नवाबगंज पक्षी अभयारण्य- लखनऊ कानपुर महामार्ग पर

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1970

मैं जब लखनऊ से बिठूर तक की यात्रा का नियोजन कर रही थी, मेरी दृष्टी गूगल मानचित्र पर दर्शाए गए नवाबगंज पक्षी अभयारण्य पर पड़ी। मैंने मानचित्र का विस्तार कर उसे सूक्ष्मता से निहारा। मुझे वहां एक विशाल जलाशय दृष्टिगोचर हुआ। मैंने अनुमान लगाया कि इतने विशाल जलाशय में विभिन्न प्रजातियों के अनेक पक्षी होंगे। मैंने निश्चय किया कि बिठूर से वापिस आते समय यदि समय उपलब्ध हो तो मैं वहां अवश्य जाउंगी।

नवाबगंज पक्षी अभ्यारण्य की आर्द्र भूमि
नवाबगंज पक्षी अभ्यारण्य की आर्द्र भूमि

कालांतर में मुझे अपने इस निश्चय पर अत्यंत संतुष्टि हुई। मुझे प्रसन्नता है कि हम उस पक्षी अभयारण्य में गये। थके हुए होने के पश्चात भी हमने अभयारण्य के भीतर लगभग ४ से ५ किलोमीटर की पदयात्रा की थी। उस पदयात्रा ने हमारी सम्पूर्ण थकान मिटा दी थी। वह पदयात्रा अत्यंत स्फूर्तिदायक व आनंदित करने वाली यात्रा थी। रविवार का दिन होने के पश्चात भी वहां गिने-चुने पर्यटक ही थे। टिकट खिड़की पर हमें पर्यटकों के कुछ समूह अवश्य मिले किन्तु वे आधा किलोमीटर भी नहीं चल पाए तथा वापिस चले गए थे।

लखनऊ से नवाबगंज पक्षी अभयारण्य – उत्तम एक-दिवसीय भ्रमण

यह पक्षी अभयारण्य वास्तव में एक विस्तृत आर्द्रभूमि है जिसके भीतर से छोटे छोटे अनेक टापू झांकते रहते हैं। वन विभाग ने इस जलाशय के चारों ओर पैदल चलने के लिए पथमार्ग विकसित किया है। इसके अतिरिक्त उन्होंने ऐसी पगडंडियाँ बनाई हैं जिनकी सहायता से आप जलाशय के भीतर जा सकते हैं तथा चारों ओर बैठे पक्षियों को निहार सकते हैं। यदि आप मुझसे पूछें कि यहाँ की सर्वोत्तम स्मृति क्या है, तो वह है, जलाशय के दोनों छोरों को जोड़ती इस संकरी पगडंडी पर चलते हुए चारों ओर विस्तृत नीले जल एवं सूर्य की आभा का आनंद उठाते सैकड़ों पक्षियों को निहारना! वह स्मृति मेरे मस्तिष्क में सदा के लिए छप गयी है।

शहीद चंद्रशेखर आज़ाद पक्षी विहार
शहीद चंद्रशेखर आज़ाद पक्षी विहार

यदि आप कुछ क्षण यहाँ शांति से बैठेंगे तो आप चारों ओर पक्षियों के समूह देखेंगे जिनमें कुछ जलाशय के जल में अठखेलियाँ करते हैं, स्नान करते हैं, कुछ आकाश में विचरण करते हैं तो कुछ यहाँ-वहां फुदकते रहते हैं। मानो यह उनका विशाल खेल का मैदान हो। जिन्हें पक्षी, विशेषतः नीले आकाश में उड़ते पक्षियों के छायाचित्र लेने में रूचि हो, तो उन्हें यहाँ अत्यंत आनंद आएगा

पक्षी छायाचित्रीकरण

मैंने निजी कार्यवश लखनऊ का एक लघु भ्रमण नियोजित किया था। इसलिए मैं अपने साथ कैमरा नहीं ले गयी थी। अतः मुझे सभी छायाचित्रीकरण अपने मोबाइल पर करना पड़ा था पक्षियों के छायाचित्रीकरण के लिए एक अच्छे कैमरे की आवश्यकता होती है जिसमें जूमलेंस अवश्य हो। अतः अपना कैमरा साथ रखना ना भूलें। पक्षियों को निहारने का सर्वोत्तम समय सूर्योदय तथा सूर्यास्त से लगभग ९० मिनट पूर्व का होता है जब आपको अनेक पक्षी दृष्टिगोचर होते हैं। आप उन्हें समीप से देख सकते हैं तथा विभिन्न क्रियाकलापों में व्यस्त उनके अनेक अनोखे चित्र ले सकते हैं। सूर्योदय के पश्चात पक्षी सामान्यतः झाड़ियों के भीतर चले जाते हैं। पर्यटन कालावधि में यह अभयारण्य आप जैसे पक्षी प्रेमी को कदापि निराश नहीं करेगी।

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यहाँ के विस्तृत पक्षी समूहों में कुछ प्रमुख पक्षी हैं:

  • सींखपर (Northern Pintail)
  • मजीठा की अनेक प्रजातियाँ (Pochards)
  • अंधा बगुला (Pond Herons), जामुनी बगुला (Purple Heron) तथा कबूद/अंजन अथवा धूसर बगुला (Grey Heron)
  • कालिम (Purple Moorhen)
  • गुगराल (Spot-billed Duck)
  • टिटहरी (Lapwings)
  • मुर्गाबी (Teals) जैसे, छोटी मुर्गाबी (Lesser Whistling Teal) तथा चिट्टा (Garganey Teal)
  • सुर्खिया बगुला (Cattle Egrets) तथा पीली चोंच वाला लघु श्वेत बगुला (Intermediate Egrets)
  • आरी (Common Coot)
  • पीपी (Bronze-winged Jacana)
  • गुगला (Asian Openbill Stork)
  • सारस (Sarus Crane)
  • कचाटोर (Black-headed Ibis)
  • लोहा सारंग (Black-necked Stork)
  • राजहंस (Bar-headed Goose)
  • पनडुब्बी (Darter)
  • लुप्तप्राय प्रजातियाँ जैसे, राज गिद्ध (Egyptian vulture) तथा मच्छमंगा (Pallas’s fish eagle)

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सन् १९८४ में स्थापित नवाबगंज पक्षी अभयारण्य कुल २२४ हेक्टेयर में फैला हुआ है। सन् २०१५ में इसका नामकरण ‘शहीद चंद्रशेखर आजाद पक्षी विहार’ कर दिया गया है। किन्तु अब भी इसे लोग नवाबगंज पक्षी अभयारण्य के नाम से जानते हैं। यह लखनऊ-कानपूर महामार्ग पर स्थित है तथा उन्नाव जिले के अंतर्गत आता है। सितम्बर २०१९ में इस अभयारण्य को ‘अंतर्राष्ट्रीय रूप से महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि’ का नामांकन प्राप्त हुआ है।

पानी के मध्य में द्वीप  - नवाबगंज पक्षी अभयारण्य
पानी के मध्य में द्वीप

इस अभयारण्य में उत्तर दिशा से प्रवासी पक्षियों की २५० से भी अधिक प्रजातियाँ आती हैं।

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उद्यानपथ या पगडंडियाँ

इस अभयारण्य के भीतर बनाए गए उद्यान पथ मुझे किसी भी अन्य अभयारण्य के उद्यान पथों से उत्तम प्रतीत हुए। अनेक स्थानों पर पर्यवेक्षण मचान बनाए हुए हैं। चूँकि मैं वहाँ दिन के समय गयी थी, वह भी बिना कैमरे के, इसलिए मैं उन मचानों पर नहीं चढ़ी।

नवाबगंज की पगडंडियाँ
नवाबगंज पक्षी अभयारण्य की पगडंडियाँ

जलाशय के तट पर, एक ओर मैंने कई नौकाएं देखीं जो अपने जीवन की अंतिम साँसे ले रही थीं। अतः मैंने सूचना खिड़की पर नौका विहार के विषय में जानने का प्रयत्न किया। उन्होंने मुझे बताया कि वहां पर्यटकों के लिए नौका विहार की सुविधाएं नहीं हैं। मैंने अनुमान लगाया कि कदाचित उन नौकाओं का प्रयोग वन विभाग के कर्मचारी अभयारण्य के रखरखाव के लिए करते हैं।

वहां से लौटने के पश्चात मैं उस अभयारण्य के विषय में अधिक जानकारी के लिए कुछ साहित्य पढ़ रही थी। तब मुझे ज्ञात हुआ कि इस अभयारण्य में सरिसर्पों एवं सर्पों की भी अनेक प्रजातियाँ पायी जाती हैं। भला ही हुआ कि इसकी मुझे पूर्व जानकारी नहीं थी। ‘अज्ञानता में आनंद है’ यह कहावत मेरे लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुई। अन्यथा, मैं अभयारण्य के वनीय वातावरण में जिस स्वच्छंदता से विचरण कर रही थी, उसमें अवश्य बाधा उत्पन्न हो जाती।

जलक्रीडा करते वृक्ष - नवाबगंज पक्षी अभयारण्य
जलक्रीडा करते वृक्ष

चारों ओर जल से घिरे वृक्ष तथा उन वृक्षों पर लदे पुष्प सम्पूर्ण परिदृश्य को अत्यंत मनमोहक बना रहे थे। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पौराणिक ग्रंथों में दर्शाए गए असंख्य रूपों व रंगों से ओतप्रोत प्राकृतिक दृश्य सजीव हो उठे हों। मानवी उपस्थिति लगभग नाममात्र थी जिसके कारण प्राकृतिक दृश्यों की अछूती सुन्दरता द्विगुणीत हो गयी थी। प्रवेश द्वार के समीप बैठने की व्यवस्था है जहां शांति से बैठकर आप पक्षियों का अवलोकन कर सकते हैं तथा प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद उठा सकते हैं।

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विश्रामगृह

यहाँ पर्यटन विभाग द्वारा संचालित एक विश्रामगृह है जहां आप रात्रि में ठहर सकते हैं। यहाँ ठहरने का लाभ यह है कि आप प्रातः शीघ्र ही पक्षी दर्शन के लिए अभयारण्य पहुँच सकते हैं। साथ ही आपको प्रकृति के सानिध्य में समय व्यतीत करने का अवसर प्राप्त होगा। इस विश्रामगृह में भोजनालय की भी सुविधा है। वन विभाग का भी एक विश्रामगृह है जहां ठहरने की अनुमति आपको वन विभाग से प्राप्त करनी पड़ेगी।

हरियाली के मध्य जल में झलकता अम्बर
हरियाली के मध्य जल में झलकता अम्बर

अभयारण्य में उपलब्ध विवरणिका में मैंने पढ़ा कि इसी स्थान पर लक्ष्मण ने कुछ क्षण विश्राम किया था जब वे सीता को बिठूर छोड़कर वापिस अयोध्या आ रहे थे।

इस अभयारण्य में विचरण करने के लिए सायकल पथ भी है। एक हिरण विहार भी है जो मैं नहीं देख पायी। प्रवेश द्वार के निकट एक बालोद्यान है।

कुल मिलाकर इस अभयारण्य दर्शन का अर्थ है, अद्भुत प्रकृति के सानिध्य में एक आनंदमय एवं शांतिपूर्ण दिवस व्यतीत करना। भीड़भाड़ भरे नगरों में रहते हुए व्यस्तता से ग्रसित हम सबको ऐसे स्थलों का दर्शन अनिवार्य रूप से करना चाहिए ताकि हम स्वयं को विश्राम दे सकें, पुनः उर्जावान अनुभव कर सकें तथा प्रकृति के प्रति संवेदनशील हो सकें।

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नवाबगंज पक्षी अभयारण्य यात्रा सुझाव

  • लखनऊ अथवा कानपुर में ठहरते हुए आप आसानी से एक दिवसीय यात्रा के रूप में इस अभयारण्य का अवलोकन कर सकते हैं।
  • इस अभयारण्य के भीतर पदयात्रा करनी पड़ती है। अतः पैरों में सुविधाजनक जूते पहनें।
  • यहाँ आने का सर्वोत्तम समय शीत ऋतु है। नवम्बर से फरवरी के मध्य दूर-सुदूर से यहाँ अनेक प्रवासी पक्षी आते हैं।
  • अभयारण्य के बाहर भोजन तथा जलपान की सुविधाएं हैं किन्तु अभयारण्य के भीतर ऐसी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। अभयारण्य के भीतर स्वयं का भोजन ले जाने की भी अनुमति नहीं है। अतः, अभयारण्य के भीतर प्रवेश करने से पूर्व जलपान अथवा हल्का भोजन ग्रहण कर लें।
  • संभव हो तो दूरबीन अवश्य साथ रखें।
  • टिकट खिड़की पर पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य है। अतः, अपना कोई प्रमाणिक पहचान पत्र साथ रखें।
  • अभयारण्य का प्रवेश शुल्क नाममात्र है किन्तु कैमरा शुल्क अधिक है। मोबाइल के लिए कोई बंधन नहीं है।
  • यदि चाहे तो आप सायकल द्वारा भी अभयारण्य का भ्रमण कर सकते हैं।

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अनुवाद: मधुमिता ताम्हणे

1 COMMENT

  1. अनुभव आधारित
    जानकारी युक्त एक अच्छे लेख की ओर अग्रसर|

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