य
धनकर मठ की छत से परिदृश्य

मुझे मठ के छत की ओर जाती, भंगुर अवस्था में कुछ सीढ़ियाँ दिखाई दीं। मैं सोच रही थी कि उनके द्वारा छत तक जाऊं अथवा नहीं। मेरा मन मुझसे छत पर जाने के लिए कह रहा था किन्तु भिक्षुक मुझे ऐसा करने से रोक रहे थे। यहाँ सूचना पटल पर अंकित था कि एक समय में एक साथ ३ से अधिक व्यक्तियों को छत पर जाने की अनुमति नहीं है। इससे आप अनुमान लगा सकते हैं कि संरचना की अवस्था कितनी भंगुर होगी। उस पर, वर्षा के कारण फिसलने की आशंका अनेक गुना बढ़ गयी थी। सीढ़ियों के उस छोर पर छत की ओर खुलते छिद्र से मैंने आकाश को निहारा। आकाश पर घने मेघ छाये हुए थे। मैंने अपना मन बदल लिया। भिक्षुकों ने एक दूसरे को देख मंद हास्य द्वारा एक दूसरे से निशब्द संवाद साधा तथा अपने अपने कार्यों में पुनः रम गए।

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पिन एवं स्पीति नदियों के संगम का मनोहारी दृश्य

धनकर मठ से पिन नदी का दृश्य
धनकर मठ से पिन नदी का दृश्य

धनकर मठ के दर्शन के समय मेरा सर्वाधिक अविस्मरणीय स्थान था एक खिड़की, जहाँ से पिन नदी एवं स्पीति नदी का संगम दिखाई पड़ता है। यदि आप कुछ क्षणों के लिए यह भूल जाएँ कि आप एक कक्ष के भीतर बैठे हैं तथा खिड़की से अपने सर को किंचित बाहर निकालें तो आपको स्पीति घाटी के ऊपर उड़ते किसी पक्षी के समान प्रतीत होगा। उस समय मुझे यह समझ आया कि बौद्ध भिक्षुकों ने इस पहाड़ी चट्टान की तीव्र ढलुआ सतह पर मठ का निर्माण क्यों किया होगा। इससे उत्तम ऐसा कौन सा स्थान होगा जहां आप प्राकृतिक तत्वों के सुरक्षित होते हुए भी उनका भाग हो सकते हैं। इस खिड़की से बाह्य परिदृश्यों का अप्रतिम दृश्य दिखाई पड़ता है जिनकी सुन्दरता को शब्दों में बांधना मेरे लिए संभव नहीं है।

नवीन मठ

धनकर मठ का संगीत कक्ष
धनकर मठ का संगीत कक्ष

इस पहाड़ी चट्टान के तलहटी पर नवीन मठ स्थित है। अब इसी मठ में सभी धार्मिक अनुष्ठान किये जाते हैं। प्राचीन मठ अब एक ऐसी अनमोल संपत्ति है जहां वर्षों की पूजा-अर्चना की उर्जा संग्रहीत है। विश्व स्मारक कोष (World Monuments Fund) ने विश्व के १०० सर्वाधिक संकटग्रस्त स्मारकों में इस मठ को भी सम्मिलित किया है। मेरा प्रार्थना है कि आगे आने वाले अनेक युगों तक यह मठ संरक्षित रह सके ताकि अधिक से अधिक मनुष्य इसके दर्शन का लाभ उठा सकें।

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मठ के बाहर एक ग्रामीण संग्रहालय है। मैं जिस दिन वहां थी, उस दिन वह संग्रहालय बंद था। वापिस आने के पश्चात मैंने अनेक पर्यटकों के यात्रा संस्मरण पढ़े, किन्तु उन में से किसी ने भी उस संग्रहालय को खुला हुआ नहीं देखा है।

धनकर मठ तक की सड़क यात्रा का एक विडियो

मठ की ओर जाते समय मैंने चारों ओर के मनमोहक दृश्यों का यह विडियो लिया था। आप इसे अवश्य देखें।

मार्ग में हमने कुछ भरल को देखा जो नीले रंग की एक प्रकार की जंगली पर्वतीय भेड़ें हैं तथा हिमालयीन क्षेत्रों में पायी जाती हैं। पहाड़ों की सपाट पथरीली सतहों पर एक दूसरे के पीछे भागती नीली भेड़ें मानों पृथ्वी के रंग से एकाकार हो रही थीं।

स्पीति घाटी के विभिन्न दर्शनीय स्थलों के अवलोकन के पश्चात मुझे ऐसा प्रतीत हुआ कि यह मेरा सौभाग्य था जो मुझे इस प्रकार के स्थलों का अवलोकन करने तथा इसकी जादुई सुन्दरता में सराबोर होने का स्वर्णिम अवसर प्राप्त हुआ।

अनुवाद: मधुमिता ताम्हणे

2 COMMENTS

  1. अनुराधा जी,प्रकृति के सुरम्य वातावरण में स्पीति घाटी में स्थित सैकड़ों वर्षों पुराने धनकर बौद्ध मठ का बहुत ही सुंदर वर्णन । मठ के छायाचित्र और विडियो प्रत्यक्ष यात्रा करने की अनुभूति प्रदान करते हैं । धन्यवाद !

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