जयपुर के आसपास के स्थल- १० सर्वोत्कृष्ट एक-दिवसीय भ्रमण

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जब जयपुर में ही इतना कुछ दर्शनीय है तो जयपुर के आसपास के दर्शनीय स्थलों की खोज हम क्यों करें? यही सोच रहे हैं न आप? आपका संशय तर्कसंगत अवश्य प्रतीत होता है। किन्तु तनिक प्रतीक्षा कीजिये। मुझे उन स्थलों के विषय में उल्लेख करने दीजिये जिनकी उत्कृष्टता भले ही जयपुर से अधिक ना हो, किन्तु उससे न्यून भी नहीं है। इन्हें आप जयपुर से दिवसीय यात्रा के रूप में पूर्ण कर जयपुर वापिस आ सकते हैं।

जयपुर के आस पास पर्यटन स्थल सोने पर सुहागा यह कि ऐसी यात्रायें महानगरों की भीड़भाड़ से दूर, राजस्थान के ग्रामीण एवं प्राकृतिक सौंदर्य से हमारा परिचय कराती हैं। जब आप सूर्यमुखी के चटक पीले रंग के खेतों के मध्य से जाती सड़कों से जायेंगे, आप सोच में पड़ जायेंगे कि क्या राजस्थान में ऐसे भी स्थल होंगे जहां रंगों की रागिनी ना छिड़ी हो?

जयपुर के आसपास दर्शनीय स्थल – जयपुर से दिवसीय भ्रमण

जयपुर के निकट स्थित ऐसे दर्शनीय स्थलों की सूची यहाँ प्रस्तुत कर रही हूँ जिन्हें आप, जयपुर में पड़ाव डालकर, दिन में ही देखकर वापिस आ सकते हैं। आईये आप भी जयपुर आने की योजना बनाईये!

आभानेरी की चाँद बावडी – जयपुर से एक-दिवसीय यात्रा

आभानेरी की मनमोहक चाँद बावड़ी
आभानेरी की मनमोहक चाँद बावड़ी

जयपुर से आगरा की ओर, लगभग ९० की.मी. की दूरी पर यह अद्भुत नगरी आभानेरी स्थित है। अतः यदि आप दिल्ली-आगरा-जयपुर की स्वर्णिम त्रिकोणीय यात्रा पर हैं तो एक छोटा सा विमार्ग लेकर आप आभानेरी जा सकते हैं। यूँ तो आपने भारत की कई बावड़ियाँ देखी होंगी, किन्तु मेरा पूर्ण विश्वास है कि उनमें से कोई भी इतना छायाचित्रण योग्य नहीं होगा जितना कि यहाँ स्थित चाँद बावडी! यह एक अत्यंत सुगठित एवं गहरी बावड़ी है। इसके तीन ओर अत्यंत आकर्षक ज्यामितीय सीड़ियाँ बनी हुई हैं तथा चौथी सतह पर एक उत्कीर्णित मंडप है।

हर्षद माँ को समर्पित एक मंदिर तथा सम्पूर्ण परिसर में फैली हुई शिल्पकारियों को भी देखना ना भूलें।

और पढ़ें: चाँद बावड़ी आभानेरी की विलक्षण बावड़ी

जयपुर से चाँद बावड़ी के दर्शन करने के लिए लगभग ६-७ घंटों का समय लग सकता है। जयपुर से आने व जाने में लगभग २ घंटे तथा बावड़ी देखने के लिए कुछ घंटे पर्याप्त हैं। खेतों में से जाते हुए इन लहलहाते खेतों एवं उनमें खेती कार्य करते, चटक रंग बिरंगे वस्त्र धारण किये स्त्री-पुरुषों को भी देखना ना भूलें।

भानगढ़ दुर्ग

जयपुर के आप पास - भानगढ़ दुर्ग
भानगढ़ दुर्ग

जब आप इन्टरनेट पर विश्व के सर्वाधिक भुतहा स्थान की खोज करें तो भानगढ़ दुर्ग का नाम सर्वप्रथम उभर कर आता है। चूंकि दिन के समय यह स्थान स्थानीय, देशी एवं विदेशी पर्यटकों से भरा रहता है, अतः भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। संध्या उपरांत यहाँ भ्रमण की अनुमति नहीं है। कई जीवंत मंदिरों एवं जल स्त्रोतों से भरा हुआ यह स्थान अत्यंत आकर्षक है। यद्यपि अधिकतर संरचनाएं खँडहर में परिवर्तित हो गए हैं, तथापि इन संरचनाओं का सम्पूर्ण प्रलेखन उपलब्ध है। इन्हें पढ़कर आप कल्पना कर सकते हैं कि अपने जीवंत काल में यह गढ़ कितना संपन्न रहा होगा।

भानगढ़ जयपुर से लगभग ८० की.मी. की दूरी पर है। आगरा राजमार्ग द्वारा दौसा पहुँचने के पश्चात भानगढ़ की ओर जाते विमार्ग पर जाएँ। राजमार्ग के पश्चात मार्ग अतिउत्तम भले ही ना हो, किन्तु यह बुरा भी नहीं है।

यदि भुतहा स्थल अधिकतर लोगों के समान आपको भी रोमांचित करते हैं, तो भानगढ़ को अपने जयपुर यात्रा की कार्यक्रम सूची में अवश्य सम्मिलित करें।

यदि आपकी भानगढ़ का सूक्ष्मता से अवलोकन करने की इच्छा है, पहाड़ी चढ़ने एवं उतरने की इच्छा है अथवा इसके मन्दिरों का आनंद उठाने की इच्छा है तो ३-४ घंटे का समय आवश्यक है। इसमें छायाचित्रण का समय भी सम्मिलित है।
मेरा सुझाव है कि आप प्रातःकाल जलपान ग्रहण कर एवं दोपहर का भोजन साथ ले कर जयपुर से निकलें। भानगढ़ का दर्शन करें, तत्पश्चात संध्या जलपान के समय तक वापिस जयपुर लौट आयें।

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सुझाव – यदि आप प्रातः शीघ्र ही जयपुर की ओर प्रस्थान करें तो भानगढ़ के साथ चाँद बावडी भी देख सकते हैं।

सामोद महल

समोद महल का दरबार
समोद महल का दरबार

राजस्थान के सर्वाधिक उत्कृष्ट स्थलों में से एक है यह सामोद महल। अत्यंत उत्तम रीति से इसका रखरखाव किया जाता है। एक निर्देशित भ्रमण हमें सम्पूर्ण महल की यात्रा कराता है। एक कक्ष से दूसरे कक्ष में जाते, रंगबिरंगी भित्तियों एवं उन पर की गयी सूक्ष्म चित्रकारियों को देख आपकी आँखे फटी कि फटी रह जायेंगीं। प्रत्येक भित्ति की नामूनेदार पृष्ठभूमि पर कुछ कांच का कार्य तथा कुछ चित्रकारियाँ हैं। इन भित्तियों की सुन्दरता आपको मंत्रमुग्ध कर देंगीं। इन चित्रकारियों में पौराणिक कथाओं एवं दैनन्दिनी जीवन के चित्रण के साथ राजसी परिवारों के चित्र प्रमुखता से हैं। प्रत्येक कक्ष का अपना एक रंग है, एक में लाल तो दूसरे में नीला।

इस महल की सुन्दरता को देख आप इन रंगों एवं इसकी समृद्धी में सराबोर हो जायेंगे। मैं जब भी किसी महल अथवा दुर्ग के खँडहर देखती हूँ, मेरे मष्तिष्क में एक सवाल सदैव कौंधता है। अपने जीवंत दिवसों में ये महल अथवा दुर्ग कितने समृद्ध एवं सुन्दर दिखाई देते होंगे। मुझे मेरे इस प्रश्न का उत्तर सामोद महल में प्राप्त हुआ। यदि कुछ सदियों पूर्व हमारा भारत ऐसा दिखता था तो मैं अवश्य यह आशा करूंगी कि भारत की खोयी हुई समृद्धि एवं सौंदर्य शीघ्र पुनः प्राप्त हो।

महल पहुँचने से पूर्व आपको कई रंगबिरंगी हवेलियाँ दृष्टिगोचर होंगीं। आगे जाकर आप एक ड्योढ़ी पर पहुंचेंगे जहां कई विंटेज कारें रखी हुई हैं। वहां से राजस्थानी वेशभूषा पहने, रौबदार मूंछों वाले एक सज्जन आपको सीड़ियों से ऊपर ले जायेंगे। वे आपको सम्पूर्ण महल दिखाएँगे तथा इसके विषय में जानकारी देंगे। तत्पश्चात यहाँ के जलपानगृह में आप भोजन करेंगे।

सामोद गाँव में स्थित यह एक निजी महल है जो जयपुर से लगभग ४५ की.मी. की दूरी पर है। यह संस्मरण लिखते समय तक इसका प्रवेश शुल्क १०००/- रुपये था जिसमें भोजन का खर्च सम्मिलित था।

सीकर जिले के खाटू गाँव का खाटू श्याम

खाटू का श्याम कुंड - जयपुर के आसपास
खाटू का श्याम कुंड

खाटू एक छोटी देवनगरी है जो खाटू श्याम जी के मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। सीकर जिले में स्थित यह नगरी जयपुर से उत्तर-पश्चिम दिशा में लगभग ८० की.मी. दूर है। यदि आप महाभारत एवं उनके चरित्रों में रूचि रखते हैं तो यह एक अद्वितीय मंदिर है जिसके दर्शन आपने अवश्य करने चाहिए। यह बर्बरीक को समर्पित मंदिर है। यह नाम यदि आपके लिए नवीन है तो आपको जानकारी दे दूं कि बर्बरीक पांडू पुत्र भीम का पोता एवं घटोत्कच का पुत्र है।

यूँ तो यह एक अनूठा मंदिर है, इससे सम्बंधित ऐतिहासिक मान्यताएं एवं किवदंतियां इसे अद्वितीय बनाती हैं। बर्बरीक को ‘हारे का सहारा’ अथवा हारे हुए लोगों का देवता माना जाता है। माँ आदिशक्ति की घोर तपस्या कर उन्होंने तीन अभेद बाण एवं ईशापुर्तिक वाल्मीकि को प्रसन्न कर उनसे धनुष प्राप्त किया था। वर्तमान में इस धनुष एवं त्रिबाण के सांकेतिक प्रतिरूप नगरी में सर्वत्र दृष्टिगोचर होते हैं।

और पढ़ें: खाटू श्याम – हारे का सहारा

यदि आप प्रातः शीघ्र प्रस्थान करें तथा सर्वप्रथम खाटू श्याम मंदिर के दर्शन करें तो आप खाटू श्याम एवं समोद महल के दर्शन एक ही दिवस पूर्ण कर सकते हैं। दोपहर के पश्चात जब मंदिर बंद हो जाता है, तब आप समोद महल देख सकते हैं।

सांभर झील

सांभर झील में नमक की खेती
सांभर झील में नमक की खेती

सांभर झील अथवा शाकम्भरी झील भारत की विशालतम नमकीन जल की झील है। इस झील से प्राप्त नमक भारत के विशालतम राज्य, राजस्थान में नमक की सम्पूर्ण आवश्यकता की पूर्ति करता है। झील के आसपास पक्षियों एवं कीटों की कई प्रजातियाँ पायी जाती हैं। मानसून के समय यहाँ फ्लेमिंगो अर्थात् राजहंस भी दिख जाते हैं।

मेरे लिए इस झील का एक अन्य महत्व यह भी है कि इस स्थल का उल्लेख महाभारत जैसे महाकाव्य में भी पाया जाता है। इसी स्थान में शाकम्भरी देवी का मंदिर भी है। शाकम्भरी देवी राजस्थान के राजपूतों के चौहान वंश की अधिष्ठात्री देवी है।

पुरातात्विक दृष्टि से भी इसका अत्यंत महत्व है क्योंकि इस स्थान पर नालियासर नामक प्राचीन स्थल है। आप तो जानते ही हैं कि प्राचीन स्थल मुझे अत्यंत आकर्षित करते हैं। किन्तु सांभर झील पर मुझे कुछ ही क्षण व्यतीत करने का अवसर प्राप्त हुआ था। अतः इस प्राचीन स्थल का विस्तृत अवलोकन अभी शेष है।

सांभर झील जयपुर के दक्षिण पश्चिम दिशा में लगभग ९५ की.मी. की दूरी पर स्थित है। मेरे अनुमान से प्रातः मुँह अँधेरे जयपुर से निकल सर्वप्रथम झील के आसपास पक्षियों को खोजें। तत्पश्चात झील एवं विरासती धरोहर का अवलोकन करें। यदि आप शान्ति से, बिना हड़बड़ी के भी इन्हें देखें तो सांभर झील एवं इसकी धरोहर को निहारने में एक सम्पूर्ण दिवस पर्याप्त है।

सांगानेर – वस्त्र उद्योग की नगरी

जयपुर के आसपास दो वस्त्र-उद्योग नगरी हैं, सांगानेर एवं बगरू। सांगानेर जयपुर से लगभग १५-२० की.मी. दूर है।

सांगानेर और बगरू में कपडे छपाई का काम
सांगानेर और बगरू में कपडे छपाई का काम

यदि आप भारतीय वस्त्रों, विशेषतः राजस्थानी ठप्पा छपाई के वस्त्रों में रूचि रखते हैं तो आपने सांगानेर एवं बगरू, इन दो ठप्पा छपाई के प्रकारों के विषय में अवश्य सुना होगा। जैसे आन्ध्र प्रदेश के कुचिपुड़ी गाँव से कुचिपुड़ी नृत्य के नाम की व्युत्पत्ति हुई है, ठीक वैसे ही सांगानेर नगरी के नाम पर सांगानेरी छपाई का नाम पड़ा। अब इसे जीआई टैग अर्थात् भौगोलिक संकेत भी प्राप्त हो गया है। सांगानेर हस्तनिर्मित कागज उद्योग के लिए भी प्रसिद्ध है।

सांगानेर जैन धर्म के अनुयायियों का तीर्थ स्थल है। यहां कई प्राचीन जैन मंदिर हैं। राजस्थान के रणकपुर एवं दिलवाड़ा मंदिर जैसे जैन मंदिर अपने सूक्ष्म शिल्पकारियों के लिए अत्यंत प्रसिद्ध हैं। सांगानेर में मंदिर लाल बलुआ पत्थर से बने हैं।

सांगानेर की ठप्पा छपाई अपने उत्कृष्ट नमूनों एवं रूपरेखा के लिए प्रसिद्ध है। कई वर्षों पूर्व मैंने सांगानेर का भ्रमण किया था। उस समय मैंने वहां से ठप्पा छपाई से सजी चादरें खरीदी थीं जिसका उपयोग मैं आज भी करती हूँ। यदि आपको ठप्पा छपाई से अलंकृत चादरें अथवा कपड़े पसंद हैं तो इनकी खरीदी हेतु सर्वोत्तम स्थल सांगानेर ही है जहां आप खरीदी के साथ साथ छपाई का कार्य भी प्रत्यक्ष देख सकते हैं।

बगरू – वस्त्र एवं चमड़ा उद्योग नगरी

चमड़े की रंगीन चप्पलें
चमड़े की रंगीन चप्पलें

बगरू भी सांगानेर के सामान हस्त छपाई के कार्य के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन उनमें एक विशेष अंतर है। वह अंतर है उनकी रूपरेखा व आकृतियों में जो सांगानेर से भिन्न हैं। यहाँ नील के रंग एवं पुष्पाकृतियों का प्रयोग बहुतायत में किया जाता है। बगरू चमड़े के लघु उद्योग के लिए भी जाना जाता है। अतः चमड़े से बनी वे रंगबिरंगी जुत्तियाँ एवं थैलियाँ जिन्हें आप जयपुर स्मारिकाओं के रूप में खरीदते हैं, कदाचित वे बगरू में ही निर्मित की गयी हों।

यदि आप इन वस्त्र एवं चमड़ा उद्योग में कार्यरत कारीगरों से भेंट करना चाहते हों तो बगरू से उत्तम स्थान कोई नहीं।
अन्य प्राचीन नगरियों के सामान बगरू में भी एक दुर्ग है, किन्तु यह एक निजी दुर्ग है। केवल कुछ त्योहारों में ही इसे जनता के किये खोला जाता है।

बगरू जयपुर से ३२ की.मी दूर है। यहाँ आप कितना समय व्यतीत करते हैं, यह आपके ऊपर निर्भर है।

सुझाव – जयपुर से एक-दिवसीय यात्रा के रूप में आप सांगानेर एवं बगरू के दर्शन एक ही दिवस में पूर्ण कर सकते हैं।

आमेर दुर्ग एवं नगरी

आमेर दुर्ग का गणेश पोल
आमेर दुर्ग का गणेश पोल

जो भी यात्री जयपुर के आसपास भ्रमण के लिए आते हैं, उनमें अधिकतर यात्री आमेर दुर्ग के दर्शन भी अवश्य करते हैं। इस दुर्ग के विषय में कई कथाएं एवं मान्यताएं प्रसिद्ध हैं। प्रशिक्षित गाइड आपको कई कथाएं सुनाएगा। किन्तु मुझे इन कथाओं का अधिक आनंद प्राप्त हुआ संध्याकाल में आयोजित प्रकाश एवं ध्वनी कार्यक्रम में जिसका आयोजन दुर्ग के भीतर किया जाता है। अन्धकार में प्रकाश का अद्भुत प्रयोग कर,लोक संगीत से ओतप्रोत ये कथाएं आमेर दुर्ग स्वयं आपको सुनाती है।

और पढ़ें: जयपुर के आमेर दुर्ग का वैभव

जब आप आमेर दुर्ग की प्राचीर से नीचे देखेंगे, आपको कई मंदिरों के ऊंचे ऊंचे शिखरों से भरा आमेर नगर दृष्टिगोचर होगा। गाइड ने हमें बताया कि आमेर में ३६५ मंदिर हैं, वर्ष के प्रत्येक दिवस हेतु एक मंदिर। कहने का अर्थ है मंदिरों से भरा यह एक प्राचीन नगर है।

आमेर की सड़कों पर चलकर आप चँवर पालखीवालों की हवेली पहुंचेंगे। वर्तमान में इस हवेली का जीर्णोद्धार किया गया है। इस हवेली में ‘अनोखी संग्रहालय’ है जहां भारत के कई भागों के, मुख्यतः राजस्थान के वस्त्र उद्योग एवं उनकी परंपराओं का प्रदर्शन किया गया है। इन वस्त्रों से आप इनको धारण करने वाली स्त्रियों के विषय में जान सकते हैं। जैसे यह स्त्री विवाहित, अविवाहित अथवा विधवा है। इस धरोहरी विरासत का किस प्रकार पुनर्नवीनीकरण किया गया, इस सम्पूर्ण प्रक्रिया का भी उत्कृष्ट प्रकार से प्रदर्शन किया गया है। इसकी वर्तमान संरचना एवं नवीनीकरण के विभिन्न चरणों को समझना अत्यंत आनंददायी है। यद्यपि यहाँ की सीड़ियाँ अब भी उतनी ही ऊंची हैं जैसी की पूर्व में थीं।

अजमेर

अजमेर का जैन लाल मंदिर
अजमेर का जैन लाल मंदिर

अजमेर जयपुर से सड़क मार्ग द्वारा लगभग १२० की.मी. दूर है। यहाँ पहुँचने में लगभग २ घंटों का समय लगता है। यद्यपि आप जयपुर में रहते हुए अजमेर की एक-दिवसीय यात्रा कर सकते हैं, तथापि इसके विस्तृत अवलोकन के लिए मेरा सुझाव यही होगा कि आप अजमेर अथवा पुष्कर में ठहरें।

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अधिकतर पर्यटकों की अजमेर यात्रा केवल दरगाह तक ही सीमित होती है, किन्तु मैंने अजमेर में देखने एवं अनुभव करने हेतु कई अन्य स्थल खोज निकाले। इनमें दो सुन्दर झीलें तथा एक अद्भुत सौन्दर्ययुक्त जैन मंदिर, सोनीजी की नसिया, सम्मिलित हैं। इस जैन मंदिर में ब्रम्हांड के प्रतिरूप की रचना भी की गयी है।

पुष्कर – पवित्र झील की नगरी

प्रसिद्द एवं प्राचीन पुष्कर झील
प्रसिद्द एवं प्राचीन पुष्कर झील

अनेक मंदिरों एवं प्रसिद्ध पुष्कर झील की नगरी, पुष्कर भी आपके एक दिवस का अधिकारी अवश्य है। यद्यपि आप अजमेर एवं पुष्कर दोनों को एक साथ, एक-दिवसीय यात्रा के रूप में कर सकते हैं, तथापि न्यायसंगत पुष्कर यात्रा करने के लिए इसे अकेले ही, जयपुर से एक-दिवसीय यात्रा के रूप में भ्रमण कर, देख सकते हैं।

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इन स्थलों के अतिरिक्त आप अलवर एवं रणथंबौर का भी जयपुर से एक-दिवसीय यात्रा के रूप में भ्रमण कर सकते हैं। यद्यपि मैं इन दोनों स्थलों के दर्शन दो भिन्न दिवसीय यात्रा के रूप में पूर्ण करना चाहूंगी।

क्या आप जयपुर के आसपास इनके अतिरिक्त किसी अन्य एक-दिवसीय भ्रमण के विषय में जानते हैं?

यदि आप जयपुर के आसपास किसी अन्य पर्यटन स्थल के विषय में जानते हैं जिसे जयपुर में ठहर कर एक-दिवसीय यात्रा के रूप में पूर्ण किया जा सकता है? मैं उनके विषय में जानने हेतु अतिउत्सुक हूँ।

अनुवाद: मधुमिता ताम्हणे

4 COMMENTS

  1. बहुत ही सुंदर स्थलों का अतिसुन्दर चित्रण इन 10 पर्यटन स्थल में से 3 तो मैं भी गया हूं अब पड़ने के बाद कुछ जगह छूटने का अफसोस है लेकिन आपकी इस बात से मैं भी सहमत हूं। *मैं जब भी किसी महल अथवा दुर्ग के खँडहर देखती हूँ, मेरे मष्तिष्क में एक सवाल सदैव कौंधता है। अपने जीवंत दिवसों में ये महल अथवा दुर्ग कितने समृद्ध एवं सुन्दर दिखाई देते होंगे। मुझे मेरे इस प्रश्न का उत्तर सामोद महल में प्राप्त हुआ। यदि कुछ सदियों पूर्व हमारा भारत ऐसा दिखता था तो मैं अवश्य यह आशा करूंगी कि भारत की खोयी हुई समृद्धि एवं सौंदर्य शीघ्र पुनः प्राप्त हो।* 🙏🙏

    • संजय जी, आपके मुहं में घी शक्कर, आशा है आपके हमारे जीवनकाल में ही समृद्धि देखने को मिले 🙂

  2. अनुराधा जी,गुलाबी नगरी जयपुर के आसपास के दर्शनीय स्थलों का बेहद सुंदर शब्द चित्रण ! इन प्राचीन ऐतिहासिक स्थलों की वास्तुकला अद्भुत हैं । भारत भर में फैली इन अद्भुत प्राचीन विरासतों को विलुप्त होने से बचाने के लिये इनकी सुरक्षा तथा रखरखाव की जिम्मेदारी शासन के साथ साथ हमारी भी हैं ।सुंदर आलेख हेतू साधुवाद !

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