भारत के दो से अधिक नदियों के तट एवं संगम वाले अद्भुत नगर

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इंडीटेल यात्रा प्रश्नावली – नदियाँ एवं नगर

कुछ समय पूर्व हमने आपसे एक प्रश्न किया था, भारत में ऐसे कौन कौन से नगर हैं जिनमें एक से अधिक नदियाँ हैं। हमें इस प्रश्न के उत्तर में उत्तम प्रतिसाद मिला है। हमने आप सभी के उत्तरों को संकलित किया है तथा इस संस्करण की रचना की है। यह संस्करण उन भारतीय तटीय नगरों के विषय में है जो एक से अधिक नदियों द्वारा पोषित होते हैं।

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भारत के  नगर जन्हें एक से अधिक नदियों का वरदान प्राप्त है:

सदियों पूर्व अपनी बस्ती बसाने के लिए लोग नदी के तट का चयन करते थे क्योंकि जल हमारी मूलभूत आवश्यकता है। प्राचीन काल में जल के प्राकृतिक स्त्रोत ही उपलब्ध होते थे। इसी कारण भारत की लगभग सभी नदियों के तट पर बस्तियां बसी थीं जो अब फलफूल कर बड़े नगर बन गए हैं।

उन्ही के विषय में हमने आप से एक प्रश्न पूछा था कि भारत में ऐसे कौन कौन से नगर हैं जिनमें एक से अधिक नदियाँ हैं। आपके उत्तर के आधार पर हमने यह सूची बनाई है। इन्हें पढ़ने के पश्चात यदि आपको ऐसा लगे कि इसमें कुछ अन्य नगर भी सम्मिलित किये जाने चाहिए तो हमें अवश्य बताएं।

११. वाराणसी – वरुणा, असी एवं गंगा नदियाँ

वाराणसी में गंगा
वाराणसी में गंगा

भारत का ऐतिहासिक नगर, वाराणसी वास्तव में तीन-तटीय नगर है। अर्थात् यह तीन नदियों के तटों को छूता है। यूँ तो लोग वाराणसी को गंगा नदी के तट पर बसे नगर के रूप में ही अधिक जानते हैं। किन्तु हम में से अनेक इस ओर ध्यान नहीं देते कि वाराणसी नाम ही दो अन्य नदियों के नामों के संगम से बना है। वाराणसी के उत्तर की ओर स्थित वरुणा नदी जो आदिकेशव घाट पर गंगा नदी से मिलती है। वहीं दक्षिणी ओर असी नदी है जिसके नाम पर ही प्रसिद्ध असी घाट का नाम पड़ा है।

ये तीन नदियाँ एवं उनके घाट वाराणसी को वह अद्भुत नगर बनाते हैं जो तीन नदियों से घिरा हुआ है।

१०. पटना – गंगा, सोन एवं पुनपुन नदियाँ

पटना में गंगा
पटना में गंगा

मुझे केवल इतना ही ज्ञात था कि पटना नगरी गंगा के तट पर बसी है। प्रश्नावली के उत्तर में कुछ ने सोन नदी भी कहा। इस संस्करण को लिखते समय मैंने कुछ शोध किये तथा यह जानकारी प्राप्त की कि पटना की सीमा से लग कर दो नहीं, अपितु तीन नदियाँ बहती हैं। तीसरी नदी है, पुनपुन। ये तीन नदियाँ पटना को भी तीन नदियों से घिरा नगर बनाते हैं।

सोन नदी एवं पुनपुन नदी पटना आकर गंगा से मिल जाती हैं।

इस तथ्य को सम्मुख लाने के लिए आदिवर्हा का अनेक धन्यवाद।

९. हैदराबाद – मुसी एवं एसी नदियाँ

मैं हैदराबाद में रह चुकी हूँ। हैदराबाद में घूम चुकी हूँ। मुसी नदी को तो मैंने सैकड़ों बार पार किया होगा। किन्तु मुझे यह ज्ञात नहीं था कि मुसी नदी की एक सहायक नदी भी है जिसका नाम एसी नदी है तथा जो हैदराबाद नगरी में ही मुसी नदी से मिलती है।

हैदराबाद में मूसी और ऐसी
हैदराबाद में मूसी और ऐसी

वृजिलेश का मैं धन्यवाद करती हूँ जिसने हमें हैदराबाद के विषय में यह जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि एसी नदी हिमायत सागर से आती है तथा मुसी नदी गंडिपेट से। लंगर हाउस के समीप बाबूघाट संगम पर मुसी नदी एवं एसी नदी एक दूसरे से मिलती हैं।

मेरी अगली हैदराबाद यात्रा में मैं इस घाट के दर्शन अवश्य करूँगी।

मुसी के विषय में मुझे एक अन्य तथ्य भी ज्ञात हुआ कि यह नदी अनंतगिरी पहाड़ों से निकलती है तथा इसका प्राचीन नाम मुचिकुंडा था। किवदंतियों के अनुसार मुचुकुंडा इक्ष्वाकु वंश का वंशज था अथवा यह कहा जाए कि सूर्यवंशी भगवान राम के ही वंश का था। ऐसा माना जाता है कि वह अनंतगिरी पहाड़ों में निद्रामग्न है। उसी के नाम पर नदी का नाम मुचिकुंडा पड़ा।

८. पुणे – मुला, मुठा एवं पवना नदियाँ

पुणे में दो नदियाँ हैं, मुला एवं मुठा। जो भी पुणे गया है उसे यह ज्ञात ही होगा। इसीलिए मैंने पुणे को दो नदियों वाले नगरों की सूची में डाला था।

पुणे में मुला-मूठा
पुणे में मुला-मूठा

किन्तु जब मैं इस संस्करण को लिखने के लिए शोध कर रही थी तथा विभिन्न साहित्य पढ़ रही थी तब मुझे ज्ञात हुआ कि पुणे में तीसरी नदी भी है जिसका नाम है, पवना। मुला नदी पवना नदी से उसके बाएं तट पर मिलती है तथा मुठा नदी उसके दाहिने तट पर, जो आगे जाकर मुला-मुठा नदी बन जाती है। तीनों नदियाँ पश्चिमी घाटों से निकलती हैं।

मुला-मुठा नदी सहायक नदियों की उस श्रंखला का एक भाग हैं जो आगे जाकर कृष्णा नदी में समा जाती हैं। तत्पश्चात सभी बंगाल की खाड़ी से जा मिलती हैं।

७. प्रयागराज – गंगा, यमुना एवं सरस्वती नदियाँ

मेरी प्रश्नावली के प्रत्युत्तर में अधिकाँश लोगों ने प्रयाग का नाम सुझाया था। सभी जानते हैं कि प्रयाग में गंगा एवं यमुना का संगम है। कुम्भ मेले ने भी इस तथ्य को अधिकतम लोगों तक पहुँचाने में बड़ी भूमिका निभाई है। यहाँ संगम का भी अपना स्वयं का नाम है, त्रिवेणी संगम। इसका अर्थ है तीन नदियों का संगम।

प्रयाग में गंगा, यमुना, सरस्वती
प्रयाग में गंगा, यमुना, सरस्वती

गंगा एवं यमुना दोनों दृश्य नदियाँ हैं तथा तीसरी नदी, सरस्वती नदी अदृश्य है। सरस्वती नदी के अस्तित्व पर अनेक वैज्ञानिकों ने प्रश्न उठाये हैं किन्तु आस्था रखने वालों के भीतर ये सदा जीवित रहेगी।

६. कटक – महानदी एवं उसकी अनेक वितरिकाएं

कटक की स्थिति अनोखी है। एक ओर जहां अन्य नगरों में नदियों का संगम होता है, कटक ऐसा नगर है जहां महानदी अनेक भागों में विभक्त होकर शाखा नदियाँ या वितरिकाएं बनाती है। उन वितरिकाओं में अधिकतर नदियाँ कटक नगर से होकर जाती हैं। इन वितरिकाओं के नाम हैं, महानदी, काठजोड़ी, कुआखाई तथा बिरुपा। काठजोड़ी आगे जाकर देवी एवं बिलुआखाई नदियों में विभक्त होती है।

कट्टक में महानदी
कट्टक में महानदी

काठजोड़ी का अर्थ है, काठ के फलक से जोड़ा हुआ। हो सकता है कि किसी काल में इस नदी के ऊपर लकड़ी का सेतु रहा होगा या इस नदी को एक लकड़ी के फलक की सहायता से पार किया जाता होगा।

५. देवप्रयाग – भागीरथी, अलकनंदा एवं गंगा नदियाँ

देवप्रयाग के विषय में हम सब ने सुना है किन्तु हम में से अनेक की इस हिमालयी नगर में पहुँचने की अभिलाषा कदाचित अब तक पूर्ण ना हुई हो।

देवप्रयाग में अलकनंदा एवं भागीरथी
देवप्रयाग में अलकनंदा एवं भागीरथी

गंगोत्री में गंगा को भागीरथी कहते हैं। देवप्रयाग में अलकनंदा नदी एवं भागीरथी नदी का संगम होता है जो गंगा नदी बनकर आगे जाती है।

इससे पूर्व ४ अन्य नदियाँ गंगा में समाहित होती हैं, धौलीगंगा, नंदाकिनी, पिंडार एवं मन्दाकिनी। इन्हें मिलाकर कुल पांच नदियों का संगम अलकनंदा में होता है जिसे पंच प्रयाग कहते हैं।

४. चेन्नई – अड्यार एवं कूउम नदियाँ

मुझे केवल अड्यार नदी के विषय में ही जानकारी थी। कूउम नदी के विषय में मुझे इस प्रश्नावली पर संस्करण बनाते समय ही प्राप्त हुई थी। ये दोनों छोटी नदियाँ हैं जिनका उद्गम चेन्नई से लगभग १०० किलोमीटर की दूरी पर है।

चेन्नई में अड़यार नदी
चेन्नई में अड़यार नदी

कूउम नदी को ट्रिप्लिकेन नदी भी कहते हैं। कूउम शब्द का सम्बन्ध कूपं शब्द से है जिसका अर्थ कुआं होता है।

चेन्नई की नदियों के विषय में यहाँ पढ़ें।

चेन्नई की नदियों के विषय में यह जानकारी अनंत रुपनगुडी से प्राप्त हुई है। चित्र – श्रीनिधि हंडे।

३. नासिक – गोदावरी एवं दाराणा नदियाँ

हम सब यह जानते हैं कि कुम्भ मेले का एक आयोजन स्थल नासिक भी है जहां इसे गोदावरी नदी के तट पर आयोजित किया जाता है। पर क्या आप जानते हैं कि वहां दाराणा नाम की भी एक नदी है जो नासिक नगर को छूती हुई जाती है?

नासिक में गोदावरी
नासिक में गोदावरी

विकिपीडिया के अनुसार नासिक में इनके अतिरिक्त भी अनेक नदियाँ हैं जो नासिक से होकर बहती हैं, जैसे वैतरणा, भीमा, गिरणा एवं काश्यपी नदियाँ। किन्तु मैं इनकी पुष्टि नहीं कर पायी हूँ। आशा है आप में से नासिक में रहने वाले किसी पाठक से मुझे इस विषय में अधिक जानकारी मिले।

नासिक की नदियों के विषय में जानकारी देने के लिए सचिन पाटिल का धन्यवाद।

२. पणजी – मांडवी एवं जुआरी नदियाँ

पणजी में मांडवी
पणजी में मांडवी

गोवा की राजधानी पणजी दो नदियों के मध्य बसी हुई है, मांडवी नदी एवं जुआरी नदी। पणजी के दोनों ओर से आते हुए, ये दोनों नदियाँ आगे जाकर अरब महासागर में मिल जाती हैं। मांडवी नदी पर्यटकों की नौकाओं एवं कैसिनो नौकाओं से भरी एक उल्लासपूर्ण नदी है। वहीं जुआरी नदी कोलाहल से दूर, अत्यंत शांत नदी है तथा अपेक्षाकृत अधिक चौड़ी है।

भारत में नदियों के तट पर एवं संगम पर अनेक प्राचीन नगर बसे हैं। इसमें तनिक भी आश्चर्य नहीं है कि इसी कारण हम संगम को अत्यंत पवित्र मानते हैं तथा उसकी आराधना करते हैं। उन्होंने ही सदियों से हमारा पालन-पोषण किया है।

. भारत के अन्य नगर जहां एक से अधिक नदियों के तट हैं

ये सूची भारत के उन छोटे नगरों की है जहां एक से अधिक नदियों के तट हैं।

  • तमिल नाडू में श्रीरंगम – कावेरी एवं कोल्लिदम नदियों के मध्य स्थित है।
  • तमिल नाडू में करुर – कावेरी एवं अमरावती नदियों के तटों पर बसा हुआ है।
  • आन्ध्र प्रदेश में कुरनूल – तुंगभद्र, नीव एवं हुन्द्री नदियों के तट
  • महाराष्ट्र में कराड – कृष्णा एवं कोयना नदियाँ
  • कर्नाटक में मंगलुरु – नेत्रवती एवं गुरुपुरा की अप्रवाही नदियाँ

यदि आप ऐसे भारतीय नगरों के विषय में जानते हैं जो एक से अधिक नदियों के तट पर या संगम पर बसे हैं तथा जिन्हें इन सूची में सम्मिलित नहीं किया गया है तो उनके विषय में टिप्पणी खंड में अवश्य लिखें। मैं संस्करण में उनका भी उल्लेख करना चाहूंगी।

लद्धाख में सिन्धु जांसकर का संगम
लद्धाख में सिन्धु जांसकर का संगम

इस संस्करण की रचना करते समय मेरे लिए सबसे बड़ी सीख यह थी कि गूगल मानचित्र केवल बड़ी नदियाँ दर्शाता है। उसमें छोटी नदियों का उल्लेख बहुधा नहीं मिलता है। अब मुझे A History of World in 12 Maps इस पुस्तक में लिखे जेरी ब्रोट्टन के कथन का अर्थ समझ में आता है।

आप सब ने इस प्रश्नावली में जिस उत्साह से भाग लिया, उसके लिए मैं आप सब का धन्यवाद करना चाहती हूँ। संस्करण के अंत में पुनः इस तथ्य को दुहराना चाहती हूँ कि सभी बड़ी नदियाँ अनेक सहायक नदियों के संगम से ही बनती हैं।

अनुवाद: मधुमिता ताम्हणे

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